चिया सीड्स की खेती से बढ़ सकती है किसानों की कमाई, लेकिन बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान

चिया सीड्स की खेती से बढ़ सकती है किसानों की कमाई, लेकिन बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान
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Kisaan Helpline

Agriculture
Sep 19, 2026

चिया की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाला खेत तैयार करें और अपने क्षेत्र के मौसम के अनुसार सही समय पर बुवाई करें। बीज छोटे होने के कारण उन्हें बहुत गहराई में डालें। शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण रखें और खाद सिंचाई मिट्टी तथा फसल की जरूरत के अनुसार करें। खेती शुरू करने से पहले बाजार और खरीदार की जानकारी लेना भी जरूरी है।


गेहूं, धान और सरसों के साथ किसान अब ऐसी फसलों की ओर भी देख रहे हैं जिनकी बाजार में अलग मांग है। चिया सीड्स ऐसी ही एक फसल है, जिसे कम पानी वाली फसल के रूप में देखा जाता है। लेकिन अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर बुवाई, उचित बीज मात्रा, खरपतवार नियंत्रण और बाजार की जानकारी सबसे जरूरी है।

 

खेती में अब किसान सिर्फ पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहना चाहते। जहां बाजार की मांग हो और खेती की लागत संभाली जा सके, वहां किसान नई फसलों को भी आजमाने लगे हैं। चिया सीड्स की खेती भी इसी दिशा में एक विकल्प बनकर सामने आई है।

 

चिया के बीजों का इस्तेमाल खाने-पीने और स्वास्थ्य से जुड़े कई उत्पादों में किया जाता है। इसकी खेती में पानी की जरूरत भी कई दूसरी फसलों की तुलना में कम हो सकती है। ICAR ने चिया को कम पानी की जरूरत वाली उभरती फसल बताया है और इसके लिए अलग-अलग परिस्थितियों में खेती की तकनीक भी विकसित की है।

 

लेकिन किसान भाई एक बात शुरुआत में ही समझ लेंसिर्फ चिया का बाजार भाव देखकर खेती शुरू करना सही नहीं है। पहले अपने खेत की मिट्टी, स्थानीय मौसम, बुवाई का समय और फसल बेचने की व्यवस्था के बारे में जानकारी लेना जरूरी है।

 

चिया की खेती के लिए कैसा खेत चुनें?

 

चिया की खेती के लिए खेत तैयार करते समय सबसे पहले जल निकासी पर ध्यान दें। ऐसा खेत बेहतर रहेगा जहां बारिश या सिंचाई का पानी लंबे समय तक जमा रहे।

 

बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा और समतल कर लें। मिट्टी की स्थिति के अनुसार अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

ICAR के अनुसार चिया कम पानी वाली फसल है और इसे कुछ कम उपजाऊ मिट्टियों में भी उगाया जा सकता है। हालांकि फसल का प्रदर्शन मिट्टी, मौसम और खेती के प्रबंधन पर निर्भर करता है।

 

चिया की बुवाई कब करें?

 

चिया की बुवाई का सही समय आपके क्षेत्र के मौसम पर निर्भर करता है। हर राज्य और जिले में एक ही तारीख को बुवाई करना जरूरी नहीं है।

 

ICAR-NIASM, बारामती की खेती संबंधी सिफारिश में अधिक उपज के लिए 1 अगस्त से 15 सितंबर के बीच बुवाई की अवधि बताई गई है। इसके अलावा अलग समय पर खेती करने की स्थिति में पौधों की दूरी और प्रबंधन में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।

 

इसलिए किसान भाई अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग से स्थानीय मौसम के अनुसार बुवाई की तारीख जरूर पूछ लें।

 

चिया के छोटे बीजों की बुवाई में करें गलती

 

चिया के बीज बहुत छोटे होते हैं। इसलिए इन्हें बहुत गहराई में डालने से बचना चाहिए।

 

इसे खेत में छिटककर या कतार में बोया जा सकता है। अगर संभव हो तो कतार में बुवाई करना ज्यादा सुविधाजनक रहता है, क्योंकि इससे आगे चलकर निराई-गुड़ाई और पौधों की निगरानी आसान हो जाती है।

 

ICAR की सिफारिश के अनुसार कतार में बुवाई के लिए करीब 2 किलो बीज प्रति हेक्टेयर और छिटकवां बुवाई में 2.5 से 3 किलो बीज प्रति हेक्टेयर रखा जा सकता है।

 

यानी एक एकड़ में बीज की मात्रा काफी कम रहती है। लेकिन स्थानीय किस्म और खेती की स्थिति के अनुसार मात्रा बदल सकती है, इसलिए बीज खरीदते समय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

खेत में पानी जमा होने दें

 

चिया को कम पानी वाली फसल जरूर माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि फसल को पानी की जरूरत ही नहीं पड़ती।

 

फसल की अवस्था और मौसम के अनुसार जरूरत पड़ने पर सिंचाई करनी होती है। वहीं खेत में लंबे समय तक पानी खड़ा रहने से बचना चाहिए।

 

ICAR के खेती पैकेज में रबी मौसम के लिए सीमित सिंचाई प्रबंधन की भी जानकारी दी गई है। इससे साफ है कि चिया में पानी की मात्रा से ज्यादा जरूरी है सही समय पर सही मात्रा में पानी देना।

 

चिया की खेती में खाद कितनी दें?

 

खाद की मात्रा खेत की मिट्टी और फसल की जरूरत देखकर तय करना बेहतर है। बिना मिट्टी की जांच के जरूरत से ज्यादा खाद डालने से खेती की लागत बढ़ सकती है।

 

ICAR-NIASM के एक विशिष्ट खेती पैकेज में चिया के लिए 90:60:75 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर N:PO:KO की अनुशंसा दी गई है। इसमें नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में देने की व्यवस्था बताई गई है। यह एक विशेष क्षेत्र और उत्पादन परिस्थितियों के लिए विकसित सिफारिश है, इसलिए किसान इसे अपने खेत में सीधे लागू करने के बजाय स्थानीय कृषि सलाह से मिलाकर देखें।

 

आसान बात समझें

 

मिट्टी की जांचजरूरत के अनुसार खादफिर फसल की स्थिति देखकर पोषण प्रबंधन।

 

यही तरीका खेती की लागत को बेवजह बढ़ने से रोक सकता है।

 

शुरुआती दिनों में खरपतवार पर रखें नजर

 

चिया की फसल की शुरुआती अवस्था में पौधे छोटे होते हैं। अगर उस समय खेत में खरपतवार ज्यादा बढ़ गए तो वे फसल के साथ पानी और पोषक तत्वों के लिए मुकाबला करेंगे।

 

इसलिए बुवाई के बाद खेत की नियमित निगरानी करें। कतार में बुवाई करने से पौधों के बीच निराई-गुड़ाई करना भी आसान रहता है। शुरुआत में खेत साफ रखना चिया की अच्छी बढ़वार के लिए काफी जरूरी है।

 

चिया की फसल में पौधों की दूरी भी मायने रखती है

 

पौधों को बहुत पास-पास लगाने से उन्हें पर्याप्त जगह और संसाधन नहीं मिल पाते। ICAR-NIASM के अनुसार जुलाई से सितंबर की बुवाई के लिए करीब 60 × 30 सेंटीमीटर और अक्टूबर-नवंबर की स्थिति में 50 × 30 सेंटीमीटर दूरी का पैकेज दिया गया है।

 

हालांकि किसान अपने क्षेत्र, किस्म और खेती की पद्धति के अनुसार स्थानीय सलाह जरूर लें।

 

चिया की कटाई कब करें?

 

जब चिया की फसल पूरी तरह पकने लगे और पौधों का रंग बदलने लगे, तब कटाई की तैयारी करनी चाहिए। बीजों के अच्छी तरह विकसित और सख्त होने की स्थिति को भी देखें।

 

·        कटाई में बहुत ज्यादा देरी करने से बीज झड़ने का खतरा हो सकता है। इसलिए मौसम और फसल की स्थिति देखकर समय पर कटाई करना जरूरी है।

 

·        कटाई के बाद पौधों को अच्छी तरह सुखाएं। इसके बाद बीजों को अलग करके साफ करें और सुरक्षित जगह पर भंडारण करें।

 

·        कटाई का महीना हर इलाके में एक जैसा नहीं होगा। यह बुवाई के समय, मौसम और फसल की अवधि पर निर्भर करेगा।

 

एक एकड़ में कितनी कमाई हो सकती है?

 

यही सवाल ज्यादातर किसान सबसे पहले पूछते हैंचिया की खेती से कितना मुनाफा होगा?

 

इसका कोई एक तय जवाब नहीं है। चिया की खेती में कमाई उपज, बाजार भाव, बीज की लागत, मजदूरी, सिंचाई, कटाई और बिक्री के खर्च पर निर्भर करती है।

 

ICAR-NIASM के एक अध्ययन में चिया की अकेली खेती में लगभग ₹75,213 प्रति हेक्टेयर शुद्ध आय दर्ज की गई। वहीं चिया के साथ मेथी की अंतरवर्ती खेती में एक विशेष परिस्थितियों में शुद्ध आय करीब ₹1.07 लाख प्रति हेक्टेयर तक दर्ज हुई। ये आंकड़े शोध की विशेष परिस्थितियों से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें हर किसान की निश्चित कमाई नहीं माना जा सकता।

 

इसलिए अगर कोई किसान को एक एकड़ से ₹80 हजार या ₹1 लाख से ज्यादा निश्चित मुनाफे का दावा कर रहा है, तो पहले लागत और बाजार भाव की पूरी गणना जरूर करें।

कमाई का हिसाब ऐसे समझें

 

कुल बिक्री = उपज × उस समय का बाजार भाव

 

इसके बाद इसमें से बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई, कटाई, सफाई, परिवहन और दूसरी लागत घटाने पर वास्तविक मुनाफा सामने आएगा।

 

चिया की खेती शुरू करने से पहले बाजार की जानकारी जरूर लें

 

नई फसल की खेती में यह सबसे जरूरी बात है। बुवाई करने से पहले अपने आसपास के व्यापारी, थोक बाजार, प्रसंस्करण इकाई या संभावित खरीदार से पता कर लें कि चिया की खरीद कहां और किस भाव पर होती है।

 

किसान के लिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है

 

पहले बाजार की जानकारी लें, फिर बड़े क्षेत्र में बुवाई करें। अगर पहली बार चिया की खेती कर रहे हैं तो छोटे क्षेत्र से शुरुआत करके फसल की लागत, उत्पादन और बिक्री का अनुभव लेना बेहतर रहेगा।

 

पहली बार चिया की खेती कर रहे हैं तो ये 8 बातें याद रखें

 

·        खेत में पानी जमा होने दें।

·        अपने इलाके के अनुसार बुवाई का समय तय करें।

·        छोटे बीजों को बहुत गहराई में डालें।

·        संभव हो तो कतार में बुवाई करें।

·        शुरुआती अवस्था में खरपतवार को नियंत्रित करें।

·        खाद मिट्टी की जांच और स्थानीय सलाह के अनुसार दें।

·        कटाई में ज्यादा देरी करें।

·        बुवाई से पहले फसल बेचने का बाजार जरूर तलाशें।

 

किसान भाई के लिए सीधी बात

 

चिया सीड्स की खेती किसानों के लिए एक नई फसल का विकल्प हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां कम पानी में खेती करने की जरूरत होती है। लेकिन अच्छी कमाई के लिए केवल फसल उगाना काफी नहीं है।

 

सही बुवाई समय, बीज की उचित मात्रा, खेत में पानी की सही व्यवस्था, खरपतवार नियंत्रण, संतुलित खाद और बाजार की पहले से जानकारीइन सभी बातों को साथ लेकर चलना होगा।

 

अगर पहली बार खेती कर रहे हैं तो पूरी जमीन लगाने के बजाय छोटे क्षेत्र में चिया की खेती शुरू करके अनुभव लेना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चिया की खेती कब करनी चाहिए?

 

चिया की बुवाई का समय इलाके के मौसम के अनुसार बदल सकता है। ICAR-NIASM के एक खेती पैकेज में 1 अगस्त से 15 सितंबर को बेहतर उपज के लिए उपयुक्त अवधि बताया गया है। अपने जिले के मौसम के अनुसार स्थानीय कृषि सलाह जरूर लें।

 

एक एकड़ में चिया का कितना बीज लगता है?

 

ICAR की सिफारिश के अनुसार कतार में बुवाई के लिए करीब 2 किलो प्रति हेक्टेयर और छिटकवां बुवाई में 2.5–3 किलो प्रति हेक्टेयर बीज की जरूरत बताई गई है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।

 

क्या चिया की खेती में ज्यादा पानी लगता है?

 

नहीं। चिया को कम पानी की जरूरत वाली फसल माना जाता है, लेकिन फसल की अवस्था और मौसम के अनुसार जरूरत पड़ने पर सिंचाई करनी होती है। खेत में पानी जमा होने से बचाना जरूरी है।

 

चिया की खेती से कितनी कमाई होती है?

 

कमाई निश्चित नहीं है। यह उपज, बाजार भाव और खेती की लागत पर निर्भर करती है। ICAR के एक अध्ययन में अलग-अलग खेती प्रणालियों में अलग शुद्ध आय दर्ज की गई है।

 

क्या चिया की खेती पहली बार करने वाला किसान कर सकता है?

 

हां, लेकिन पहले स्थानीय मौसम, मिट्टी, बुवाई का समय और बाजार की जानकारी लेना जरूरी है। शुरुआत छोटे क्षेत्र से करना बेहतर हो सकता है।

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