खेत में खरपतवार से परेशान हैं किसान? तो यह तकनीक आपके काम की है

खेत में खरपतवार से परेशान हैं किसान? तो यह तकनीक आपके काम की है
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Kisaan Helpline

Agriculture
Sep 18, 2026

खेत में खरपतवार कैसे रोकें?

खरपतवार का दबाव कम करने के लिए मल्चिंग, समय पर निराई-गुड़ाई, उचित पौध दूरी और फसल के अनुसार दूसरे नियंत्रण उपाय अपनाए जा सकते हैं। मल्चिंग मिट्टी की सतह को ढककर खरपतवार की बढ़वार दबाने और मिट्टी की नमी बचाने में मदद करती है।

मल्चिंग तकनीक में फसल के आसपास की मिट्टी को प्लास्टिक फिल्म, पराली या पुआल जैसी सामग्री से ढका जाता है। इससे खरपतवार की बढ़वार दबाने, मिट्टी की नमी बचाने और कुछ फसलों में सिंचाई निराई की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है।

बार-बार खेत की निराई कराने से बढ़ रही है लागत? मल्चिंग तकनीक खरपतवार की बढ़वार को रोकने के साथ मिट्टी की नमी बचाने में भी मदद कर सकती है। जानिए प्लास्टिक और प्राकृतिक मल्चिंग का सही तरीका, इसके फायदे और किन बातों का रखना है ध्यान।

 

खेती में बीज बोने के बाद किसान का ध्यान फसल की बढ़वार, खाद, सिंचाई और कीट-रोग प्रबंधन पर रहता है। लेकिन इसी बीच खेत में उगने वाले खरपतवार फसल के लिए बड़ी परेशानी बन जाते हैं। ये फसल के साथ पानी, पोषक तत्व, धूप और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। समय पर नियंत्रण किया जाए तो फसल की बढ़वार और उपज दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

 

खरपतवार निकालने के लिए बार-बार मजदूर लगाने पड़ें तो खेती की लागत भी बढ़ती है। ऐसे में किसान खरपतवार नियंत्रण की मल्चिंग तकनीक को अपनाने पर विचार कर सकते हैं। मल्चिंग मिट्टी की सतह को ढककर खरपतवार की बढ़वार दबाने और मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करती है। ICAR और कृषि विश्वविद्यालयों की जानकारी में भी मल्चिंग को खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण की उपयोगी विधि बताया गया है।

क्या है मल्चिंग तकनीक?

 

मल्चिंग का आसान मतलब है फसल के आसपास की मिट्टी को किसी उपयुक्त सामग्री से ढक देना। इसके लिए किसान प्लास्टिक मल्च फिल्म के अलावा पराली, पुआल, सूखी घास, पत्तियां और दूसरे उपयुक्त फसल अवशेषों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

जब मिट्टी की सतह ढकी रहती है तो खरपतवारों को पर्याप्त रोशनी नहीं मिलती। इससे उनकी बढ़वार दबती है। साथ ही मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण भी कम हो सकता है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहने में मदद मिलती है।

 

मल्चिंग से खरपतवार कैसे कम होते हैं?

 

खरपतवार के बीजों को अंकुरित होने और बढ़ने के लिए रोशनी की जरूरत होती है। जब मल्च की परत मिट्टी को ढक देती है, तो नीचे मौजूद खरपतवारों तक रोशनी कम पहुंचती है।

 

खासकर काली प्लास्टिक मल्च का इस्तेमाल कई सब्जी फसलों में खरपतवार दबाने के लिए किया जाता है। ICAR के एक खेत प्रदर्शन में ड्रिप सिंचाई के साथ काली और सफेद प्लास्टिक मल्च तथा धान की पराली के इस्तेमाल से सब्जियों में खरपतवार की मात्रा कम हुई और मिट्टी की नमी बचाने में मदद मिली।

 

हालांकि यह समझना जरूरी है कि मल्चिंग से हर तरह का खरपतवार हर परिस्थिति में पूरी तरह खत्म हो जाएगा, ऐसा नहीं है। खेत की निगरानी और जरूरत के अनुसार अन्य खरपतवार नियंत्रण उपाय भी जरूरी हो सकते हैं।

 

प्लास्टिक मल्चिंग से क्या फायदा होता है?

 

प्लास्टिक मल्च का इस्तेमाल खासकर कई सब्जी और बागवानी फसलों में किया जाता है। इसके कुछ प्रमुख फायदे हैं

 

·        खरपतवार की बढ़वार को दबाने में मदद

·        मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद

·        पानी के वाष्पीकरण में कमी

·        मिट्टी के तापमान को नियंत्रित करने में मदद

·        कुछ फसलों में पौधे की जड़ों के आसपास बेहतर वातावरण

·        निराई-गुड़ाई की जरूरत और मजदूरी कम करने में मदद

 

TNAU के अनुसार प्लास्टिक मल्च का रंग और मोटाई फसल, मौसम, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार चुनी जानी चाहिए। काली फिल्म का इस्तेमाल खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण के लिए किया जाता है।

 

मल्च की मोटाई कितनी रखें?

 

मल्च की मोटाई हर फसल और परिस्थिति में एक जैसी नहीं होती। उदाहरण के लिए, TNAU की टमाटर और बैंगन की खेती संबंधी सिफारिशों में 25 माइक्रोन काली एलडीपीई मल्च फिल्म का उपयोग बताया गया है।

 

इसलिए किसान बाजार से मल्च खरीदते समय केवल मोटाई देखकर फैसला करें। कौन-सी फसल है, कितने समय के लिए मल्च चाहिए और मौसम कैसा है, इन बातों को ध्यान में रखकर फिल्म का चुनाव करें।

 

प्लास्टिक नहीं लगाना चाहते तो प्राकृतिक मल्च अपनाएं

 

अगर किसान प्लास्टिक मल्च का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो उनके पास प्राकृतिक विकल्प भी हैं।

 

पराली, पुआल, सूखी घास, सूखे पत्ते और दूसरे साफ फसल अवशेष मिट्टी की सतह पर बिछाए जा सकते हैं। समय के साथ जैविक मल्च सड़कर मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद कर सकता है।

 

ध्यान रखें कि इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री में खरपतवार के पके हुए बीज हों, वरना मल्च लगाने के बाद भी खेत में नए खरपतवार उग सकते हैं।

 

मल्चिंग से पानी की बचत में भी मिल सकती है मदद

 

गर्म मौसम में खेत की खुली मिट्टी से पानी तेजी से उड़ता है। मल्च मिट्टी की सतह को ढक देता है, जिससे वाष्पीकरण कम हो सकता है।

 

ICAR के अनुसार पुआल और दूसरे मल्च पदार्थ मिट्टी की नमी बचाने, वाष्पीकरण कम करने और खरपतवार की बढ़वार दबाने में मदद कर सकते हैं। इसी वजह से कई सब्जी फसलों में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग को साथ अपनाया जाता है।

 

खेत में मल्चिंग बिछाने का सही तरीका

 

मल्चिंग लगाने से पहले खेत की तैयारी अच्छी होना बहुत जरूरी है।

 

1. खेत तैयार करें

 

पहले खेत की जुताई और समतलीकरण करें। मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और पोषक तत्व दें।

 

2. क्यारी और कतार बनाएं

 

फसल की जरूरत के अनुसार क्यारी और पौधों की दूरी तय करें।

 

3. ड्रिप की व्यवस्था करें

 

अगर ड्रिप सिंचाई लगानी है तो मल्च बिछाने से पहले पाइप की व्यवस्था कर लें।

 

4. मल्च को अच्छी तरह फैलाएं

 

मल्च फिल्म को मिट्टी पर सीधा और बिना ज्यादा सिलवट के फैलाएं। इसके किनारों को मिट्टी में दबाकर अच्छी तरह पकड़ दें। TNAU की तकनीकी जानकारी में भी मल्च के किनारों को मिट्टी में दबाकर मजबूती से लगाने की सलाह दी गई है।

 

5. पौधों के लिए छेद करें

 

फसल की दूरी के अनुसार मल्च में छेद करें और उसी जगह पौधों की रोपाई करें या बीज डालें। इस तरह खेत की बाकी मिट्टी ढकी रहती है और खरपतवार के उगने की संभावना कम होती है।

 

किन फसलों में मल्चिंग ज्यादा उपयोगी है?

 

मल्चिंग का इस्तेमाल कई सब्जी और बागवानी फसलों में किया जाता है। टमाटर, बैंगन, मिर्च, खीरा, भिंडी, खरबूजा और तरबूज जैसी फसलों में इसके इस्तेमाल के उदाहरण मिलते हैं।

 

हालांकि हर फसल में एक ही प्रकार की मल्च फिल्म या एक ही मोटाई सही नहीं होती। फसल और स्थानीय मौसम के अनुसार चुनाव करना जरूरी है।

 

मल्चिंग करते समय ये गलतियां करें

 

मल्चिंग लगाने के बाद खेत की देखभाल पूरी तरह बंद नहीं हो जाती। इन बातों का ध्यान रखें

 

बहुत ढीली फिल्म लगाएं: हवा चलने पर फिल्म हट सकती है।

पानी जमा होने दें: मल्च के साथ जल निकासी भी अच्छी होनी चाहिए।

पौधे के तने को दबाएं: पौधे के आसपास पर्याप्त जगह रखें।

फटी फिल्म को नजरअंदाज करें: खराब फिल्म से खरपतवार फिर उग सकते हैं।

प्लास्टिक को खेत में छोड़ें: फसल खत्म होने के बाद प्लास्टिक मल्च को निकालकर उचित तरीके से निपटाएं।

 

ICAR ने प्लास्टिक मल्चिंग के फायदे के साथ इसके जिम्मेदार इस्तेमाल और सही निपटान पर भी जोर दिया है। गलत तरीके से प्लास्टिक का इस्तेमाल मिट्टी में सूक्ष्म प्लास्टिक की समस्या पैदा कर सकता है।

किसान भाई के लिए 5 जरूरी बातें

 

1. खरपतवार छोटा रहते ही नियंत्रण करें।

बड़े होने के बाद उन्हें निकालने में ज्यादा मेहनत लग सकती है।

 

2. मल्चिंग फसल के हिसाब से चुनें।

हर फसल के लिए एक ही फिल्म सही नहीं होती।

 

3. प्राकृतिक मल्च भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

पराली और पुआल जैसे पदार्थ कम लागत वाला विकल्प हो सकते हैं।

 

4. मल्चिंग के साथ पानी का सही प्रबंधन करें।

ड्रिप सिंचाई के साथ इसका उपयोग कई सब्जी फसलों में किया जाता है।

 

5. प्लास्टिक मल्च का सही निपटान करें।

इसे खेत में छोड़ना या खुले में जलाना उचित नहीं है।

 

किसान के लिए सीधी बात

 

अगर आपके खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिए बार-बार निराई-गुड़ाई करनी पड़ रही है, तो मल्चिंग एक उपयोगी विकल्प हो सकती है। इससे खरपतवार का दबाव कम करने के साथ मिट्टी की नमी बचाने में भी मदद मिल सकती है।

 

लेकिन मल्चिंग को किसी एक जादुई उपाय की तरह देखें। सही खेत तैयारी, उचित सिंचाई, संतुलित खाद, सही पौध दूरी और समय पर खरपतवार नियंत्रणइन सभी का मिलकर फसल पर असर पड़ता है।

 

किसान भाई अपनी फसल और क्षेत्र के हिसाब से मल्चिंग का तरीका चुनें और जरूरत पड़ने पर नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लें।

मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और देश के दूसरे कृषि क्षेत्रों में किसान मल्चिंग अपनाने से पहले फसल, मिट्टी, मौसम और सिंचाई की उपलब्धता को ध्यान में रखें। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग की फसल-विशेष सलाह के अनुसार मल्च का प्रकार और उपयोग तय करना बेहतर रहेगा।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

खेत में खरपतवार कैसे रोकें?

 

खरपतवार रोकने के लिए समय पर निराई-गुड़ाई, मल्चिंग, उचित पौध दूरी और फसल के अनुसार अन्य खरपतवार नियंत्रण उपाय अपनाए जा सकते हैं। मल्चिंग मिट्टी को ढककर खरपतवार की बढ़वार दबाने में मदद करती है।

 

मल्चिंग क्या है?

 

फसल के आसपास की मिट्टी को प्लास्टिक फिल्म, पराली, पुआल, सूखी घास या अन्य उपयुक्त सामग्री से ढकने की प्रक्रिया को मल्चिंग कहते हैं।

 

क्या मल्चिंग से खरपतवार पूरी तरह खत्म हो जाते हैं?

 

नहीं। मल्चिंग खरपतवार की बढ़वार को काफी हद तक दबाने में मदद कर सकती है, लेकिन खेत की नियमित निगरानी और जरूरत के अनुसार दूसरे उपाय भी जरूरी हो सकते हैं।

 

प्लास्टिक मल्च या प्राकृतिक मल्च, कौन सा इस्तेमाल करें?

 

यह फसल, मौसम, मिट्टी, पानी और खेती की व्यवस्था पर निर्भर करता है। प्राकृतिक मल्च कम लागत में उपलब्ध हो सकता है, जबकि प्लास्टिक मल्च कई सब्जी फसलों में खरपतवार नियंत्रण के लिए उपयोग किया जाता है।

 

क्या मल्चिंग के साथ ड्रिप सिंचाई कर सकते हैं?

 

हां। कई सब्जी फसलों में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग का साथ में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पानी पौधों की जड़ों के पास पहुंचाने और मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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