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किसान ने अपने खेतों में 20 साल से नहीं जलाई कोई नरवाई

इंदौर। दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते है, जो अपने सामान्य कार्यों से आम आदमी से अलग पहचान बनाते है। कहानी एक ऐसे ही प्रेरक किसान की जो इंदौर के पास खंडवा रोड ग्राम मोरुद के 82 वर्षीय किसान श्री हाजी अब्दुल रहीम की जिन्होंने बीते 20 सालों से अपने खेत में नरवाई नहीं जलाई है और वे अब किसानों के लिए प्रेरक बन गए है।

कृषक हाजी अब्दुल रहीम बताते है की वे बीते 60 सालों से खेती कर रहे है। उनके पास 60 हेक्टेयर जमीं है, जिसमे वे सोयाबीन, मक्का, गेहूं, चना, और आलू की खेती करते है। जब तक उन्हें नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान का पता नहीं था, तब तक वे गेहूं फसल के बाद बचे अवशेष यानी नरवाई को जलाते रहे। जब उन्हें करीब 20 साल पहले कृषि कॉलेज से आये पूर्व अधिकारीयों ने नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया तब से उन्होंने इसे नकार दिया है, और फिर कभी नरवाई नहीं जलाई। उन्होंने अपने चाचा की नसीहत पर अमल करते हुए उनके भतीजे श्री जावेद अनवर, जो कि ग्राम बोरलाय तहसील बड़वाह के बड़े कृषक हैं, उन्होंने ने भी बीते तीन साल से नरवाई जलाना बंद कर दिया है।


श्री रहीम बताते है कि नरवाई को रोटावेटर से जमीन में मिला देने से  मित्र कीट नहीं मरते जो अगली फसल के लिए लाभदायक होते हैं। इसका खाद बहुत उपयोगी होता है। नरवाई के भूसे से पानी भी अवशोषित होता है, साथ ही जमीन की उर्वराशक्ति बनी रहती है। जबकि नरवाई जलाने से पर्यावरण तो प्रभावित होता ही है, जमीन को भी नुकसान पहुँचता है। उन्होंने कहा कि वे आसपास और मिलने वाले किसानों से नरवाई नहीं जलाने का आग्रह करते हैं, लेकिन कोई उनकी बात नहीं सुनता। प्रशासन भी नरवाई नहीं जलाने की अपील करता है। लेकिन सख्ती नहीं होने से हालात नहीं बदले हैं। आपने सुझाव दिया कि सरकार को नरवाई जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए इसके लिए अलग से कानून बनाना चाहिए तभी यह सिलसिला रुकेगा।