फरवरी का बदलता मौसम बढ़ा रहा है चिंता
फरवरी का महीना गेहूं की खेती के लिए सबसे संवेदनशील समय माना जाता है। आमतौर पर इस दौरान हल्की ठंड बनी रहती है, लेकिन हाल के वर्षों में मौसम अचानक करवट बदल रहा है। सुबह-शाम ठंडी हवाएं और दिन में तेज़ गर्मी, गेहूं की फसल पर सीधा असर डाल रही हैं। ऐसे में किसानों को इस महीने विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
इस समय गेहूं की फसल किस अवस्था में होती है
फरवरी में अधिकतर खेतों में गेहूं की बालियां निकलने लगती हैं और दानों में दूध भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यह अवस्था फसल के लिए बेहद नाज़ुक होती है। इसी समय अगर तेज़ हवा, अधिक तापमान या गलत सिंचाई हो जाए, तो फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उपज में 20 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
फरवरी में गेहूं को सुरक्षित रखने के 5 कारगर उपाय
1. सिंचाई सोच-समझकर करें
फरवरी में अचानक गर्मी बढ़ने के बाद तेज़ हवाएं चलने की संभावना रहती है। यदि खेत में ज्यादा पानी भर दिया जाए और उसी समय हवा चल जाए, तो गीली मिट्टी के कारण पौधे जड़ से गिर सकते हैं। इसलिए हल्की सिंचाई करें और वह भी तब, जब हवा शांत हो। स्प्रिंकलर विधि इस समय सबसे सुरक्षित मानी जाती है।
2. फरवरी में नाइट्रोजन से दूरी बनाएं
कई किसान इस समय भी नाइट्रोजन देने की गलती कर बैठते हैं, जिससे पौधा जरूरत से ज्यादा लंबा हो जाता है। लंबा पौधा देखने में अच्छा लगता है, लेकिन वास्तव में वही पौधा हवा में सबसे पहले गिरता है। बेहतर होगा कि किसान इस समय पोटाश और फास्फोरस का संतुलित उपयोग करें। इससे तना मजबूत बनता है और दाने अच्छे से भरते हैं। फास्फोरस जड़ों और दाने बनने की प्रक्रिया को बेहतर करता है।
3. बोरॉन से दानों को बनाएं मजबूत
दाना बनते समय बोरॉन की कमी गेहूं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। बोरॉन का हल्का छिड़काव करने से परागण बेहतर होता है और दाने स्वस्थ, चमकदार और भरपूर वजन वाले बनते हैं।
4. फसल की लंबाई पर रखें नियंत्रण
यदि गेहूं की किस्म अधिक ऊंचाई वाली है, तो पौधे के गिरने की आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों की सलाह से प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर का उपयोग किया जा सकता है। इससे पौधे की अनावश्यक बढ़वार रुकती है और ऊर्जा सीधे बालियों के विकास में लगती है।
5. मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखें
आजकल मौसम की सटीक जानकारी मोबाइल ऐप्स के जरिए आसानी से मिल जाती है। यदि अगले कुछ दिनों में तेज हवा या बारिश का अनुमान हो, तो सिंचाई टाल दें और खेत की स्थिति पर लगातार नजर रखें।
फरवरी में गेहूं को क्यों होता है ज्यादा नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि फरवरी में तापमान सामान्य से अधिक बना रहता है और बारिश कम होती है, तो गेहूं की फसल समय से पहले पकने लगती है। इससे दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते और उनका वजन कम रह जाता है। लंबे समय तक बढ़ा तापमान उत्पादन को सीधे प्रभावित कर सकता है।
दाने भरने के समय खेत में कौन-सी गलतियां न करें
फरवरी में किसान अक्सर कुछ सामान्य लेकिन गंभीर गलतियां कर बैठते हैं—
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जरूरत से ज्यादा पानी दे देना
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बिना सलाह के दवा या घोल का छिड़काव
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एक साथ कई पोषक तत्व मिला देना
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मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज करना
यही छोटी-छोटी गलतियां आगे चलकर बड़ी उपज हानि में बदल जाती हैं।
किसानों के लिए विशेष व्यवहारिक सुझाव
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खेत में पानी कभी भी लंबे समय तक जमा न रहने दें
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दवा या खाद का छिड़काव दोपहर की तेज धूप में न करें
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फसल का निरीक्षण सप्ताह में कम से कम दो बार करें
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यदि खेत के किसी हिस्से में फसल कमजोर दिखे, तो तुरंत कारण पता करें
किसानों के लिए जरूरी सलाह
फरवरी में थोड़ी-सी समझदारी और समय पर लिया गया फैसला आपकी पूरी मेहनत को बचा सकता है। सही सिंचाई, संतुलित पोषण और मौसम पर नजर रखकर किसान न सिर्फ फसल को गिरने से बचा सकते हैं, बल्कि अच्छी पैदावार भी सुनिश्चित कर सकते हैं।
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