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युवाओं को अपनी और कर रहीं आकर्षित कृषि उद्यमिता योजनाएं

नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि उद्यमिता योजनाएं को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि मंत्रालय द्वारा शिक्षित युवाओं को खेती के प्रति आकर्षित करने में कारगर साबित हुई हैं। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की गुरुवार को हुई बैठक में इसका ब्योरा पेश किया। उन्होंने इस दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के प्रयासों की प्रशंसा भी की। और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ‘कृषि उद्यमशीलता और स्टार्ट-अप’ विषय पर बैठक आयोजित थी। आइसीएआर के बारे में कृषि मंत्री सिंह ने कहा कि उसके विभिन्न संस्थानों की विकसित प्रौद्योगिकी ने देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। देश में इस समय पर्याप्त खाद्यान्न के साथ-साथ बागवानी उपज, दूध, मछली और अंडे का उत्पादन बढ़ाने में संस्थानों ने अहम भूमिका निभाई है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरुप किसानों की आमदनी को दोगुना करने में युवा उद्यमियों ने भी उत्साहजनक पहल की है। स्टार्ट अप इंडिया मिशन से कृषि क्षेत्र में ग्रामीण युवाओं को नई दिशा मिली है। इससे जहां किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है, वहीं युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों पर किसानों को उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के तहत कृषि से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण एवं तकनीकी संसाधन प्रदान किये जा रहे हैं।

 

सिंह ने कहा कि ग्रामीण शिक्षित युवाओं को कृषि की तरफ आकर्षित करने के लिए शुरू की गई योजना आर्या योजना कारगर साबित हो रही है। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिहाज से छात्र उद्यमिता जागरूकता विकास (स्टूडेंट रेडी) योजना लागू की गई है। इसके अलावा आइसीएआर ने अपने संस्थानों की ओर से विकसित प्रौद्योगिकी से रोजगार एवं आमदनी बढ़ाने के उपाय किये जा रहे हैं। इसके तहत 25 संस्थानों पर कृषि उद्यमिता विकास केंद्रों (एग्री इंक्यूबेशन सेंटर) की स्थापना की गई है। इन सेंटरों से नए स्टार्ट-अप बाजार में आ रहे हैं। सलाहकार समिति की बैठक में सिंह के साथ उनके तीनों राज्य मंत्री परसोत्तम रुपाला, कृष्णाराज और गजेंद्र सिंह शेखावत उपस्थित थे। लेकिन विभिन्न वजहों से समिति के बहुत कम सदस्यों ने बैठक में हिस्सा लिया।