बरसात में पशुओं पर मंडराया बीमारियों का खतरा, इन आसान उपायों से करें बचाव

बरसात में पशुओं पर मंडराया बीमारियों का खतरा, इन आसान उपायों से करें बचाव
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Kisaan Helpline

Agriculture
Aug 12, 2026

Animal Care Tips: बारिश का मौसम किसानों और पशुपालकों के लिए राहत के साथ कुछ चुनौतियां भी लेकर आता है। लगातार बारिश, गीली जमीन और पशुशाला में बढ़ी नमी के कारण पशुओं में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही पशुओं की सेहत के साथ दूध उत्पादन और पशुपालक की आमदनी पर भी असर डाल सकती है। इसलिए बारिश के मौसम में पशुओं की साफ-सफाई, चारे की गुणवत्ता और पशुशाला की स्थिति पर खास ध्यान देना जरूरी है।


 

बरसात में किन बीमारियों का खतरा बढ़ता है?

 

बारिश के दौरान नमी और गंदगी के कारण पशुओं में कई संक्रमण फैल सकते हैं। इनमें गलघोंटू, लंगड़ा बुखार, खुरपका-मुंहपका और दस्त जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।

 

गलघोंटू में तेज बुखार, आंखों में लालिमा और गर्दन या शरीर के आगे वाले हिस्से में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं लंगड़ा बुखार में पशु के पैरों या शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन और चलने में परेशानी हो सकती है।

 

खुरपका-मुंहपका में मुंह, जीभ और खुरों के आसपास छाले दिखाई दे सकते हैं। इसके कारण पशु को चारा खाने और चलने में परेशानी होती है। इसके अलावा गीला या खराब चारा खाने से दस्त और पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।

 

पशुशाला को सूखा रखना सबसे जरूरी

 

*बारिश में पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले उनकी रहने की जगह पर ध्यान दें।

 

*पशुशाला में बारिश का पानी जमा होने दें। फर्श पर लगातार नमी रहने से संक्रमण और दूसरी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

 

*जहां जरूरत हो, वहां सूखी मिट्टी या भूसे की मदद से नमी कम करें। पशुशाला में हवा का आवागमन भी ठीक रखें, ताकि अंदर उमस ज्यादा देर तक रहे।

 

*गोबर और गंदा पानी जमा होने दें और रोजाना पशुशाला की सफाई करें।

 

चारे और पानी की भी रखें खास देखभाल

 

*बारिश में चारा जल्दी खराब हो सकता है। इसलिए पशुओं को साफ और ताजा चारा ही दें।

 

*गीला, सड़ा हुआ या बदबूदार चारा पशुओं को खिलाएं। चारे और पानी के बर्तनों को भी नियमित रूप से साफ करते रहें।

 

*पशुओं को लंबे समय तक जमा पानी या कीचड़ में खड़े रहने से बचाएं।

 

टीकाकरण में करें लापरवाही

 

पशुओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण जरूरी है। बारिश के मौसम से पहले अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक या पशुपालन विभाग से संपर्क करके यह पता करें कि आपके पशुओं के लिए कौन-कौन से टीके जरूरी हैं और उनका सही समय क्या है।

 

गलघोंटू, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण स्थानीय पशु चिकित्सा सलाह के अनुसार कराया जाना चाहिए।

 

पशु में ये लक्षण दिखें तो तुरंत ध्यान दें

 

अगर कोई पशु अचानक खाना कम कर दे, तेज बुखार हो, शरीर के किसी हिस्से में सूजन दिखाई दे, मुंह में छाले पड़ जाएं या लगातार दस्त हो रहे हों, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करें।

 

ऐसी स्थिति में खुद से दवा देने के बजाय पशु चिकित्सक से सलाह लें।

 

अगर किसी पशु में संक्रमण की आशंका हो तो उसे बाकी पशुओं से अलग रखना भी जरूरी है। इससे बीमारी के दूसरे पशुओं तक फैलने का खतरा कम किया जा सकता है।

 

पशुपालक अभी से करें ये काम

 

·        पशुशाला में पानी जमा होने दें।

 

·        फर्श को साफ और सूखा रखें।

 

·        गोबर और गंदा पानी रोज हटाएं।

 

·        साफ और ताजा चारा दें।

 

·        पानी और चारे के बर्तन साफ रखें।

 

·        पशुओं को कीचड़ और जमा पानी में ज्यादा देर खड़ा रहने दें।

 

·        स्थानीय पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार टीकाकरण कराएं।

 

·        बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।

 

·        बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।


पशुपालकों के लिए जरूरी सलाह

 

बरसात में पशुओं की देखभाल का सबसे आसान तरीका है सफाई, सूखापन और समय पर निगरानी।

 

पशुशाला साफ रहे, चारा खराब हो और पशुओं के व्यवहार में होने वाले बदलाव पर नजर रखी जाए तो कई समस्याओं को समय रहते पहचाना जा सकता है।

 

याद रखें, पशु के बीमार होने के बाद इलाज कराने से बेहतर है कि पहले से बचाव की तैयारी की जाए। बारिश के मौसम में थोड़ी अतिरिक्त सावधानी पशु की सेहत के साथ-साथ पशुपालक की आमदनी को भी सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।

 

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