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लहसुन की खेती कैसे करें?
लहसुन की खेती के लिए भुरभुरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी चुनें। स्वस्थ और रोगमुक्त कलियों की बुवाई क्षेत्र के अनुसार रबी मौसम में करें। खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें। समय पर खरपतवार नियंत्रण करें और खाद की मात्रा मिट्टी की जांच व स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार तय करें।
लहसुन की अच्छी फसल के लिए सिर्फ अच्छी कलियां लगाना काफी नहीं है। खेत की मिट्टी भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली हो, बुवाई सही समय पर हो और फसल को जरूरत के हिसाब से पानी मिले, तो गांठों की अच्छी बढ़वार में मदद मिलती है।
लहसुन हमारी रसोई की रोजमर्रा की जरूरत वाली प्रमुख मसाला फसलों में से एक है। इसकी मांग घरों के साथ-साथ होटल, खाद्य प्रसंस्करण और बाजार में भी बनी रहती है। यही वजह है कि किसान इसे रबी सीजन की व्यावसायिक फसल के रूप में भी अपनाते हैं।
लेकिन लहसुन की खेती में अच्छी पैदावार लेने के लिए शुरुआत से ही कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। खासकर मिट्टी का चुनाव, स्वस्थ बीज, सही समय पर बुवाई, सिंचाई और जल निकासी का सीधा असर फसल की गांठों पर पड़ता है।
ICAR की रबी कृषि सलाह में भी लहसुन के लिए भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी रखने तथा स्वस्थ बीज सामग्री के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।
लहसुन की खेती के लिए कैसी मिट्टी चाहिए?
अगर आप लहसुन की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे पहले खेत की मिट्टी पर ध्यान दें।
लहसुन के लिए भुरभुरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। ऐसी मिट्टी में गांठों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और पानी भी ज्यादा देर तक जमा नहीं रहता।
लहसुन की फसल में पानी का लंबे समय तक खेत में खड़ा रहना नुकसान पहुंचा सकता है। इससे गांठों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ सड़न और फफूंद से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
मिट्टी का पीएच लगभग 6 से 7.5 के
आसपास रखना अच्छा माना जाता है। बुवाई से पहले अगर किसान मिट्टी की जांच करा लें, तो खाद और पोषक तत्वों की जरूरत समझना आसान हो जाता है।
खेत तैयार करते समय क्या करें?
बुवाई से पहले खेत से पुराने अवशेष और खरपतवार हटा दें। इसके बाद जरूरत के अनुसार जुताई करके मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा करें।
खेत को समतल रखना भी जरूरी है। इससे सिंचाई के समय पानी पूरे खेत में समान रूप से पहुंचाने में मदद मिलती है।
सड़ी हुई गोबर की खाद या अच्छी तरह तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल खेत की मिट्टी को भुरभुरा बनाने में मदद कर सकता है। रासायनिक खाद की मात्रा मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि सलाह के आधार पर तय करना बेहतर रहेगा।
लहसुन की बुवाई कब करें?
लहसुन की बुवाई का सही समय आपके क्षेत्र के मौसम पर निर्भर करता है। देश के कई मैदानी क्षेत्रों में इसकी खेती रबी मौसम में की जाती है और आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के आसपास बुवाई की जाती है।
ICAR की रबी कृषि सलाह में भी सितंबर-अक्टूबर के दौरान लहसुन जैसी सब्जी फसलों की खेती की जानकारी दी गई है, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय मौसम के अनुसार समय बदल सकता है।
इसलिए किसान भाई सिर्फ कैलेंडर देखकर बुवाई न करें। अपने जिले के तापमान, मिट्टी में नमी और स्थानीय कृषि सलाह को देखकर सही समय तय करें।
लहसुन की बुवाई के लिए कैसी कलियां चुनें?
लहसुन में बीज के रूप में इसकी गांठों की कलियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए स्वस्थ, साफ और रोगमुक्त गांठों से अच्छी कलियां चुनना बहुत जरूरी है।
सड़ी, कमजोर या रोगग्रस्त कलियों को बुवाई के लिए इस्तेमाल न करें। इससे शुरुआत से ही पौध कमजोर हो सकती है।
कलियों को गांठ से अलग करते समय उन्हें ज्यादा चोट न पहुंचाएं। बुवाई करते समय कली का नुकीला हिस्सा ऊपर की ओर रखें।
ICAR की सलाह के अनुसार लहसुन की कलियों को उचित गहराई पर लगाने और उनका बढ़ने वाला हिस्सा ऊपर रखने से अच्छी शुरुआत में मदद मिलती है।
सिंचाई में रखें संतुलन
लहसुन की फसल को मिट्टी में पर्याप्त नमी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खेत में हमेशा पानी भरा रहे।
बुवाई के बाद मिट्टी की नमी देखकर सिंचाई करें। आगे की सिंचाई मौसम, मिट्टी के प्रकार और फसल की अवस्था के अनुसार तय करें।
हल्की मिट्टी में नमी जल्दी कम हो सकती है, जबकि भारी मिट्टी में पानी ज्यादा समय तक बना रह सकता है। इसलिए हर खेत में एक जैसा सिंचाई अंतर रखना सही नहीं होगा।
सबसे जरूरी बात है कि खेत में पानी जमा न होने दें। अच्छी जल निकासी लहसुन की स्वस्थ गांठ तैयार करने में काफी महत्वपूर्ण है।
खरपतवार को शुरुआत में ही रोकें
लहसुन की फसल के शुरुआती दिनों में खरपतवार तेजी से बढ़ सकते हैं। ये पौधों के साथ पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए मुकाबला करते हैं।
इसलिए खेत की नियमित निगरानी करें और समय पर निराई-गुड़ाई करें। शुरुआती अवस्था में खेत को साफ रखने से लहसुन के पौधों को बढ़ने के लिए बेहतर जगह मिलती है।
अगर खेत में बहुत ज्यादा खरपतवार हो गया तो बाद में उसे निकालने में मजदूरी और लागत दोनों बढ़ सकती हैं।
लहसुन में रोग से बचाव कैसे करें?
लहसुन की फसल में ज्यादा नमी और खराब जल निकासी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए खेत में पानी रुकने न दें और शुरुआत से ही स्वस्थ बीज सामग्री का इस्तेमाल करें।
किसान इन बातों का ध्यान रखें:
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रोगमुक्त और स्वस्थ कलियां लगाएं।
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खेत में पानी जमा न होने दें।
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फसल की नियमित निगरानी करें।
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खेत में जरूरत से ज्यादा सिंचाई न करें।
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पौधों पर कोई बीमारी दिखाई दे तो पहले उसकी सही पहचान करें।
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बिना सलाह के दवा का छिड़काव करने से बचें।
ICAR के लहसुन अनुसंधान में भी पोषण प्रबंधन, पानी का बेहतर इस्तेमाल और रोग-कीट प्रबंधन को उत्पादन सुधारने के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल किया गया है।
लहसुन की खुदाई कब करें?
अब बात आती है लहसुन की फसल कब तैयार होती है।
जब पौधों की पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगें और ऊपर से सूखने लगें, तो यह फसल के पकने का संकेत हो सकता है। इस समय खेत की स्थिति और किस्म को देखकर खुदाई की तैयारी करें।
बहुत जल्दी खुदाई करने पर गांठ पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती। वहीं बहुत देर करने पर गांठ की बाहरी परत और उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए खुदाई का समय फसल की अवस्था देखकर तय करें।
खुदाई के बाद लहसुन को ऐसे सुखाएं
लहसुन की खेती में अच्छी फसल लेना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कटाई के बाद सही रखरखाव।
खुदाई के बाद गांठों से मिट्टी साफ करें और उन्हें अच्छी तरह सुखाएं। लहसुन को ऐसी जगह रखें जहां हवा का आवागमन बना रहे और नमी ज्यादा न हो।
सही तरीके से सुखाने और भंडारण करने से लहसुन को जल्दी खराब होने से बचाने में मदद मिलती है। ICAR ने
भी लहसुन के लिए बेहतर भंडारण संरचनाओं और भंडारण तकनीकों पर काम किया है।
लहसुन की खेती में ये 7 गलतियां न करें
1. खेत में पानी खड़ा न रहने दें
लहसुन में अच्छी जल निकासी बहुत जरूरी है।
2. खराब कलियां न लगाएं
हमेशा स्वस्थ और अच्छी गुणवत्ता वाली कलियों का चुनाव करें।
3. बुवाई में बहुत देरी न करें
अपने क्षेत्र के मौसम के अनुसार सही समय पर बुवाई करें।
4. बहुत ज्यादा पानी न दें
मिट्टी में नमी रखें, लेकिन खेत को दलदली न बनने दें।
5. खरपतवार को बढ़ने न दें
शुरुआती अवस्था में निराई-गुड़ाई पर विशेष ध्यान दें।
6. बिना जांच के ज्यादा खाद न डालें
मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के आधार पर खाद की मात्रा तय करें।
7. खुदाई के बाद सीधे भंडारण न करें
लहसुन को अच्छी तरह सुखाने के बाद ही सुरक्षित जगह पर रखें।
क्या लहसुन की खेती से अच्छी कमाई हो सकती है?
लहसुन एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसल है और देश के कई हिस्सों में इसकी बड़े स्तर पर खेती होती है। ICAR के
एक किसान कार्यक्रम में महाराष्ट्र के नंदुरबार क्षेत्र में बेहतर तकनीक के साथ लहसुन की व्यावसायिक खेती से किसानों को अच्छी आय मिलने का उदाहरण भी दर्ज किया गया है। हालांकि यह किसी भी क्षेत्र के लिए तय कमाई का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
किसान की वास्तविक कमाई इन बातों पर निर्भर करती है:
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प्रति एकड़ उत्पादन
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बीज की लागत
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खाद और सिंचाई का खर्च
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मजदूरी
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फसल की गुणवत्ता
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खुदाई और भंडारण का खर्च
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मंडी का भाव
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बिक्री का सही समय
इसलिए लहसुन की खेती शुरू करने से पहले लागत और संभावित बिक्री का पूरा हिसाब जरूर बना लें।
मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों के किसानों के लिए खास बात
मध्य प्रदेश में लहसुन की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। इसके अलावा राजस्थान के बारां, झालावाड़, कोटा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, जोधपुर और प्रतापगढ़ जैसे क्षेत्रों में भी लहसुन महत्वपूर्ण फसल है। ICAR के
अनुसार राजस्थान का हाड़ौती क्षेत्र लहसुन उत्पादन के लिए खास पहचान रखता है।
लेकिन मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश या किसी दूसरे राज्य में खेती करते समय बुवाई की तारीख और सिंचाई का तरीका स्थानीय मौसम के अनुसार तय करना चाहिए।
किसान भाई के लिए सीधी बात
लहसुन की अच्छी फसल की शुरुआत खेत की सही तैयारी से होती है।
अच्छी मिट्टी चुनें, स्वस्थ कलियां लगाएं, समय पर बुवाई करें और फसल में जरूरत के अनुसार नमी बनाए रखें। साथ ही खेत में पानी जमा न होने दें और खरपतवार पर शुरुआत से नजर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लहसुन की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी अच्छी होती है?
भुरभुरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी लहसुन के लिए अच्छी मानी जाती है। मिट्टी में पानी लंबे समय तक जमा नहीं रहना चाहिए।
लहसुन की बुवाई कब करें?
देश के कई मैदानी क्षेत्रों में लहसुन की बुवाई रबी मौसम में अक्टूबर-नवंबर के आसपास की जाती है। हालांकि सही समय क्षेत्र की जलवायु और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार बदल सकता है।
लहसुन का बीज कैसा होना चाहिए?
बुवाई के लिए स्वस्थ, साफ, अच्छी तरह विकसित और रोगमुक्त गांठों की कलियां चुनें। कमजोर या सड़ी कलियों को लगाने से बचें।
लहसुन में कितनी सिंचाई करनी चाहिए?
सिंचाई की जरूरत मिट्टी, मौसम और फसल की अवस्था पर निर्भर करती है। खेत में पर्याप्त नमी रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें।
लहसुन की फसल कब तैयार होती है?
जब पौधों की पत्तियां पीली पड़ने और ऊपर से सूखने लगें, तो फसल खुदाई के लिए तैयार होने के करीब हो सकती है। खुदाई का सही समय किस्म और स्थानीय परिस्थितियों को देखकर तय करें।
लहसुन को खराब होने से कैसे बचाएं?
खुदाई के बाद गांठों को अच्छी तरह सुखाएं और फिर सूखी, हवादार तथा नमी से सुरक्षित जगह पर रखें।
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