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Carrot (गाजर)

Basic Info

जैसे की आप जानते है गाजर एक महत्वपूर्ण जड़ वाली स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी है| इसकी खेती पूरे देश में की जाती है| इसकी जड़े, सब्जी, सलाद, अचार, मुरब्बा और हलवा आदि में प्रयोग होती है| गाजर में कैरोटीन एवं विटामिन ए पाया जाता है जो कि मनुष्य के शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक है।  गाजर भारत की प्रमुख सब्जी की फसल है। भारत में हरियाणा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और उत्तर प्रदेश गाजर उगाने वाले प्रमुख राज्य हैं।

Seed Specification

फसल की किस्म
पहाड़ियों -  ऊटी -1, नया कोरोदा
मैदानों -  पूसा केसर, आधा लंबा डैनवर

बुवाई का समय
गाजर की दो किस्म को उगाकर आप अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते है। पहली एशियन किस्म जिसकी बुवाई अगस्त से सितंबर महीने मे करनी चाहिए। व दूसरी किस्म युरोपियन किस्मे इनकी बुवाई अक्टूबर से नवंबर महीने मे करनी चाहिए।

दुरी
बुवाई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दुरी 45 से.मी. और पौधे से पौधे की दुरी 7.5 से.मी.होता है।
 
बीज की गहराई
फसल के अच्छे विकास के लिए बीज की गहराई 1.5  से.मी. होनी चाहिए।
 
बुवाई का तरीका 
बुवाई का तरीका गड्ढा खोदकर और हाथों से छींटा देकर प्रयोग किया जाता है।

बीज की मात्रा
एक एकड़ भूमि की बुवाई के लिए 4-5 किलोग्राम/ एकड़ बीज की दर पर्याप्त है।

बीज का उपचार
गाजर की खेती से अच्छे उत्पादन के लिए बीज बोने से पहले 12-24 घंटे के लिए पानी में भिगोए, यह अंकुरण प्रतिशत बढ़ाएगा।

Land Preparation & Soil Health

अनुकूल जलवायु:
तापमान - 7-23°C
वर्षा - 75-100 cm
बुवाई के लिए तापमान - 18-23°C
कटाई के लिए तापमान - 20-25°C

भूमि
गाजर की खेती करने के लिए गहरी भूरभूरी व हल्की दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना गया है। जिसका पी एच मान 6.5 हो। खेती से अच्छी पैदावार लेने के लिए भूमि मे पानी का निकास अच्छा होना जरूरी है।

खेत की तैयारी 
बुवाई करने से पहले खेत की 2 से 3 गहरी जुताई करके अच्छी तरह से खेत को समतल और भुरभुरा कर लेना चाहिए। मिट्टी के ढेले को तोड़ने के लिए पाटा लगाए। पशुओ की सडी हुई गोबर खाद को मिट्टी मे मिलाकर अच्छी तरह तैयार कर ले।

Crop Spray & fertilizer Specification

खाद एवं रासायनिक उर्वरक
बुवाई से पूर्व खेत तैयार करते समय अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद 5 -10 टन/एकड़ की दर से खेत में अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। रासायनिक उर्वरक में नाइट्रोजन 25 किलो, फास्फोरस 12 किलो ,पोटाश 30 किलो प्रति एकड़ की दर से देवें। और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिट्टी परिक्षण के आधार पर देवें।

Weeding & Irrigation

खरपतवार नियंत्रण
खरपतवार की रोकथाम करने के लिए गाजर की खेती मे 2 से 3 बार निराई गुड़ाई का कार्य करना चाहिए। और आवश्यकता अनुसार निराई गुड़ाई करें। 

सिंचाई
बुवाई के बाद, पहली सिंचाई लागू करें, यह अच्छे अंकुरण में मदद करेगा। मिट्टी के प्रकार और जलवायु के आधार पर, शेष सिंचाई गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतर पर और सर्दियों के महीने में 10-12 दिनों के अंतर पर करें। कुल मिलाकर गाजर को तीन से चार सिंचाई की आवश्यकता होती है। अत्यधिक सिंचाई से बचें क्योंकि यह जड़ों और कई बालों के विकास में वृद्धि करेगा। कटाई से दो से तीन सप्ताह पहले सिंचाई बंद कर दें, इससे गाजर की मिठास और स्वाद बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Harvesting & Storage

कटाई का समय 
किस्म के आधार पर, गाजर बुवाई के 90-100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। पौधों को उखाड़कर हाथों से कटाई की जाती है। कटाई के बाद गाजर से हरे रंग के टॉप निकालते हैं और फिर उन्हें पानी से धोया जाता है।

उत्पादन क्षमता
00-120 दिनों में 25-30 टन/हेक्टेयर।

सफाई और सुखाने
कटाई के बाद गाजर की छंटाई आकार के आधार पर की जाती है। फिर उन्हें बंदूक की थैलियों या टोकरी में पैक किया जाता है।


Crop Related Disease

Description:
बारिश और कोहरा बीमारी के विकास को बढ़ाता है। फसल के मलबे पर मिट्टी में कवक जीवित रहता है लेकिन मलबे के विघटित होने पर मारा जाता है।
Organic Solution:
ट्राइकोडर्मा (Trichoderma viride) का और वीटावैक्स मिश्रण प्रभावी रूप से आगे के संक्रमण (98.4% तक) में बाधा डालता है। मिक्स यूरिया @ 2 - 3% ज़िनब के साथ स्प्रे करे। बीज जनित इनोक्यूलम को कम करने के लिए फफूंदनाशक और गर्म पानी के उपचार का उपयोग किया गया है।
Chemical Solution:
अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट (Alternaria leaf spot) को नियंत्रित करने के लिए कवकनाशी सबसे व्यवहार्य रासायनिक नियंत्रण है। कवकनाशी के साथ बीज का इलाज करने से संक्रमण की संभावना को कम करने में भी मदद मिल सकती है। रोग को नियंत्रित करने के लिए ज़िनब और थीरम को सबसे प्रभावी पाया गया।
Description:
गाजर की ब्लैक रूट थिएलावोप्सिस बेसिकोला (Thielaviopsis basicola) के कारण होती है, मुख्य रूप से फसल के बाद की बीमारी है। रोगज़नक़ा दुनिया भर में होता है और इसमें एक विस्तृत श्रृंखला होती है, जिसमें फलियां, आलू, और कुकुरबिट परिवारों के साथ-साथ कई आभूषण और वुडी पौधे भी शामिल हैं।
Organic Solution:
रोपण के मौसम में देरी के मामले में, रोपण से पहले 30 मिनट के लिए गर्म पानी (51 डिग्री सेल्सियस पर) में इलाज करें। उन डंठल की तलाश करें जो खेत में नहीं उग पाए हैं और उन्हें रोग के लक्षणों का पता लगाने के लिए विभाजित करे(सड़न और दुर्गंध)।
Chemical Solution:
गर्म पानी (30 मिनट के लिए 50 डिग्री सेल्सियस) या गर्म ब्लीच (30 मिनट के लिए 0.1% सोडियम हाइपोक्लोराइट) में इसका इलाज करें। फसल चक्रण का अभ्यास करें। जमीन पर रोपण से 3-4 साल पहले छोड़ दें जहां बीमारी की पहचान की गई है।
Description:
अकुंरित पीले-सफेद मार्जिन वाले पत्तियां, टिप से पत्तियों का सूखना, मध्य रिब को छोड़ना प्रमुख लक्षण हैं।
Organic Solution:
नीम का तेल 3% या NSKE 5% स्प्रे करें। बैक्टीरियल ब्लाइट के नियंत्रण के लिए ताजे गोदांग के अर्क का छिड़काव करें। एक लीटर पानी में 20 ग्राम गोदांग भंग करें। सतह पर तैरनेवाला तरल का उपयोग करें। (रोग की प्रारंभिक उपस्थिति से शुरू और एक पखवाड़े के अंतराल पर)।
Chemical Solution:
बैक्टीरियल ब्लाइट से निपटने के लिए, एक एंटीबायोटिक प्लस कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कॉपर सल्फेट वाले बीजों के उपचार करे। ब्लीचिंग पाउडर (100 ग्रा। / ली।) और जिंक सल्फेट (2%) के साथ बीज उपचार बैक्टीरिया को कम करता है। बीज उपचार - एग्रीमाइसिन (0.025%) में 8 घंटे के लिए बीज भिगोना और वेटेबल सेरेसन (0.05%) 52-54oC पर 30 मिनट के लिए गर्म पानी के उपचार के बाद| सेरेसन (0.1%) में 8 घंटे तक भिगोने वाला बीज और स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (1 लीटर में 3 जी) से उपचारित करें| स्प्रे स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट + टेट्रासाइक्लिन संयोजन 300 ग्राम + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 1.25 किग्रा / हे। यदि आवश्यक हो तो 15 दिन बाद दोहराएं। सिंचाई के पानी में ब्लीचिंग पाउडर @ 5 किग्रा / हेक्टेयर की दर से क्षार अवस्था में लगाने की सलाह दी जाती है। द्वितीयक प्रसार की जांच करने के लिए स्ट्रेप्टो-साइक्लिन (250 पीपीएम) के साथ वैकल्पिक रूप से तांबे के कवक के साथ पर्ण स्प्रे।

Carrot (गाजर) Crop Types

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Frequently Asked Questions

Q1: गाजर की खेती के लिए सा मौसम सबसे अनुकूल होता है?

Ans:

भारत में, सर्दियों के मौसम में गाजर सबसे अच्छी होती है, और बीज अक्टूबर-नवंबर से बोया जाना चाहिए,  इन्हें मानसून के दौरान भी उगाया जा सकता है।

Q3: गाजर की खेती के लिए कितना बीज और कौन सी मिटटी की आवश्यकता होती है?

Ans:

आप जानते है गाजर की बुवाई लिए प्रति हैक्टेयर 10 से 12 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।इसके लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है, लेकिन आजकल अन्य भूमियों में भी इसकी खेती होने लगी है। भारी भूमियों में या जहां नीचे की भूमि सख्त होती है, ऐसे खेतों में गाजर की फोर्किग (गाठ पंजा) की समस्या आ सकती है।

Q5: क्या गाजर खरीफ की फसल अंतगर्त आती है?

Ans:

गाजर एक प्रकार की रबी सीजन की फसल है, रबी फसलों की सब्जियां गोभी, फूलगोभी, गाजर, मूली, शलजम, बीन्स आदि हैं। रबी फसलों के फल सेब, अनार, संतरा आदि हैं।

Q2: गाजर का प्रयोग किस प्रकार से किया जा सकता है?

Ans:

गाजर को कच्चा व पकाकर दोनों तरीके से खाया जाता है। गाजर में काफी मात्रा में विटामिन व मिनरल पाए जाते हैं। इसका ज्यूस बनाकर पीया जाता है। वहीं सब्जी,सलाद, अचार, हलवा आदि बनाया जाता हैं।

Q4: गाजर क्या है?

Ans:

गाजर यह अंबेलिफर कुटुंब की अपियासी की द्विवार्षिक वनस्पति है। इसमें शुरू में टॅप्रूट बढ़ते समय पत्ते फूटते है और वह बढ़ते हैं। इसके जड़ भाग को खाने के उपयोग में लिया जाता है ये तीन रंगों में उगाई जाती है- लाल, काली और नारंगी। अच्छे गुणों वाली मोटी, लंबी, लाल या नारंगी रंग की जड़ों वाली गाजर अच्छी मानी जाती है।

Q6: भारत में गाजर की खेती किन राज्यों में की जाती है?

Ans:

गाजर अपनी मांसल खाने योग्य जड़ों के लिए दुनिया भर में उगाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण जड़ वाली फसल है। भारत में गाजर उगाने वाले प्रमुख राज्य कर्नाटक, पंजाब, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश हैं।