किसान भाई अक्सर फसल कमजोर होने पर बीज, खाद या मौसम को जिम्मेदार मान लेते हैं। लेकिन कई बार असली परेशानी खेत की मिट्टी में छिपी होती है। अगर मिट्टी की सेहत बिगड़ने लगे तो अच्छी से अच्छी फसल भी उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं दे पाती। इसलिए समय रहते मिट्टी के संकेतों को समझना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी आपकी मिट्टी को फिर से उपजाऊ बना सकती है और पैदावार भी बढ़ा सकती है।
सबसे पहले पौधे ही देते हैं संकेत
अगर खेत में पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगें, उनकी बढ़वार रुक जाए या जड़ें कमजोर दिखाई दें, तो समझ लीजिए कि मिट्टी में कुछ कमी है। ऐसी मिट्टी से पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता। नतीजा यह होता है कि फसल कमजोर पड़ने लगती है और रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।
मिट्टी की बनावट भी बहुत कुछ बताती है
स्वस्थ मिट्टी हमेशा भुरभुरी और मुलायम होती है। ऐसी मिट्टी में पानी आसानी से समा जाता है और जड़ों को फैलने की पूरी जगह मिलती है।
लेकिन अगर मिट्टी बहुत सख्त हो जाए, बड़े-बड़े ढेले बनने लगें या ऊपर कठोर परत दिखाई दे, तो यह साफ संकेत है कि मिट्टी की गुणवत्ता कम हो रही है। ऐसी मिट्टी में फसल की बढ़वार प्रभावित होने लगती है।
पोषक तत्वों की कमी भी बनती है बड़ी वजह
फसल को अच्छी बढ़वार के लिए मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर और दूसरे जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन होना जरूरी है। इनमें से किसी भी तत्व की कमी होने पर उत्पादन घट सकता है।
इसीलिए कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 3 से 5 साल में मिट्टी की जांच जरूर कराएं। इससे पता चल जाता है कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और कौन-सी खाद कितनी मात्रा में देनी चाहिए।
ये गलतियां मिट्टी को बना रही हैं कमजोर
आज कई खेतों में लगातार एक जैसी खेती, पराली जलाना और रासायनिक खाद व कीटनाशकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल मिट्टी की सेहत पर बुरा असर डाल रहा है।
पराली जलाने से मिट्टी के अंदर रहने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। वहीं, रासायनिक दवाओं का अधिक उपयोग मिट्टी की जैविक शक्ति को धीरे-धीरे खत्म कर देता है। इसका असर आने वाले वर्षों की फसल पर भी दिखाई देता है।
मिट्टी को फिर से उपजाऊ कैसे बनाएं?
अगर आप चाहते हैं कि खेत लंबे समय तक अच्छी पैदावार देता रहे, तो मिट्टी की देखभाल पर भी उतना ही ध्यान दें जितना फसल पर देते हैं।
इसके लिए:
● जैविक खाद का उपयोग बढ़ाएं।
● फसल चक्र अपनाएं।
● खेत में हरियाली बनाए रखें।
● सिंचाई का सही प्रबंधन करें।
● बिना मृदा परीक्षण के खाद डालने की बजाय जांच रिपोर्ट के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें।
किसान भाई, मिट्टी स्वस्थ होगी तभी फसल मजबूत होगी
मिट्टी ही खेती की सबसे बड़ी पूंजी है। अगर इसकी सेहत अच्छी रहेगी, तो फसल भी मजबूत होगी और उत्पादन भी बेहतर मिलेगा। इसलिए खेत में दिखने वाले छोटे-छोटे संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही उपाय अपनाकर आप मिट्टी की उर्वरता बनाए रख सकते हैं और आने वाले वर्षों तक बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं।
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