Kisaan Helpline
किसान भाइयों, अगर इस बार कुछ ऐसी फसल लगाना चाहते हैं जिसकी मांग त्योहारों के समय बढ़ जाती है, तो गेंदा आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। सितंबर-अक्टूबर में इसकी सर्दियों वाली फसल की तैयारी शुरू की जाती है। पूजा, माला और सजावट में इस्तेमाल होने के कारण दिवाली, दशहरा और दूसरे त्योहारों के आसपास गेंदे के फूलों की मांग बढ़ सकती है। लेकिन बेहतर कमाई के लिए सही किस्म, पौध तैयार करने का समय, खाद-पानी और बाजार, इन सभी का हिसाब पहले से रखना जरूरी है।
अभी सितंबर का समय चल रहा है और इस साल दिवाली 8 नवंबर 2026 को
है। ऐसे में किसान अगर दिवाली के बाजार को ध्यान में रखकर गेंदे की खेती करना चाहते हैं, तो जल्दबाजी में बीज डालने के बजाय पहले यह देखें कि चुनी गई किस्म कितने दिन में फूल देती है और आपके पास तैयार पौध कितने दिन की है।
गेंदे की खेती कब करनी चाहिए?
सर्दी वाली फसल के लिए मैदानी क्षेत्रों में सामान्य तौर पर सितंबर-अक्टूबर में नर्सरी तैयार की जाती है और अक्टूबर-नवंबर में पौध की रोपाई की जाती है। स्थानीय मौसम के अनुसार समय में बदलाव हो सकता है।
गेंदा क्यों बन सकता है कमाई का अच्छा जरिया?
गेंदा सिर्फ खेत की शोभा बढ़ाने वाला फूल नहीं है। इसका इस्तेमाल माला बनाने, पूजा-पाठ, मंदिरों, घरों की सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर होता है। त्योहार आते ही इसकी मांग बढ़ने की संभावना रहती है।
आईसीएआर ने भी गेंदा को कम अवधि की नकदी फूल फसल के रूप में बढ़ावा दिया है। हाल की एक पहल में बेहतर किस्मों के जरिए फसल विविधीकरण और किसानों की अतिरिक्त आमदनी पर जोर दिया गया।
यही वजह है कि फूलों की खेती में रुचि रखने वाले किसान अपने खेत के एक हिस्से में गेंदा लगाकर अतिरिक्त आमदनी का रास्ता बना सकते हैं।
गेंदा की कौन-कौन सी उन्नत किस्में लगाएं?
गेंदे में मुख्य रूप से अफ्रीकन गेंदा और फ्रेंच गेंदा की खेती की जाती है। किसान अपने क्षेत्र के मौसम और बाजार की मांग के अनुसार किस्म चुन सकते हैं।
पूसा नारंगी गेंदा
यह अफ्रीकन गेंदे की प्रमुख किस्म है। इसके फूल गहरे नारंगी रंग के होते हैं। आईएआरआई के अनुसार यह करीब 125 से
135 दिन में फूल देने की स्थिति में पहुंचती है और इसकी औसत ताजा फूल उपज करीब 25–30 टन
प्रति हेक्टेयर बताई गई है।
पूसा बसंती गेंदा
इस किस्म के फूल नींबू जैसे पीले रंग के होते हैं। आईएआरआई के अनुसार इसे फूल आने में लगभग 135 से
145 दिन लग सकते हैं और इसकी औसत ताजा फूल उपज करीब 20–25 टन
प्रति हेक्टेयर बताई गई है।
फ्रेंच गेंदा
फ्रेंच गेंदे के पौधे आमतौर पर अफ्रीकन गेंदे की तुलना में छोटे होते हैं। पूसा अर्पिता, पूसा पर्व, पूसा दीप और पूसा उत्सव जैसी किस्मों को भी संस्थानों की ओर से बढ़ावा दिया गया है।
ध्यान रखें: केवल नाम देखकर बीज न खरीदें। आपके जिले का मौसम, जमीन और स्थानीय बाजार किस्म के चुनाव में ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
गेंदा की खेती कब करें?
अब सवाल आता है कि गेंदे की खेती कब करें?
मौसम के हिसाब से इसकी फसल अलग-अलग समय पर ली जा सकती है। मैदानी और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए आईसीएआर की सलाह के अनुसार सर्दियों वाली फसल के लिए सितंबर-अक्टूबर में नर्सरी की बुवाई और अक्टूबर-नवंबर में रोपाई की जाती है। गर्मी वाली फसल के लिए जनवरी में नर्सरी और फरवरी में रोपाई की व्यवस्था बताई गई है।
आसान भाषा में किसान इसे इस तरह समझ सकते हैं:
·
गर्मी की फसल: जनवरी-फरवरी के आसपास
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बरसात/बसंत वाली फसल: क्षेत्र के अनुसार मई-जून में तैयारी
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सर्दी और त्योहार वाली फसल: सितंबर-अक्टूबर में नर्सरी की तैयारी
दिवाली के लिए गेंदा लगाना है तो एक बात जरूर समझें
किसान भाई, यहां सबसे जरूरी बात है—सिर्फ सितंबर में गेंदा लगाने से यह तय नहीं हो जाता कि फूल दिवाली पर ही मिलेंगे।
इस साल दिवाली 8 नवंबर को है, जबकि गेंदे की कुछ प्रमुख किस्मों को बीज से फूल आने में 125–145 दिन
तक लग सकते हैं। इसलिए अगर लक्ष्य दिवाली का बाजार है, तो किस्म की अवधि और पौध की उम्र देखकर खेती की तारीख तय करें।
यानी तैयार और स्वस्थ पौध उपलब्ध है तो हिसाब अलग होगा और अभी बीज से नर्सरी शुरू करने पर समय अलग लगेगा।
त्योहार के भाव का फायदा लेने के लिए तारीख नहीं, फूल आने की अवधि का हिसाब लगाना ज्यादा जरूरी है।
बीज से कैसे तैयार करें गेंदे की पौध?
गेंदे की व्यावसायिक खेती में आमतौर पर पहले नर्सरी में बीज बोकर पौध तैयार की जाती है और बाद में खेत में रोपाई की जाती है। नर्सरी के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज लें। मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए। पौध बहुत ज्यादा घनी होने पर हवा और रोशनी कम मिलती है, इसलिए उचित दूरी बनाए रखें।
जब पौध खेत में लगाने लायक मजबूत हो जाए, तब उसकी रोपाई करें। आईसीएआर की सर्दी वाली फसल की सलाह में सितंबर-अक्टूबर में नर्सरी और अक्टूबर-नवंबर में रोपाई का उल्लेख है।
क्या कलम से भी गेंदा लगाया जा सकता है?
कुछ परिस्थितियों में गेंदे को कलम से भी तैयार किया जा सकता है, लेकिन बड़े क्षेत्र में व्यावसायिक खेती के लिए बीज से तैयार स्वस्थ और भरोसेमंद पौध सामग्री ज्यादा सामान्य तरीका है।
अगर किसान कलम से पौध तैयार कर रहे हैं तो स्वस्थ, रोगमुक्त पौधे से कलम लें और स्थानीय बागवानी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार जड़ विकसित करने की प्रक्रिया अपनाएं।
गेंदा लगाने से पहले खेत की तैयारी कैसे करें?
गेंदे के लिए भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी बेहतर रहती है। खेत में पानी रुकने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
पहले खेत की अच्छी जुताई करके मिट्टी को तैयार करें। इसके बाद अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। कच्ची या अधपकी खाद सीधे इस्तेमाल करने से बचें। खेत तैयार करते समय एक बात जरूर देखें, सिंचाई का पानी खेत में खड़ा न रहे।
गेंदा में कौन सी खाद डालें?
गेंदा की अच्छी बढ़वार और फूलों के लिए खाद का संतुलित इस्तेमाल जरूरी है। आईसीएआर की एक कृषि सलाह में खुले परागित गेंदे के लिए प्रति हेक्टेयर करीब 20 टन
अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद, साथ में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देने की सिफारिश दी गई है। इसमें आधी नाइट्रोजन के साथ पूरी फास्फोरस और पोटाश की मात्रा शुरुआत में देने और बाकी नाइट्रोजन को बाद में दो बार देने की सलाह दी गई है।
लेकिन किसान भाई इस मात्रा को हर खेत के लिए एक जैसा न मानें।
मिट्टी की जांच के आधार पर खाद की मात्रा तय करना सबसे अच्छा तरीका है। जरूरत से ज्यादा खाद डालने से लागत बढ़ सकती है और पौधे की संतुलित बढ़वार भी प्रभावित हो सकती है।
सिंचाई में रखें खास सावधानी
गेंदा न तो बहुत ज्यादा पानी पसंद करता है और न ही लंबे समय तक सूखी मिट्टी। पौध लगाने के बाद जरूरत के अनुसार सिंचाई करें। मौसम ठंडा होने पर पानी की जरूरत कम हो सकती है, जबकि गर्म मौसम में जरूरत बढ़ सकती है।
सबसे जरूरी बात- खेत में पानी जमा न होने दें। खासकर बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था पहले से रखें। आईसीएआर की गेंदे की खेती संबंधी सलाह में भी जरूरत के अनुसार सिंचाई और उचित प्रबंधन पर जोर दिया गया है।
खरपतवार को समय रहते निकालें
गेंदे की शुरुआती अवस्था में खरपतवार फसल के लिए परेशानी बन सकते हैं। ये मिट्टी से पानी और पोषक तत्व लेते हैं, जिससे गेंदे के पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
इसलिए खेत में समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें। आईसीएआर की सलाह में हाथ से निराई के साथ जरूरत के अनुसार खरपतवार नियंत्रण की व्यवस्था का उल्लेख है। किसान किसी खरपतवारनाशी का इस्तेमाल करने से पहले अपने क्षेत्र और फसल के लिए स्वीकृत अनुशंसा जरूर देखें।
ज्यादा शाखाएं चाहिए तो पिंचिंग पर दें ध्यान
गेंदे में पौधे की शुरुआती बढ़वार के दौरान ऊपर की कोमल बढ़वार को उचित समय पर हटाने से शाखाओं की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है। ज्यादा शाखाएं बनने से फूलों की संख्या भी बेहतर हो सकती है।
लेकिन पिंचिंग का समय किस्म और पौधे की बढ़वार देखकर तय करें। कमजोर या रोगग्रस्त पौधों में बिना सलाह के यह काम न करें।
फूल तोड़ते समय भी रखें बाजार का ध्यान
फूलों की तुड़ाई किस्म, मौसम और पौधे की स्थिति पर निर्भर करती है। जब फूल बाजार के लिए सही अवस्था में हों, तब सुबह या शाम के समय तुड़ाई करना बेहतर रहता है।
अगर त्योहार के बाजार को लक्ष्य बना रहे हैं तो फूल तैयार होने से पहले ही स्थानीय फूल मंडी, माला बनाने वालों, मंदिरों और थोक खरीदारों से संपर्क करना फायदेमंद हो सकता है।
क्योंकि फूलों में अच्छी कमाई सिर्फ पैदावार से नहीं होती—समय पर बिक्री और सही बाजार भी उतना ही जरूरी है।
किसान भाई गेंदा लगाने से पहले ये 6 बातें याद रखें
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अपने क्षेत्र के हिसाब से सही किस्म चुनें।
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फूल आने में लगने वाले दिनों का हिसाब लगाकर बुवाई करें।
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अच्छी गुणवत्ता वाले बीज या स्वस्थ पौध का इस्तेमाल करें।
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खेत में पानी जमा न होने दें।
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समय पर निराई-गुड़ाई और पौध की देखभाल करें।
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फूल आने से पहले ही बाजार और खरीदारों की जानकारी जुटा लें।
किसान के लिए सीधी बात
गेंदे की खेती कमाई का अच्छा विकल्प बन सकती है, लेकिन त्योहार देखकर आंख बंद करके फसल लगाना सही रणनीति नहीं है। सितंबर-अक्टूबर में सर्दी वाली फसल की तैयारी करते समय किसान को सबसे पहले किस्म, पौध की उम्र और फूल आने का समय देखना चाहिए।
अगर लक्ष्य दिवाली का बाजार है तो 8 नवंबर 2026 की
तारीख को सामने रखकर उलटी गणना करें, स्थानीय बाजार की मांग देखें और उसी हिसाब से पौध तैयार करें। यही तरीका खेती को अनुमान से निकालकर सही योजना की तरफ ले जाता है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों के किसान अपने जिले के मौसम, मिट्टी और स्थानीय फूल बाजार के हिसाब से गेंदे की किस्म और रोपाई का समय तय करें। अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या उद्यान विभाग से स्थानीय सलाह लेना बेहतर रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गेंदा की खेती कब करनी चाहिए?
गेंदा अलग-अलग मौसम में उगाया जा सकता है। मैदानी क्षेत्रों में सर्दी वाली फसल के लिए सामान्य तौर पर सितंबर-अक्टूबर में नर्सरी तैयार की जाती है और अक्टूबर-नवंबर में रोपाई की जाती है।
गेंदा की खेती के लिए कौन सी किस्म अच्छी है?
अफ्रीकन गेंदे में पूसा नारंगी गेंदा और पूसा बसंती गेंदा प्रमुख किस्में हैं। फ्रेंच गेंदे में पूसा अर्पिता, पूसा पर्व, पूसा दीप और पूसा उत्सव जैसी किस्में उपलब्ध हैं। चुनाव स्थानीय मौसम और बाजार के अनुसार करें।
क्या सितंबर में गेंदा लगाकर दिवाली पर फूल मिल जाएंगे?
यह निश्चित नहीं कहा जा सकता। फूल आने का समय किस्म, पौध की उम्र और मौसम पर निर्भर करता है। कुछ प्रमुख किस्मों को बीज से फूल आने में 125–145 दिन
तक लग सकते हैं। इसलिए दिवाली के लिए तैयार पौध और किस्म की अवधि को ध्यान में रखकर योजना बनाएं।
गेंदा में कौन सी खाद डालनी चाहिए?
अच्छी सड़ी गोबर की खाद के साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा दी जाती है। सही मात्रा मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि सलाह के आधार पर तय करना बेहतर है।
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