Kisaan Helpline
Wheat Sowing 2026-27: रबी सीजन में गेहूं की अच्छी पैदावार लेना चाहते हैं तो बुवाई के समय का खास ध्यान रखें। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIWBR) ने किसानों को 1 से 15 नवंबर के बीच गेहूं और जौ की बुवाई करने की सलाह दी है। संस्थान ने अलग-अलग क्षेत्रों के लिए गेहूं की उन्नत किस्मों के नाम भी बताए हैं। मध्य प्रदेश के किसानों के लिए भी इस सूची में कई किस्में शामिल हैं।
किसान भाइयों, गेहूं की खेती में अच्छी पैदावार पाने के लिए सिर्फ बढ़िया बीज खरीदना काफी नहीं है। बीज की किस्म आपके इलाके के मौसम के अनुकूल हो और बुवाई भी सही समय पर हो, यह उतना ही जरूरी है।
अगर गेहूं की बुवाई में ज्यादा देरी हो जाती है, तो फसल को दाना भरने के समय बढ़ते तापमान का सामना करना पड़ सकता है। इससे दानों का आकार और वजन प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से कृषि वैज्ञानिक किसानों को समय पर खेत तैयार करने और बुवाई पूरी करने की सलाह दे रहे हैं।
गेहूं की बुवाई का सही समय क्या है?
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान की सलाह के अनुसार, रबी सीजन 2026-27 में
गेहूं और जौ की बुवाई के लिए 1 से 15 नवंबर
का समय महत्वपूर्ण है। किसानों को कोशिश करनी चाहिए कि इस दौरान बुवाई पूरी कर लें।
समय पर बुवाई होने से फसल को बढ़ने और दाना तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकता है। लेकिन बुवाई देर से होने पर फसल के पकने के समय तापमान बढ़ने का खतरा रहता है। इससे दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते और पैदावार पर असर पड़ सकता है।
इसलिए अभी से खेत की तैयारी कर लें और प्रमाणित बीज की व्यवस्था कर लें। ध्यान रखें कि कुछ किस्मों की सिफारिश खास तौर पर नवंबर के पहले सप्ताह तक की अगेती बुवाई के लिए है। अपने क्षेत्र के अनुसार बुवाई का समय जरूर तय करें।
उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में गेहूं की ये किस्में बो सकते हैं किसान
गेहूं की हर किस्म हर जगह एक जैसा परिणाम नहीं देती। मिट्टी, मौसम और सिंचाई की सुविधा के अनुसार किस्म का चुनाव करना जरूरी है।
उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के सिंचित खेतों में अगेती बुवाई के लिए ICAR-IIWBR ने इन 9 किस्मों की सलाह दी है:
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DBW
187
·
DBW
303
·
WH
1270
·
DBW
327
·
DBW
332
·
PBW
872
·
DBW
370
·
DBW
371
·
DBW
372
यह सलाह पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के अन्य उपयुक्त इलाकों के किसानों के लिए उपयोगी है। बीज खरीदने से पहले अपने जिले के कृषि विशेषज्ञ से यह जरूर पूछ लें कि बताई गई किस्म आपके खेत के लिए सही है या नहीं।
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए गेहूं की कौन-सी किस्में अच्छी रहेंगी?
मध्य प्रदेश में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहां के किसानों के लिए सही किस्म चुनना काफी जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग जिलों में मिट्टी और मौसम की स्थिति बदलती रहती है।
संस्थान की सलाह में मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के उदयपुर व कोटा क्षेत्र के सिंचित खेतों में अगेती बुवाई के लिए ये 8 किस्में शामिल हैं:
·
DBW
187
·
DBW
303
·
DBW
327
·
DBW
445
·
JW
1399 (MP 1399)
·
PBW
906
·
HD
3463
·
JW
543
मध्य प्रदेश के किसान इन किस्मों की जानकारी लेकर अपने जिले के हिसाब से बीज चुन सकते हैं। ध्यान रखें कि केवल किस्म का नाम देखकर बीज न खरीदें। यह भी पता करें कि वह आपके क्षेत्र के लिए सुझाई गई है या नहीं और आपके खेत में सिंचाई की सुविधा कैसी है।
धान की पराली जलाने के बजाय मशीन से करें गेहूं की बुवाई
धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली कई किसानों के लिए परेशानी बन जाती है। खेत जल्दी खाली करने के चक्कर में कुछ किसान इसे जला देते हैं। लेकिन पराली जलाने से मिट्टी की ऊपरी परत और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।
इसका एक बेहतर तरीका है हैप्पी सीडर और स्मार्ट सीडर जैसी मशीनों का इस्तेमाल। इन मशीनों की मदद से खेत में बची पराली के बीच ही गेहूं की सीधी बुवाई की जा सकती है। इससे पराली जलाने की जरूरत कम होती है और फसल के अवशेष खेत में ही बने रहते हैं।
किसान अपने खेत में पराली की मात्रा और उपलब्ध मशीनों के अनुसार इस तरीके को अपना सकते हैं।
गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए खाद और सिंचाई का रखें ध्यान
कई किसान सोचते हैं कि ज्यादा खाद और पानी देने से फसल अच्छी होगी, लेकिन ऐसा हमेशा सही नहीं होता। जरूरत से ज्यादा खाद डालने और बिना आवश्यकता सिंचाई करने से खेती का खर्च बढ़ सकता है।
इसलिए गेहूं की फसल में इन बातों का ध्यान रखें:
·
बुवाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं।
·
हमेशा प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाला बीज खरीदें।
·
मिट्टी की जांच के आधार पर खाद की मात्रा तय करें।
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खेत की नमी और फसल की जरूरत देखकर सिंचाई करें।
·
खेत में खरपतवार दिखाई दें तो समय पर उनका नियंत्रण करें।
·
फसल में रोग या कीट के लक्षण दिखने पर सही पहचान के बाद ही उपाय करें।
किसान भाइयों, बुवाई की तैयारी अभी से कर लें
गेहूं की बुवाई का समय निकलने के बाद जल्दबाजी में बीज खरीदना या खेत तैयार करना परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए खेत की तैयारी, बीज की व्यवस्था और सिंचाई के साधनों को पहले ही देख लें।
अपने क्षेत्र के लिए सुझाई गई गेहूं की किस्म चुनें और प्रमाणित विक्रेता से ही बीज खरीदें। साथ ही, पराली जलाने के बजाय हैप्पी सीडर या स्मार्ट सीडर जैसी मशीनों से सीधी बुवाई का विकल्प अपनाने पर विचार करें।
अच्छी गेहूं की फसल के लिए सही किस्म, समय पर बुवाई और जरूरत के अनुसार खाद-पानी का प्रबंधन बहुत जरूरी है। खेती की शुरुआत सही तरीके से करेंगे, तो फसल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
1. गेहूं की बुवाई 2026 में कब करनी चाहिए?
ICAR-IIWBR की सलाह के अनुसार, गेहूं और जौ की बुवाई के लिए 1 से 15 नवंबर
का समय महत्वपूर्ण है। हालांकि, किस्म और क्षेत्र के अनुसार सही समय अलग हो सकता है।
2. मध्य प्रदेश में गेहूं की कौन-सी किस्में सुझाई गई हैं?
अगेती बुवाई के लिए DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 445, JW
1399, PBW 906, HD 3463 और JW 543 किस्मों
की सलाह दी गई है।
3. पंजाब और हरियाणा में गेहूं की कौन-सी किस्में बो सकते हैं?
उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के सिंचित खेतों में DBW 187, DBW 303, WH 1270, DBW 327, DBW
332, PBW 872, DBW 370, DBW 371 और DBW 372 किस्में
सुझाई गई हैं।
4. गेहूं की बुवाई में देरी होने से क्या नुकसान हो सकता है?
देर से बुवाई करने पर फसल को दाना भरने के समय अधिक तापमान का सामना करना पड़ सकता है। इससे दानों का आकार और वजन प्रभावित हो सकता है।
5. क्या पराली के बीच गेहूं की बुवाई की जा सकती है?
हां, हैप्पी सीडर और स्मार्ट सीडर जैसी मशीनों की मदद से खेत में बची पराली के बीच गेहूं की सीधी बुवाई की जा सकती है।
6. गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए किन बातों का ध्यान रखें?
सही किस्म का चुनाव, प्रमाणित बीज, समय पर बुवाई, मिट्टी की जांच और जरूरत के अनुसार खाद व सिंचाई का प्रबंधन करना जरूरी है।
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