रबी फसल की तैयारी कब शुरू करें? बुवाई से पहले खेत, बीज और खाद ऐसे रखें तैयार

रबी फसल की तैयारी कब शुरू करें? बुवाई से पहले खेत, बीज और खाद ऐसे रखें तैयार
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Kisaan Helpline

Agriculture
Sep 09, 2026

रबी की बुवाई से पहले ही खेत, बीज, मिट्टी, खाद और सिंचाई की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। सही समय पर तैयारी पूरी होने से फसल की बुवाई में देरी और अनावश्यक जल्दबाजी से बचा जा सकता है।

खरीफ की फसल खेत में है तो अब रबी की तैयारी को टालें नहीं। गेहूं, सरसों, चना, मटर और जौ जैसी फसलों में समय पर बुवाई के लिए खेत, बीज, खाद और सिंचाई की व्यवस्था पहले से कर लेना बेहतर रहता है।

 

खरीफ की फसल की कटाई का समय जैसे-जैसे नजदीक आता है, किसान भाइयों को अगली फसल की चिंता भी शुरू हो जाती है। खासकर रबी फसल की बुवाई में अगर आखिरी समय तक तैयारी नहीं की जाए तो खेत तैयार करने, बीज जुटाने और खाद की व्यवस्था में जल्दबाजी हो सकती है। इसलिए सवाल यह नहीं है कि रबी की तैयारी कब शुरू करें, बल्कि यह है कि बुवाई से कितने दिन पहले खेत और बाकी जरूरी चीजें तैयार कर लें।

 

गेहूं, सरसों, चना, मटर, मसूर और जौ जैसी प्रमुख रबी फसलों के लिए अभी से अपनी फसल की योजना बनाना किसान के लिए फायदेमंद रहेगा।



सबसे पहले खेत को बुवाई के लिए तैयार करें

 

रबी की फसल अच्छी हो, इसके लिए खेत की शुरुआती तैयारी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। सबसे पहले खेत में पिछली फसल के अवशेष और खरपतवार की स्थिति देखें। इसके बाद जमीन की जरूरत के हिसाब से जुताई करें और खेत को समतल करें। लेकिन किसान भाई एक बात याद रखें, हर खेत में बार-बार गहरी जुताई करना जरूरी नहीं है। मिट्टी की हालत, पिछली फसल, उपलब्ध नमी और अगली फसल को देखकर ही जुताई का तरीका तय करें।

 

जहां धान के बाद गेहूं की बुवाई करनी हो, वहां समय बचाने वाली कम जुताई या बिना जुताई की तकनीक भी कुछ परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है।



खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं

 

रबी की बुवाई से पहले अगर संभव हो तो मिट्टी की जांच जरूर करा लें। इससे पता चलता है कि खेत में कौन से पोषक तत्व पर्याप्त हैं और किनकी कमी है।

 

इसके बाद उसी हिसाब से खाद की मात्रा तय की जा सकती है। हर साल बिना जांच के एक जैसी खाद डालते रहने से खर्च बढ़ सकता है और मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन भी बिगड़ सकता है। किसान भाई खेत की जरूरत के अनुसार सड़ी हुई गोबर की खाद और रासायनिक खाद का संतुलित इस्तेमाल करें।

 

एक खेत में जितनी खाद, दूसरे में उतनी ही जरूरी नहीं

 

अक्सर किसान पड़ोसी के खेत में इस्तेमाल हुई खाद की मात्रा देखकर अपने खेत में भी उतनी ही खाद डाल देते हैं। यह तरीका सही नहीं है। मिट्टी की जांच, फसल की जरूरत और स्थानीय कृषि सलाह के आधार पर खाद की मात्रा तय करें।

 

रबी की बुवाई से पहले अच्छा बीज जुटा लें

 

अच्छी फसल की शुरुआत अच्छे बीज से होती है। इसलिए बुवाई के समय बाजार में जो बीज मिल जाए, उसे खरीदने के बजाय पहले से ही प्रमाणित और अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त बीज की व्यवस्था कर लें।

 

गेहूं, सरसों, चना या दूसरी रबी फसल चुनते समय इन बातों को देखें:

 

·        आपके इलाके के लिए किस्म उपयुक्त है या नहीं

·        फसल कितने दिनों में तैयार होती है

·        सिंचाई की सुविधा कैसी है

·        बुवाई का समय क्या है

·        स्थानीय बाजार में किस फसल की मांग है

 

सरसों में भी किस्म का चुनाव क्षेत्र और खेती की स्थिति देखकर करना जरूरी है। आईसीएआर की जानकारी में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उपयुक्त सरसों की किस्मों का उल्लेख मिलता है।

 

बीज उपचार को करें नजरअंदाज

 

बुवाई से पहले बीज उपचार करना भी खेती की जरूरी तैयारी में शामिल है। इससे फसल में शुरुआती अवस्था में आने वाली कुछ बीमारियों और समस्याओं से बचाव में मदद मिल सकती है।

 

लेकिन यहां किसान भाई सावधानी रखें। गेहूं, चना, सरसों और दूसरी फसलों के लिए बीज उपचार की विधि और मात्रा अलग हो सकती है।

 

इसलिए किसी भी दवा का नाम या मात्रा बिना जानकारी के इस्तेमाल करें। फसल के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग या विशेषज्ञ की अनुशंसा के आधार पर बीज उपचार करें।

 

सिंचाई की व्यवस्था पहले से जांच लें

 

रबी की फसल में कई बार सिंचाई का समय आने पर किसान को मोटर, पाइप या पानी की व्यवस्था में परेशानी होती है। इससे बचने के लिए बुवाई से पहले ही सिंचाई की पूरी व्यवस्था जांच लें। मोटर ठीक है या नहीं, खेत तक पानी पहुंच रहा है या नहीं और नालियां सही हैं या नहीं, इन सबकी जांच अभी कर लें।

 

उदाहरण के तौर पर आईसीएआर की गेहूं की एचडी 3226 किस्म की सलाह में पहली सिंचाई बुवाई के करीब 21 दिन बाद बताई गई है। हालांकि वास्तविक सिंचाई का समय मिट्टी, मौसम और फसल की स्थिति के अनुसार बदल सकता है।

 

खरपतवार को शुरुआत में ही रोकें

 

रबी की फसल में खरपतवार भी बड़ी समस्या बन सकते हैं। ये फसल के साथ पानी, खाद और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसलिए बुवाई से पहले खेत को साफ रखें और फसल निकलने के बाद भी नियमित निगरानी करें।

 

खरपतवार दिखाई देते ही उसकी पहचान करें, क्योंकि गेहूं और दूसरी फसलों में अलग-अलग प्रकार के खरपतवार मिलते हैं और उनका नियंत्रण भी अलग तरीके से किया जाता है।

 

गेहूं की बुवाई के लिए अभी से क्यों करें तैयारी?

 

गेहूं देश की प्रमुख रबी फसलों में से एक है और इसकी सही समय पर बुवाई काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

 

उदाहरण के लिए, आईसीएआर की एचडी 3226 गेहूं की किस्म के लिए सिंचित और समय पर बोई जाने वाली फसल में 5 से 25 नवंबर का बुवाई समय दिया गया है। इसलिए किसान भाई केवल कैलेंडर की तारीख देखकर बुवाई करें। अपनी चुनी हुई किस्म, स्थानीय मौसम और कृषि विभाग की सलाह के हिसाब से सही समय तय करें। समय पर बुवाई के लिए खेत पहले से तैयार रखना सबसे जरूरी है।




सरसों, चना और मटर के लिए भी बनाएं योजना

 

रबी में सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि सरसों, चना, मटर, मसूर और जौ जैसी फसलें भी किसान लेते हैं। इन सभी में बुवाई से पहले कुछ बातें समान रहती हैं

 

अच्छा बीज + तैयार खेत + सही नमी + संतुलित खाद + सही समय पर बुवाई।

 

अगर धान या दूसरी खरीफ फसल के बाद रबी की फसल लेनी है, तो दोनों फसलों के बीच उपलब्ध समय को पहले से ध्यान में रखें। खेत तैयार करने में ज्यादा देरी होने पर बुवाई भी पीछे खिसक सकती है।

 

रबी की बुवाई से पहले ये 7 काम जरूर कर लें

 

1. खेत की मिट्टी और नमी की स्थिति देखें।

2. जरूरत के अनुसार जुताई और खेत की तैयारी करें।

3. मिट्टी की जांच कराएं।

4. अच्छी गुणवत्ता वाला बीज पहले से खरीदें।

5. फसल के अनुसार बीज उपचार की व्यवस्था करें।

6. खाद और सिंचाई की तैयारी पूरी रखें।

7. अपनी फसल की बुवाई का सही समय पहले से तय करें।

 

किसान भाई एक बात याद रखें

 

रबी की अच्छी फसल की तैयारी बुवाई वाले दिन नहीं, उससे काफी पहले शुरू होती है। अगर खेत तैयार है, बीज अच्छी गुणवत्ता का है, खाद की सही मात्रा तय है और सिंचाई की व्यवस्था पहले से ठीक है, तो बुवाई के समय किसान को जल्दबाजी नहीं करनी पड़ेगी।

 

इसलिए खरीफ की फसल के काम के साथ-साथ अब रबी फसल की तैयारी भी शुरू कर दें। समय पर तैयारी और सही समय पर बुवाई फसल की मजबूत शुरुआत के लिए बहुत जरूरी है।

उत्तर भारत के गेहूं-सरसों वाले इलाकों से लेकर मध्य भारत और दूसरे रबी उत्पादक क्षेत्रों तक, किसान अपने जिले के मौसम, मिट्टी, सिंचाई की उपलब्धता और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार बुवाई का समय तय करें। एक ही तारीख पूरे देश के हर खेत के लिए सही नहीं होती।

 

रबी फसल की तैयारी को लेकर किसान के सवाल

 

रबी फसल की तैयारी कब शुरू करें?

 

रबी की तैयारी बुवाई से काफी पहले शुरू कर देनी चाहिए। खेत, बीज, मिट्टी की जांच, खाद और सिंचाई की व्यवस्था समय रहते कर लेना बेहतर रहता है।

 

रबी में कौन-कौन सी फसलें बोई जाती हैं?

 

गेहूं, सरसों, चना, मटर, मसूर और जौ प्रमुख रबी फसलों में शामिल हैं।

 

रबी की फसल में मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है?

 

मिट्टी की जांच से खेत में पोषक तत्वों की स्थिति पता चलती है। इससे फसल की जरूरत के अनुसार खाद देने में मदद मिलती है।

 

गेहूं की बुवाई कब करनी चाहिए?

 

गेहूं की बुवाई का समय किस्म और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए आईसीएआर की एचडी 3226 किस्म के लिए समय पर सिंचित बुवाई का समय 5–25 नवंबर दिया गया है।

 

क्या रबी फसल में बीज उपचार जरूरी है?

 

फसल और क्षेत्र के अनुसार बीज उपचार उपयोगी हो सकता है। इसके लिए संबंधित फसल की अनुशंसित विधि और मात्रा ही अपनाएं।

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