धान की खेती में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां! एक छोटी लापरवाही से घट सकती है पूरी पैदावार

धान की खेती में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां! एक छोटी लापरवाही से घट सकती है पूरी पैदावार
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Kisaan Helpline

Agriculture
Jul 08, 2026

Rice Farming News | किसान हेल्पलाइन

मानसून की अच्छी शुरुआत के साथ किसानों ने धान की रोपाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय की गई छोटी-सी गलती भी पूरे सीजन की मेहनत पर भारी पड़ सकती है। नर्सरी से पौध निकालने से लेकर रोपाई, खेत की तैयारी और शुरुआती सिंचाई तक हर कदम वैज्ञानिक तरीके से करना जरूरी है। सही तकनीक अपनाने से जहां पौधे तेजी से बढ़ते हैं, वहीं उत्पादन और मुनाफा दोनों में बढ़ोतरी होती है।

नर्सरी से पौध निकालने में न करें जल्दबाजी

विशेषज्ञों के अनुसार, धान की नर्सरी से पौधे उखाड़ने से एक दिन पहले बेड में पर्याप्त पानी देना चाहिए। इससे मिट्टी मुलायम रहती है और पौध आसानी से निकल जाती है। यदि सूखी मिट्टी से पौधे खींचे जाते हैं तो उनकी जड़ें टूट सकती हैं, जिससे मुख्य खेत में रोपाई के बाद पौधे अच्छी तरह स्थापित नहीं हो पाते।

पौधे निकालते समय उन्हें तने के निचले हिस्से से पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर की ओर निकालें। इससे जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता और पौधे स्वस्थ बने रहते हैं। साथ ही, उखाड़ी गई पौध को लंबे समय तक खुले में न छोड़ें। कोशिश करें कि 24 घंटे के भीतर उसकी रोपाई पूरी कर दी जाए, ताकि पौध की जीवित रहने की क्षमता बनी रहे।

रोपाई से पहले खेत की सही तैयारी है सफलता की कुंजी

धान की अच्छी फसल के लिए खेत की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। खेत की दो से तीन बार अच्छी जुताई करने के बाद उसमें पानी भरकर पडलिंग (कीचड़ तैयार करना) करनी चाहिए। इससे मिट्टी समतल होती है, नमी लंबे समय तक बनी रहती है और नई जड़ों को तेजी से फैलने का मौका मिलता है।

रोपाई करते समय पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखना भी जरूरी है। लाइन से लाइन की दूरी लगभग 20 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी जाती है। एक स्थान पर केवल 2 से 3 स्वस्थ पौधे लगाने से अधिक कल्ले निकलते हैं और फसल का विकास बेहतर होता है।

शुरुआती सिंचाई और पोषण में न करें लापरवाही

रोपाई के बाद पहले सप्ताह तक खेत में लगभग 2 से 3 इंच पानी बनाए रखना चाहिए। इससे पौधों की नई जड़ें मजबूत होती हैं और वे तेज धूप व तापमान के प्रभाव से सुरक्षित रहती हैं।

खाद प्रबंधन में भी जल्दबाजी या अनुमान के आधार पर निर्णय लेने के बजाय मिट्टी परीक्षण के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करना चाहिए। यदि खेत में जिंक की कमी हो तो जिंक सल्फेट का प्रयोग लाभकारी साबित होता है। इससे पौधों की वृद्धि तेज होती है और शुरुआती पोषक तत्वों की कमी से होने वाली समस्याओं से बचाव मिलता है।

किसानों के लिए विशेषज्ञों की अहम सलाह

धान की खेती में अधिक उत्पादन पाने के लिए केवल अच्छी किस्म का बीज ही पर्याप्त नहीं है। नर्सरी प्रबंधन, सही समय पर रोपाई, संतुलित दूरी, उचित सिंचाई और वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन जैसी छोटी-छोटी बातें ही बड़ी सफलता तय करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इन सावधानियों का पालन करें, तो फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी, पौधों की संख्या मजबूत रहेगी और प्रति एकड़ उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।

धान की खेती में इन 5 बातों का रखें विशेष ध्यान

● नर्सरी से पौधे निकालने से एक दिन पहले बेड में पानी जरूर दें।
● पौध की जड़ों को टूटने से बचाते हुए 24 घंटे के भीतर रोपाई करें।
● रोपाई के समय 20×15 सेंटीमीटर की उचित दूरी बनाए रखें।
● पहले सप्ताह तक खेत में 2–3 इंच पानी बनाए रखें।
● मिट्टी परीक्षण के आधार पर संतुलित खाद और जरूरत पड़ने पर जिंक सल्फेट का उपयोग करें।

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