Cow Dung Market Price: खेती के साथ गोबर से भी होगी कमाई, जानिए बाजार भाव और बिक्री के आसान तरीके
जिस गाय के गोबर को पहले केवल खेतों की खाद या ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, वही आज किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का मजबूत जरिया बनता जा रहा है। जैविक खेती की बढ़ती मांग, बायोगैस परियोजनाओं और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों की लोकप्रियता के कारण गाय के गोबर की मांग लगातार बढ़ रही है। अब किसान केवल दूध ही नहीं, बल्कि गोबर बेचकर भी अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।
क्यों बढ़ रही है गाय के गोबर की मांग?
देशभर में जैविक खेती तेजी से बढ़ रही है। किसान रासायनिक खाद की जगह प्राकृतिक खाद का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा गोबर से बायोगैस, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद, धूपबत्ती, अगरबत्ती, दीये, गमले और कई अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। यही वजह है कि गोबर की मांग पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई है।
सरकार भी जैविक खेती और बायोगैस परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है, जिससे गोबर आधारित उत्पादों का बाजार लगातार मजबूत हो रहा है।
गाय का गोबर कितने रुपये किलो बिकता है?
गोबर की कीमत उसकी गुणवत्ता और उपयोग के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
● ताजा गाय का गोबर: ₹30 से ₹50 प्रति किलो
● प्रोसेस की गई जैविक खाद: ₹20 से ₹70 प्रति किलो या उससे अधिक
● गोबर पाउडर, उपले और अन्य उत्पादों की कीमत गुणवत्ता और पैकिंग के अनुसार तय होती है।
अगर किसान गोबर को प्रोसेस करके उत्पाद तैयार करते हैं, तो उन्हें सामान्य गोबर की तुलना में कई गुना अधिक कीमत मिल सकती है।
किसान गोबर कहां बेच सकते हैं?
किसानों के पास गोबर बेचने के कई आसान विकल्प मौजूद हैं।
1. स्थानीय बाजार में सीधी बिक्री
अपने आसपास के किसानों, नर्सरी, फल एवं सब्जी उत्पादकों, डेयरी फार्म और गोशालाओं को सीधे गोबर बेच सकते हैं।
2. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री
गोबर से बने उपले, जैविक खाद, धूपबत्ती, दीये और अन्य उत्पाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
3. ऑर्गेनिक खाद बनाने वाली कंपनियां
कई निजी कंपनियां और बड़े खरीदार बड़ी मात्रा में गोबर और उससे बने उत्पाद खरीदते हैं।
4. सरकारी योजनाओं का लाभ
कई राज्यों में सरकार गोबर आधारित योजनाओं के तहत किसानों से गोबर खरीदती है। इसके लिए किसान अपने कृषि विभाग, ग्राम पंचायत या संबंधित सरकारी कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
5. खुद बनाएं वैल्यू एडेड प्रोडक्ट
अगर किसान गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले या पूजा सामग्री तैयार करते हैं तो उनकी कमाई कई गुना बढ़ सकती है।
विदेशों में भी बढ़ रही है भारतीय गोबर की मांग
भारत से गाय के गोबर और उससे बने उत्पाद कई देशों में भेजे जा रहे हैं। इनमें अमेरिका, सिंगापुर, चीन, नेपाल, ब्राजील, मालदीव, कंबोडिया, वियतनाम और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) प्रमुख खरीदार हैं।
निर्यात में केवल कच्चा गोबर ही नहीं, बल्कि कम्पोस्ट खाद, जैविक उर्वरक, गोबर पाउडर, उपले और गोबर आधारित कीटनाशक भी शामिल हैं।
निर्यात से जुड़ी अहम बातें
● वर्ष 2024 में भारत से कच्चे गोबर का निर्यात लगभग ₹125 करोड़ का रहा।
● गोबर से बने उर्वरकों का निर्यात करीब ₹173.67 करोड़ तक पहुंचा।
● कम्पोस्ट खाद का निर्यात लगभग ₹88 करोड़ रहा।
● 2023-24 के दौरान भारत के 181 से अधिक निर्यातकों ने 1,100 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट भेजीं।
भारत में सबसे ज्यादा गोबर कहां बनता है?
देश में गाय के गोबर उत्पादन में राजस्थान पहले स्थान पर है। इसके बाद उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का नंबर आता है।
अनुमान है कि भारत में प्रतिदिन करीब 30 लाख मीट्रिक टन गाय का गोबर उत्पन्न होता है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े गोबर उत्पादक देशों में शामिल है।
किसानों के लिए बड़ा मौका
अगर आपके पास गाय या डेयरी पशु हैं तो गोबर को केवल खेत में इस्तेमाल करने तक सीमित न रखें। इसे जैविक खाद या अन्य उपयोगी उत्पादों में बदलकर स्थानीय बाजार, कंपनियों और ऑनलाइन माध्यमों से बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। आज के समय में गोबर भी खेती की कमाई बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण संसाधन बन चुका है।
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