19% कम बारिश से एमपी में बढ़ी किसानों की चिंता धान और सोयाबीन की फसलों पर मंडराया संकट

19% कम बारिश से एमपी में बढ़ी किसानों की चिंता धान और सोयाबीन की फसलों पर मंडराया संकट
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Kisaan Helpline

Agriculture
Aug 07, 2026

मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। 5 अगस्त तक राज्य में सामान्य से करीब 19 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर दिखाई देने लगा है। खासकर सोयाबीन, धान और मक्का की खेती करने वाले किसान सबसे ज्यादा चिंतित हैं, क्योंकि इन फसलों की शुरुआती बढ़वार के लिए समय पर बारिश बेहद जरूरी होती है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में भी कमी आने की आशंका बढ़ जाएगी।

कम बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं ये फसलें

मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य माना जाता है। यहां लाखों किसान खरीफ सीजन में सोयाबीन की खेती करते हैं। बुवाई के बाद पौधों की जड़ों तक समय पर नमी पहुंचना जरूरी होता है। लेकिन इस बार बारिश कम होने से कई क्षेत्रों में पौधों की बढ़वार धीमी पड़ रही है।

धान की खेती पर भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। जिन इलाकों में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, वहां किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं। लगातार कम बारिश की वजह से कई जगह रोपाई में देरी हुई है, जिससे पौधों का विकास प्रभावित होने की संभावना है। मक्का की फसल भी लगातार नमी की मांग करती है। ऐसे में बारिश की कमी इस फसल की पैदावार पर भी असर डाल सकती है।


अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो क्या होगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रहने पर सोयाबीन में फलियां कम बन सकती हैं और दानों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। धान की फसल में पानी की कमी से पौधों की बढ़वार रुक सकती है। इससे बालियां कमजोर बनेंगी और उत्पादन घट सकता है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा।

हालांकि कृषि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि आने वाले दिनों में मानसून फिर से सक्रिय हो जाता है और अच्छी बारिश होती है, तो फसलों को काफी हद तक संभाला जा सकता है।

छोटे किसानों की बढ़ी चिंता

खेती की लागत पहले ही लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, दवा और मजदूरी पर किसानों का खर्च बढ़ चुका है। ऐसे में यदि उत्पादन कम हुआ, तो सबसे ज्यादा परेशानी छोटे और सीमांत किसानों को होगी। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा नहीं है, वे पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं। ऐसे किसानों के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

किसान अभी क्या करें?

कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि उपलब्ध पानी का सोच-समझकर उपयोग करें और खेतों में नमी बनाए रखने के उपाय अपनाएं।

● खेत में अनावश्यक पानी की बर्बादी न करें।
● जहां संभव हो, हल्की सिंचाई करें।
● खेत में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग या अन्य उपयुक्त उपाय अपनाएं।
● मौसम का पूर्वानुमान देखते रहें और उसी के अनुसार कृषि कार्य करें।
● फसल में तनाव के लक्षण दिखाई दें तो नजदीकी कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है, तो फसलों को काफी हद तक संभाला जा सकता है। इसलिए किसान मौसम की जानकारी पर नजर रखें और जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचें।

FAQs

मध्य प्रदेश में इस बार कितनी कम बारिश हुई है?
5 अगस्त तक मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 19 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

कम बारिश से कौन-सी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं?
सोयाबीन, धान और मक्का की फसल पर सबसे अधिक असर पड़ने की संभावना है।

क्या अभी भी फसल बचाई जा सकती है?
हाँ। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है और किसान सही प्रबंधन अपनाते हैं, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कम बारिश में किसान क्या करें?
उपलब्ध पानी का सही उपयोग करें, खेत में नमी बनाए रखें और मौसम के अनुसार कृषि कार्य करें।

सबसे ज्यादा चिंता किन किसानों को है?
छोटे और सीमांत किसानों को, क्योंकि उनके पास सिंचाई के साधन सीमित होते हैं।

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