60 दिन के बाद गेहूं में यूरिया देना क्यों बन सकता है घाटे का सौदा? जानिए सही स्प्रे का तरीका
गेहूं की फसल का नाज़ुक दौर शुरू: अब छोटी गलती बन सकती है बड़ा नुकसान
गेहूं की फसल जब लगभग 60 दिन की हो जाती है, तब वह सामान्य बढ़वार की अवस्था से निकलकर दाना बनने की तैयारी में प्रवेश करती है। इस समय पौधे की जरूरतें बदल जाती हैं। खेत में हल्की-सी भी गलत खाद या गलत समय पर किया गया छिड़काव सीधे पैदावार और गुणवत्ता पर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस चरण में पोषण का चुनाव सोच-समझकर करना बेहद जरूरी होता है।
60 दिन बाद क्यों रोक देना चाहिए यूरिया का प्रयोग
कई किसान हरे-भरे खेत देखकर इस समय भी यूरिया डाल देते हैं, लेकिन यही आदत बाद में नुकसान का कारण बनती है। इस अवस्था में अधिक नाइट्रोजन पौधे को जरूरत से ज्यादा कोमल बना देती है, जिससे रोग और कीटों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही पौधे की ऊर्जा पत्तियों और तनों में चली जाती है, जबकि इस समय उसे बालियों और दानों को मजबूत बनाने पर लगना चाहिए। इसलिए 60 दिन के बाद खेत में यूरिया का प्रयोग बंद करना बेहतर माना जाता है।
सही पोषण से मजबूत बालियां पाने का तरीका
अगर फसल सामान्य स्थिति में है और अत्यधिक कमजोर नहीं दिख रही है, तो इस समय घुलनशील उर्वरकों का चयन ज्यादा उपयोगी रहता है।
इस अवस्था में NPK 0:52:34 का छिड़काव किया जा सकता है। इसमें मौजूद फास्फोरस बालियों के समान रूप से निकलने में मदद करता है और पोटाश तनों को मजबूती देता है।
छिड़काव के लिए प्रति एकड़ लगभग 1 से 2 किलो उर्वरक को 100 से 200 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करना उपयुक्त रहता है।
जब बालियां पूरी निकल आएं, तब अपनाएं यह फॉर्मूला
फसल में बालियां बाहर आ जाने के बाद अगला और सबसे अहम लक्ष्य होता है – दानों का सही भराव। इस समय NPK 0:0:50 का फोलियर स्प्रे बेहद लाभकारी माना जाता है।
यह पोटाश आधारित घुलनशील उर्वरक दानों तक पौधे की ऊर्जा पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे दाने सिकुड़ते नहीं हैं और आकार में भरे-पूरे बनते हैं।
दानों की चमक और वजन बढ़ाने में पोटाश की भूमिका
अंतिम चरण में किया गया पोटाश का छिड़काव दानों की गुणवत्ता पर सीधा असर डालता है। इससे दानों में स्टार्च और शर्करा का सही संचरण होता है, जिससे दाने भारी, सुडौल और चमकदार बनते हैं।
अच्छी गुणवत्ता के कारण किसान को मंडी में बेहतर भाव मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
किसान क्या रखें विशेष ध्यान
इस समय खेत में किसी भी तरह की अतिरिक्त नाइट्रोजन देने से बचें। यदि फसल पहले से अच्छी बढ़वार ले चुकी है, तो बिना नाइट्रोजन वाले घुलनशील उर्वरक ही चुनें। स्प्रे हमेशा सुबह या शाम के समय करें और तेज धूप में छिड़काव से बचें।
समझदारी से चुना गया यही एक स्प्रे, गेहूं की फसल में दानों का वजन, चमक और बाजार मूल्य – तीनों को बेहतर बना सकता है।
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