खरीफ फसल की कटाई से पहले किसान जरूर कर लें ये 5 काम, वरना दाने खेत में ही हो सकते हैं खराब

खरीफ फसल की कटाई से पहले किसान जरूर कर लें ये 5 काम, वरना दाने खेत में ही हो सकते हैं खराब
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Kisaan Helpline

Agriculture
Sep 04, 2026

मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द और बाजरा पकने के बाद जल्दबाजी में कटाई करें। सही समय पर कटाई, मौसम की जानकारी और फसल को ठीक से सुखाना जरूरी है। छोटी-सी सावधानी से दाना झड़ने, नमी और भंडारण में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

 

महीनों की मेहनत के बाद जब खरीफ की फसल खेत में पककर तैयार होती है, तो किसान को सबसे ज्यादा चिंता यही रहती है कि उपज सुरक्षित घर तक पहुंचे और मंडी में अच्छा भाव मिले। लेकिन कई बार नुकसान फसल उगाते समय नहीं, बल्कि कटाई के समय हो जाता है।

 

फसल बहुत जल्दी काट दी तो दानों में नमी ज्यादा रह सकती है। वहीं ज्यादा देर खेत में छोड़ने पर दाने झड़ने, फलियां खुलने या बारिश से फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए खरीफ फसल की कटाई का सही समय पहचानना बेहद जरूरी है।

 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी अलग-अलग फसलों में पकने की स्थिति देखकर सही समय पर कटाई करने की सलाह देता है। उदाहरण के लिए, सोयाबीन में सही समय पर कटाई करने से दाना झड़ने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।



फसल पक गई है या नहीं, ऐसे पहचानें

 

हर फसल के पकने के संकेत अलग होते हैं। इसलिए केवल कैलेंडर देखकर कटाई करने के बजाय खेत में फसल की स्थिति जरूर देखें।

 

मूंग और उड़द

 

जब ज्यादातर फलियां पककर सूखने लगें और उनका रंग गहरा हो जाए, तब कटाई की तैयारी करें। बहुत देर करने पर सूखी फलियां खुल सकती हैं और दाने खेत में गिरने लगते हैं।

 

सोयाबीन

 

जब पौधे की पत्तियां पीली पड़कर गिरने लगें और फलियां पककर सूखने लगें, तब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है। कटाई में ज्यादा देरी करने पर फलियों से दाने झड़ने का नुकसान बढ़ सकता है।

 

मक्का

 

मक्का में भुट्टे के दाने अच्छी तरह विकसित और कड़े होने लगें तथा भुट्टे को ढकने वाली पत्तियां सूखकर पीली पड़ने लगें, तो कटाई की तैयारी की जा सकती है। ICAR के अनुसार मक्का की कटाई के बाद दानों को अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है। सुरक्षित भंडारण के लिए दानों की नमी उचित स्तर तक लाना चाहिए।

 

बाजरा

 

जब बालियां अच्छी तरह पक जाएं और दाने तैयार हो जाएं, तब कटाई करें। कटाई के बाद बालियों को अच्छी तरह सुखाकर ही दाने अलग करें।

 

कटाई से पहले मौसम जरूर देख लें

 

खरीफ फसल की कटाई के समय मौसम का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। बारिश के मौसम में अचानक होने वाली बारिश पकी हुई फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।

 

कटाई शुरू करने से पहले अपने जिले का मौसम पूर्वानुमान जरूर देख लें। अगर बारिश की संभावना हो तो पहले से यह तय कर लें कि कटाई के बाद फसल को कहां सुरक्षित रखा जाएगा।

 

खासकर सोयाबीन जैसी फसल में पकने के समय लगातार बारिश होने से गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और दाना झड़ने या अंकुरित होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे समय पर सही अवस्था में कटाई करना नुकसान कम करने में मदद करता है।

 

एक बात याद रखें: केवल बारिश देखकर फसल को जरूरत से ज्यादा समय तक खेत में खड़ा रखना भी ठीक नहीं है। फसल की पकने की अवस्था और मौसमदोनों को देखकर फैसला करें।

 

कटाई से पहले मशीन और औजार जांच लें

 

अगर कंबाइन हार्वेस्टर, रीपर या थ्रेशर से कटाई करनी है, तो मशीन को खेत में ले जाने से पहले उसकी जांच कर लें।

 

·        मशीन की सफाई और जरूरी मरम्मत कर लें।

·        बेल्ट, जाली और दूसरे हिस्सों को जांच लें।

·        थ्रेशर की सेटिंग फसल के हिसाब से रखें।

·        मशीन से टूटे या खराब दाने ज्यादा तो नहीं निकल रहे, इस पर नजर रखें।

·        हाथ से कटाई करने पर दरांती और दूसरे औजार पहले से तैयार रखें।

 

कटाई के समय मशीन खराब होने से पकी फसल खेत में खड़ी रह सकती है। इसलिए फसल कटाई की तैयारी पहले से पूरी कर लेना बेहतर है।

 

कटाई के बाद फसल को ऐसे सुखाएं

 

फसल घर या खलिहान तक पहुंच गई तो काम खत्म नहीं हुआ। अनाज को सुखाना और सही तरीके से भंडारण करना भी उतना ही जरूरी है।

 

अगर नमी वाली फसल को सीधे बड़े ढेर या बोरी में भर दिया जाए, तो अंदर गर्मी और नमी बढ़ सकती है। इससे फफूंद लगने और अनाज की गुणवत्ता खराब होने का खतरा रहता है।

 

इसलिए:

 

·        फसल को साफ और सूखी जगह पर फैलाएं।

·        मोटा ढेर बनाने के बजाय पतली परत में सुखाएं।

·        समय-समय पर अनाज को पलटते रहें।

·        बारिश और रात की ओस से फसल को बचाएं।

·        भंडारण से पहले अनाज की नमी जरूर जांचें।

 

नमी की सुरक्षित सीमा फसल के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए किसी एक संख्या को हर फसल पर लागू करें। उदाहरण के तौर पर ICAR की मक्का संबंधी सलाह में दानों को करीब 12–14 प्रतिशत नमी तक सुखाने की बात कही गई है।

 

भंडारण से पहले बोरी और जगह भी जांचें

 

अच्छी तरह सूखे अनाज को भी अगर नम कमरे या गीली बोरी में भर दिया जाए तो नुकसान हो सकता है।

 

भंडारण से पहले कमरे, फर्श और बोरियों को अच्छी तरह साफ और सूखा लें। अनाज की बोरियों को सीधे जमीन पर रखने के बजाय लकड़ी के पटरे या ऊंचे स्थान पर रखना बेहतर है। साथ ही समय-समय पर बोरियों को खोलकर अनाज में नमी, कीड़े या फफूंद की जांच करते रहें।

 

कीट नियंत्रण के लिए किसी भी दवा का इस्तेमाल उसकी स्वीकृत मात्रा और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें।

 

किसान के लिए जरूरी बात

 

खरीफ फसल में अच्छी पैदावार लेना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उस उपज को सुरक्षित रखना।

 

कटाई से पहले सिर्फ दरांती या मशीन तैयार करें। एक बार खेत में जाकर फसल की पकने की अवस्था देखें, मौसम का पूर्वानुमान जांचें और मशीनरी तैयार रखें। कटाई के बाद अनाज को अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारण करें।

 

यही छोटी-छोटी सावधानियां फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और अनाज की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

 

खरीफ फसल की कटाई कब करनी चाहिए?

जब फसल अपनी पूरी पकने की अवस्था में पहुंच जाए। बहुत जल्दी या बहुत देर से कटाई करने पर नुकसान बढ़ सकता है।

 

सोयाबीन की कटाई कब करें?

जब पत्तियां पीली होकर गिरने लगें और फलियां पककर सूखने लगें। ज्यादा देरी से दाना झड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

 

मक्का की कटाई के बाद क्या करें?

भुट्टों से दाने अलग करने के बाद उन्हें अच्छी तरह सुखाएं और भंडारण से पहले नमी की जांच करें।

 

क्या गीले अनाज को सीधे बोरी में भर सकते हैं?

नहीं। ज्यादा नमी वाले अनाज को पर्याप्त सुखाए बिना रखने पर फफूंद और खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।

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