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सोयाबीन में खरपतवार नियंत्रण बुवाई के बाद शुरुआती 15–45 दिनों के भीतर करना सबसे प्रभावी माना जाता है। समय पर निराई-गुड़ाई, खेत की नियमित निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार खरपतवारनाशी का उपयोग करने से फसल की बढ़वार और पैदावार दोनों में सुधार होता है।
सोयाबीन की फसल में खरपतवार को समय पर कंट्रोल नहीं किया जाता है, तो वे पानी, पोषक तत्वों, धूप और जगह के लिए पौधों से मुकाबला करते हैं। इसका सीधा असर पौधे की ग्रोथ और पैदावार पर पड़ता है। रिसर्च से पता चलता है कि खरपतवार सोयाबीन की पैदावार को 26% से 84% तक कम कर सकते हैं। फसल के पहले 15 से 45 दिन खरपतवार कंट्रोल के लिए सबसे ज़रूरी माने जाते हैं।
सोयाबीन बुवाई के बाद पहले 15–45 दिनों में सोयाबीन की ग्रोथ धीमी होती है। यह वह समय होता है जब खरपतवार तेज़ी से बढ़ते हैं और पौधे की ग्रोथ पर असर डालते हैं। इस समय खेत को खरपतवार से मुक्त रखने से फसलें हेल्दी रहेंगी और बेहतर पैदावार मिलेगी।
सोयाबीन के खेतों में सामान्यतः तीन प्रकार के खरपतवार मिलते हैं।
1. घास वर्ग (Grassy Weeds)
सांवा
दूब घास
मोथा जैसी घासें
2. चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार (Broadleaf Weeds)
बथुआ
चेंच
अन्य चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार
3. मोथा वर्ग (Sedges)
मोथा (Cyperus spp.)
खरपतवार की सही पहचान करने से उचित नियंत्रण विधि चुनना आसान हो जाता है।
1. खेत की अच्छी तैयारी करें
बुवाई से पहले खेत की अच्छी जुताई करें।
पुराने खरपतवार और उनकी जड़ों को नष्ट करें।
खेत में जलभराव न होने दें।
2. समय पर निराई-गुड़ाई करें
यदि खरपतवार कम हैं, तो हाथ से निराई या डोरा/कुलपा जैसे कृषि उपकरणों की सहायता से नियंत्रण किया जा सकता है।
पहली निराई – बुवाई के लगभग 20 दिन बाद
दूसरी निराई – आवश्यकता अनुसार 35–40 दिन बाद
यह तरीका छोटे और मध्यम किसानों के लिए काफी प्रभावी माना जाता है।
3. खरपतवारनाशी (Herbicide) का सही उपयोग
जब खेत में खरपतवार अधिक हों या श्रमिकों की कमी हो, तब खरपतवारनाशी का उपयोग किया जा सकता है। आम तौर पर सोयाबीन में दो प्रकार के खरपतवारनाशी उपयोग किए जाते हैं।
प्री-इमर्जेंस (Pre-Emergence)
बुवाई के तुरंत बाद या खरपतवार निकलने से पहले उपयोग किए जाते हैं।
पोस्ट-इमर्जेंस (Post-Emergence)
जब खरपतवार निकल आए हों और उनकी प्रारंभिक अवस्था हो, तब उपयोग किए जाते हैं।
कौन-सी दवा चुननी है, यह खेत में मौजूद खरपतवार की प्रजाति, फसल की अवस्था और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर निर्भर करता है। ICAR भी एकीकृत खरपतवार प्रबंधन (Integrated Weed Management) अपनाने की सलाह देता है।
महत्वपूर्ण: किसी भी खरपतवारनाशी का उपयोग करने से पहले उसके लेबल पर दिए गए निर्देश पढ़ें और अपने क्षेत्र के कृषि वैज्ञानिक या कृषि विभाग की सलाह अवश्य लें।
खरपतवार बड़े होने से पहले उनका नियंत्रण करें।
बारिश की संभावना होने पर स्प्रे करने से बचें।
अनुशंसित मात्रा और समय का ही पालन करें।
अलग-अलग खरपतवार के लिए अलग नियंत्रण रणनीति अपनानी पड़ सकती है।
लगातार एक ही खरपतवारनाशी का उपयोग करने से प्रतिरोध (Resistance) विकसित हो सकता है।
क्या केवल दवा से ही खरपतवार नियंत्रित हो जाते हैं?
नहीं।
बेहतर परिणाम के लिए एकीकृत खरपतवार प्रबंधन (Integrated Weed Management) अपनाना चाहिए। इसमें शामिल हैं—
खेत की उचित तैयारी
समय पर बुवाई
निराई-गुड़ाई
आवश्यक होने पर खरपतवारनाशी का सही उपयोग
फसल चक्र (Crop Rotation)
शोध के अनुसार, विभिन्न तरीकों को मिलाकर अपनाने से खरपतवार नियंत्रण अधिक प्रभावी होता है और पैदावार भी बेहतर मिलती है।
खरपतवार नियंत्रण से क्या फायदे होते हैं?
फसल की बेहतर बढ़वार
पोषक तत्वों का सही उपयोग
कीट और रोग का जोखिम कम
अधिक शाखाएँ और फलियाँ
बेहतर गुणवत्ता के दाने
अधिक पैदावार और बेहतर लाभ
सोयाबीन की अच्छी पैदावार के लिए खरपतवार नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण कृषि कार्यों में से एक है। यदि किसान बुवाई के बाद शुरुआती 15–45 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखते हैं, समय पर निराई-गुड़ाई करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह अनुसार उचित खरपतवारनाशी का उपयोग करते हैं, तो फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
लेखक: किसान हेल्पलाइन एग्री रिसर्च टीम
स्रोत: इस लेख की जानकारी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा जारी तकनीकी अनुशंसाओं के आधार पर तैयार की गई है।
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