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रबी सीजन में गेहूं की बुवाई करने जा रहे किसानों के लिए जरूरी खबर है। ICAR-IIWBR ने अलग-अलग कृषि क्षेत्रों के लिए गेहूं की उन्नत किस्मों की सलाह जारी की है। मध्य प्रदेश के सिंचित खेतों में अगेती बुवाई के लिए DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 445 और JW 1399 समेत कई किस्में सुझाई गई हैं। जानिए आपके क्षेत्र के लिए कौन-सी किस्म सही रह सकती है और बुवाई से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
गेहूं की खेती का समय नजदीक आते ही किसानों ने खेत तैयार करने और बीज खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। इस समय सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि अच्छी पैदावार के लिए कौन-सा गेहूं का बीज बोया जाए और बुवाई कब की जाए।
किसान भाइयों, गेहूं की हर किस्म हर इलाके के लिए सही नहीं होती। किसी क्षेत्र में अच्छी पैदावार देने वाली किस्म दूसरे क्षेत्र की मिट्टी और मौसम में वैसा परिणाम दे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए बीज खरीदने से पहले अपने इलाके के लिए सुझाई गई किस्म की जानकारी जरूर लें।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIWBR), करनाल ने रबी सीजन 2026-27 के
लिए किसानों को कृषि सलाह दी है। इसमें नवंबर के पहले पखवाड़े यानी 1 से 15 नवंबर
के दौरान बुवाई की तैयारी करने और क्षेत्र के अनुसार गेहूं की किस्म चुनने की सलाह दी गई है।
गेहूं की बुवाई से पहले इन 5 बातों का रखें ध्यान
अच्छी फसल पाने के लिए सिर्फ उन्नत बीज खरीदना काफी नहीं है। बुवाई से पहले खेत की तैयारी और बीज की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
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हमेशा प्रमाणित और भरोसेमंद जगह से गेहूं का बीज खरीदें।
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अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार सुझाई गई किस्म ही चुनें।
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बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराएं।
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जरूरत के अनुसार खाद और पानी का इस्तेमाल करें।
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बुवाई में अनावश्यक देरी न करें और फसल में खरपतवार व रोगों पर नजर रखें।
दूसरे क्षेत्र की किस्म बिना जानकारी के लगाने से फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए बीज खरीदते समय अपने जिले की कृषि सलाह को प्राथमिकता दें।
पराली जलाने की जरूरत नहीं, मशीन से करें गेहूं की सीधी बुवाई
धान की कटाई के बाद खेत में पराली बच जाती है। कई किसान अगली फसल की तैयारी के लिए इसे जला देते हैं, लेकिन ऐसा करने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।
किसानों के पास इसका एक बेहतर विकल्प भी है। हैप्पी सीडर और स्मार्ट सीडर जैसी मशीनों की मदद से खेत में बची पराली के बीच गेहूं की सीधी बुवाई की जा सकती है।
इस तरीके से पराली जलाने की जरूरत कम होती है और फसल अवशेषों का खेत में ही उपयोग किया जा सकता है। किसान अपने खेत की स्थिति के अनुसार इन मशीनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में गेहूं की कौन-सी किस्में बोएं?
उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्से और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
ICAR-IIWBR की सलाह के अनुसार, इस क्षेत्र के सिंचित खेतों में नवंबर के पहले सप्ताह तक अगेती बुवाई के लिए किसान इन किस्मों पर ध्यान दे सकते हैं:
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DBW
187
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DBW
303
·
WPC
1270
·
DBW
327
·
DBW
332
·
PWD
872
·
DBW
370
·
DBW
371
·
DBW
372
किसान अपने खेत की स्थिति और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार इनमें से उपयुक्त किस्म का चुनाव करें।
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए गेहूं की ये किस्में सुझाई गईं
मध्य प्रदेश में गेहूं की खेती बड़े क्षेत्र में की जाती है। यहां मिट्टी, तापमान और सिंचाई की सुविधा जिले के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किस्म चुनते समय स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखना जरूरी है।
ICAR-IIWBR की सलाह में मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के उदयपुर व कोटा क्षेत्र के सिंचित खेतों में नवंबर के पहले सप्ताह तक अगेती बुवाई के लिए ये किस्में बताई गई हैं:
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DBW
187
·
DBW
303
·
DBW
327
·
DBW
445
·
JW
1399 (MP 1399)
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PWD
906
·
HD
3463
·
JW
543
मध्य प्रदेश के किसान इन किस्मों की जानकारी लेकर अपने जिले के लिए उपयुक्त बीज चुन सकते हैं। बीज खरीदने से पहले कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से इसकी क्षेत्रीय उपयुक्तता जरूर पक्की कर लें।
गेहूं की फसल में खाद और सिंचाई का सही प्रबंधन करें
अच्छी किस्म की बुवाई करने के बाद भी अगर खाद और पानी का सही प्रबंधन नहीं किया जाए, तो फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
गेहूं में जरूरत से ज्यादा खाद डालने या बिना आवश्यकता सिंचाई करने से खेती का खर्च बढ़ता है। इसलिए किसान इन बातों का ध्यान रखें:
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मिट्टी की जांच के आधार पर खाद की मात्रा तय करें।
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नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करें।
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खेत की नमी और फसल की अवस्था देखकर सिंचाई करें।
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खरपतवार दिखाई देने पर समय पर नियंत्रण करें।
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फसल में बीमारी या कीट के लक्षण दिखें तो सही पहचान के बाद उपाय करें।
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सही समय पर सिंचाई और संतुलित खाद प्रबंधन से खेती की लागत संभालने में मदद मिल सकती है।
गेहूं की बुवाई में देरी करने से क्यों बचना चाहिए?
गेहूं की बुवाई का समय फसल की बढ़वार और पैदावार दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। अगर बुवाई में ज्यादा देरी हो जाती है, तो फसल को दाना बनने और पकने के समय अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
इससे दानों का विकास प्रभावित होने और पैदावार घटने का खतरा रहता है। इसलिए किसान अपने क्षेत्र के अनुसार तय बुवाई समय का ध्यान रखें।
ध्यान दें कि नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय यहां बताई गई अगेती बुवाई की किस्मों के लिए है। सामान्य बुवाई का समय किस्म और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकता है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
इस रबी सीजन में गेहूं की बुवाई करने से पहले अपने इलाके के लिए सही किस्म का चुनाव जरूर करें। मध्य प्रदेश के किसान DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 445 और JW 1399 जैसी सुझाई गई किस्मों की जानकारी ले सकते हैं।
इसके साथ प्रमाणित बीज खरीदें, मिट्टी की जांच कराएं और खेत में खाद व पानी का संतुलित इस्तेमाल करें। पराली जलाने के बजाय हैप्पी सीडर या स्मार्ट सीडर जैसी मशीनों से सीधी बुवाई का विकल्प भी अपनाएं।
याद रखें, अच्छी गेहूं की पैदावार की शुरुआत सही बीज, सही समय और खेत की अच्छी तैयारी से होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. ICAR ने गेहूं की बुवाई 2026-27 के लिए क्या सलाह दी है?
ICAR-IIWBR ने किसानों को अपने क्षेत्र के अनुसार गेहूं की किस्म चुनने, प्रमाणित बीज खरीदने और सही समय पर बुवाई करने की सलाह दी है।
2. मध्य प्रदेश में गेहूं की कौन-सी किस्में बोने की सलाह दी गई है?
अगेती बुवाई के लिए DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 445, JW
1399 (MP 1399), PWD 906, HD 3463 और JW 543 किस्में
बताई गई हैं। ये सिंचित खेतों में नवंबर के पहले सप्ताह तक की बुवाई के लिए सुझाई गई हैं।
3. पंजाब और हरियाणा में गेहूं की कौन-सी किस्में बो सकते हैं?
उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के सिंचित खेतों में अगेती बुवाई के लिए DBW 187, DBW 303, WPC 1270, DBW 327,
DBW 332, PWD 872, DBW 370, DBW 371 और DBW 372 किस्में
बताई गई हैं।
4. गेहूं की अगेती बुवाई का सही समय क्या है?
दी गई कृषि सलाह में अगेती बुवाई के लिए नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय बताया गया है। सामान्य बुवाई का समय क्षेत्र और किस्म के अनुसार अलग हो सकता है।
5. क्या पराली हटाए बिना गेहूं की बुवाई की जा सकती है?
हां, हैप्पी सीडर और स्मार्ट सीडर जैसी मशीनों की मदद से खेत में बची पराली के बीच गेहूं की सीधी बुवाई की जा सकती है। इससे पराली जलाने की जरूरत कम होती है।
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