रिजका की खेती से पशुओं के लिए पौष्टिक चारा, साथ में कमाई का भी मौका, जानें बुवाई का सही समय

रिजका की खेती से पशुओं के लिए पौष्टिक चारा, साथ में कमाई का भी मौका, जानें बुवाई का सही समय
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Kisaan Helpline

Agriculture
Sep 16, 2026

पशुपालन करने वाले किसानों के लिए रिजका की खेती काफी काम की हो सकती है। इसे लूसर्न के नाम से भी जाना जाता है। यह पौष्टिक दलहनी चारा फसल है, जिसे सिंचाई की सुविधा वाले खेतों में उगाकर लंबे समय तक हरा चारा लिया जा सकता है। अच्छी देखभाल के साथ इसकी कई बार कटाई होती है, इसलिए किसान अपने पशुओं के चारे का खर्च घटाने के साथ अतिरिक्त चारा बेचकर आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।

 

खेती के साथ अगर घर में गाय-भैंस भी हैं, तो किसान की एक बड़ी चिंता रहती हैपशुओं के लिए रोज हरा चारा कहां से आए? बाजार से चारा खरीदने पर हर महीने खर्च बढ़ता है। ऐसे में खेत के एक हिस्से में ही अच्छा हरा चारा उगा लिया जाए तो पशुपालन की लागत को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

 

इसी वजह से रिजका की खेती पशुपालक किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है। इसे चारा फसलों की रानी भी कहा जाता है। ICAR के अनुसार लूसर्न अत्यधिक पौष्टिक दलहनी चारा फसल है और इसकी बहुवर्षीय किस्में सिंचित परिस्थितियों में चारे के साथ बीज उत्पादन के लिए भी उगाई जा सकती हैं।

 

रिजका की खेती कब करें?

 

रिजका की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर से नवंबर के आसपास की जाती है। आपके दिए गए विवरण के अनुसार इसकी बुवाई दिसंबर के पहले सप्ताह तक भी की जा सकती है, लेकिन सही समय आपके क्षेत्र के मौसम, मिट्टी और सिंचाई की सुविधा पर निर्भर करेगा।

 

किसान भाई बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार कर लें। मिट्टी भुरभुरी हो और खेत में पानी रुकने की समस्या हो।

 

बीज की मात्रा कितनी रखें?

 

दी गई जानकारी के अनुसार

 

·        कतार में बुवाई: करीब 12–15 किलो बीज प्रति हेक्टेयर

·        छिड़काव विधि: करीब 20–25 किलो बीज प्रति हेक्टेयर

 

हालांकि बीज की सही मात्रा किस्म और बुवाई की विधि के अनुसार बदल सकती है। इसलिए अपने क्षेत्र के लिए कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की अनुशंसा को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।

 

कैसी जमीन में अच्छी होती है रिजका?

 

रिजका ऐसी जमीन में अच्छी बढ़ती है जहां पानी की निकासी अच्छी हो। खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को नुकसान हो सकता है। मिट्टी की जांच कराकर उसकी स्थिति जान लेना बेहतर रहेगा। अगर जमीन ज्यादा अम्लीय है, तो मिट्टी जांच के आधार पर चूने का इस्तेमाल किया जा सकता है। बिना मिट्टी की जांच के ज्यादा मात्रा में चूना या खाद डालने से बचें।

 

ठंड के मौसम में भी देती है हरा चारा

 

रिजका की खेती की एक खासियत यह है कि यह ठंडे मौसम में भी अच्छी तरह बढ़ सकती है। यही कारण है कि सर्दियों में हरे चारे की जरूरत पूरी करने के लिए इसे उपयोगी फसल माना जाता है।

 

ICAR की लूसर्न किस्म IGFRI-DL-2 को सिंचित परिस्थितियों के लिए विकसित किया गया है। इसके बारे में ICAR ने करीब 85–90 टन हरा चारा प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष उत्पादन और 16–18 प्रतिशत कच्चे प्रोटीन की जानकारी दी है।

 

इससे किसान समझ सकते हैं कि रिजका केवल सामान्य हरा चारा नहीं है, बल्कि अच्छी पोषण गुणवत्ता वाली चारा फसल भी है।

 

एक बार बोने के बाद कई बार कटाई का फायदा

 

रिजका की खेती का सबसे बड़ा फायदा इसकी बार-बार कटाई है। अच्छी तरह स्थापित फसल से मौसम और प्रबंधन के अनुसार कई कटिंग ली जा सकती हैं।

 

आपके दिए गए विवरण में साल में 8–10 बार तक कटाई और बहुवर्षीय फसल में करीब तीन साल तक चारा मिलने की बात कही गई है। लेकिन यह हर खेत में एक जैसा नहीं होगा। किस्म, तापमान, सिंचाई, मिट्टी और कटाई के तरीके के अनुसार कटिंग की संख्या और फसल की अवधि बदल सकती है।

 

ICAR की IGFRI-DL-2 जैसी लूसर्न किस्म को बहुवर्षीय बताया गया है और इसे चारे तथा बीज दोनों के लिए उपयोगी माना गया है।

 

यानी किसान को हर साल दोबारा खेत तैयार करके बुवाई करने की जरूरत कुछ बहुवर्षीय किस्मों में नहीं पड़ती, जिससे मेहनत और शुरुआती खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।

रिजका से कितना हरा चारा मिल सकता है?

 

रिजका की पैदावार खेत और प्रबंधन के अनुसार काफी बदल सकती है। आपके दिए गए विवरण में 80–120 टन हरा चारा प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन का उल्लेख है। वहीं ICAR की IGFRI-DL-2 किस्म में करीब 85–90 टन हरा चारा प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष दर्ज किया गया है।

 

इसलिए किसान भाई किसी एक उत्पादन आंकड़े को अपनी जमीन पर पक्का मानें। असली उत्पादन जानने के लिए स्थानीय मिट्टी, पानी, किस्म और मौसम को ध्यान में रखना जरूरी है।

 

पशुओं के लिए क्यों फायदेमंद है रिजका?

 

रिजका यानी लूसर्न एक पौष्टिक दलहनी चारा फसल है। इसमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम और दूसरे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। ICAR की IGFRI-DL-2 किस्म में 16–18 प्रतिशत कच्चे प्रोटीन की मात्रा दर्ज की गई है। इस वजह से इसे पशुओं के संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है।

 

लेकिन किसान भाई एक बात जरूर ध्यान रखेंसिर्फ रिजका खिलाने से पशु का पूरा पोषण पूरा नहीं होता। पशु की उम्र, दूध देने की क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार हरे चारे के साथ सूखा चारा, दाना और खनिज मिश्रण भी जरूरी हो सकता है।

 

अगर किसान के पास गाय-भैंस या दूसरे पशु हैं, तो रिजका का सबसे सीधा फायदा यह है कि खेत में पैदा हुआ चारा अपने ही पशुओं को दिया जा सकता है। इससे बाहर से हरा चारा खरीदने की जरूरत कम हो सकती है। अगर खेत में जरूरत से ज्यादा चारा पैदा हो जाए, तो स्थानीय पशुपालकों को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी की जा सकती है।

 

यानी एक ही फसल से दो फायदे मिल सकते हैं

 

पशुओं के लिए चारा + अतिरिक्त चारे की बिक्री से आमदनी।

 

एक बीघा से ₹60 हजार से ₹75 हजार कमाई का दावा कितना सही?

 

आपके दिए गए लेख में एक बीघा से 20–25 टन चारा और ₹300 प्रति क्विंटल भाव पर ₹60,000 से ₹75,000 की कमाई का अनुमान दिया गया है।

 

लेकिन किसान भाइयों को यहां सावधानी रखनी चाहिए। बीघा का आकार हर राज्य और जिले में एक जैसा नहीं होता। इसके अलावा चारे की पैदावार और बाजार भाव भी जगह-जगह बदलते हैं। इसलिए ₹60–75 हजार को हर किसान की निश्चित कमाई नहीं माना जा सकता।

 

कमाई निकालने के लिए अपने खेत का वास्तविक क्षेत्रफल, उत्पादन, स्थानीय चारे का भाव, कटाई-मजदूरी, सिंचाई और दूसरे खर्चों को जोड़कर हिसाब करें।

 

रिजका से दूध भी बढ़ सकता है, लेकिन इसे गारंटी समझें

 

रिजका पौष्टिक चारा है और संतुलित पशु आहार में इसका इस्तेमाल पशुओं के पोषण के लिए उपयोगी हो सकता है। ICAR ने लूसर्न की उच्च पोषण गुणवत्ता और पशु स्वास्थ्य तथा दूध उत्पादन से जुड़े लाभों का उल्लेख किया है।

 

लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि हर गाय या भैंस को रिजका खिलाने से दूध निश्चित रूप से एक तय मात्रा में बढ़ जाएगा। दूध उत्पादन पर नस्ल, पशु की उम्र, स्वास्थ्य, कुल आहार, पानी, दाना और देखभाल जैसे कई factors असर डालते हैं।

 

इसलिए रिजका को संतुलित आहार का हिस्सा मानें, दूध बढ़ने की पक्की गारंटी नहीं।

 

किसान भाई रिजका लगाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

 

अगर आप रिजका की खेती शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इन बातों को जरूर ध्यान में रखें:

 

·        खेत की मिट्टी की जांच करा लें।

·        अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त किस्म चुनें।

·        अच्छी गुणवत्ता का बीज इस्तेमाल करें।

·        खेत में पानी निकासी की व्यवस्था रखें।

·        बुवाई का समय स्थानीय मौसम के अनुसार तय करें।

·        सिंचाई की पर्याप्त सुविधा हो तो ही बड़े क्षेत्र में खेती करें।

·        कटाई का समय सही रखें ताकि चारे की गुणवत्ता अच्छी रहे।

·        जरूरत से ज्यादा चारा हो तो स्थानीय बाजार में बिक्री की योजना बनाएं।

·        पशुओं को रिजका के साथ संतुलित आहार दें।

·        स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या पशुपालन विभाग की सलाह को प्राथमिकता दें।

 

पशुपालन करने वाले किसानों के लिए क्यों बन सकती है काम की फसल?

 

रिजका की खेती का फायदा केवल बाजार में चारा बेचने तक सीमित नहीं है। अगर किसान के पास अपने पशु हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा चारे की नियमित उपलब्धता हो सकता है।

 

मान लीजिए किसान हर महीने बाजार से हरा चारा खरीदता है। अगर उसका कुछ हिस्सा खेत से ही मिलने लगे तो पशुपालन का खर्च कम किया जा सकता है। वहीं अतिरिक्त उत्पादन बेचने का मौका अलग है।

 

इसी वजह से रिजका की खेती, हरे चारे की खेती और पशुपालन को एक साथ जोड़कर किसान अपनी खेती की आमदनी के कई रास्ते बना सकता है।

 

ICAR के विभिन्न चारा उत्पादन कार्यक्रमों में भी सालभर हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने और पशुपालन को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

 

किसान के लिए सीधी बात

 

अगर आपके पास सिंचाई की सुविधा है, पशु हैं और हरे चारे की लगातार जरूरत रहती है, तो रिजका की खेती आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती है।

 

इससे खेत में पौष्टिक हरा चारा तैयार होगा, बाजार से चारा खरीदने का खर्च घट सकता है और अतिरिक्त उत्पादन को बेचकर कमाई का रास्ता भी बनाया जा सकता है।

 

बस ध्यान रखें कि पैदावार और कमाई का कोई एक आंकड़ा हर किसान पर लागू नहीं होता। सही किस्म, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, कटाई और स्थानीय बाजारइन सभी का असर अंतिम परिणाम पर पड़ता है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

 

रिजका की खेती कब करें?

 

रिजका की बुवाई सामान्य तौर पर अक्टूबर-नवंबर के आसपास की जाती है। स्थानीय मौसम और कृषि सलाह के अनुसार सही समय तय करना बेहतर है।

 

रिजका को और किस नाम से जानते हैं?

 

रिजका को लूसर्न भी कहा जाता है। यह पौष्टिक दलहनी चारा फसल है।

 

क्या रिजका बार-बार काटी जा सकती है?

 

हां, रिजका से एक से अधिक कटिंग ली जा सकती हैं। कितनी कटिंग मिलेंगी, यह किस्म, मौसम, सिंचाई और फसल प्रबंधन पर निर्भर करता है।

 

क्या रिजका पशुओं के लिए अच्छा चारा है?

 

हां। लूसर्न में अच्छी मात्रा में प्रोटीन और कई खनिज पाए जाते हैं। ICAR की IGFRI-DL-2 किस्म में 16–18 प्रतिशत कच्चा प्रोटीन दर्ज किया गया है।


क्या रिजका बेचकर कमाई की जा सकती है?

 

हां, अगर आपके इलाके में हरे चारे की मांग है तो अतिरिक्त चारा बेचा जा सकता है। कमाई स्थानीय उत्पादन और बाजार भाव पर निर्भर करेगी।

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