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धान की खेती करने वाले किसानों के लिए इस समय एक गंभीर खतरा तेजी से बढ़ रहा है। कई राज्यों में धान की फसल में बोनापन (ड्वार्फिंग) बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। इस बीमारी के कारण पौधे सामान्य ऊंचाई तक नहीं बढ़ पाते, बालियां छोटी रह जाती हैं या बनती ही नहीं हैं। यदि समय रहते इसकी पहचान और नियंत्रण नहीं किया गया, तो उत्पादन में 80 से 100 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका रहती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कई किसान इस बीमारी को जिंक या नाइट्रोजन की कमी समझ लेते हैं और गलत दवाओं या खाद का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। इससे बीमारी बढ़ती जाती है और नुकसान भी ज्यादा होता है।
क्या है धान की बोनापन बीमारी?
धान में यह समस्या साउदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस के कारण होती है। यह वायरस सीधे बीज या मिट्टी से नहीं फैलता, बल्कि एक छोटे कीट के जरिए स्वस्थ पौधों तक पहुंचता है। यह बीमारी खासकर अधिक नमी, लगातार बारिश और खेत में कीटों की संख्या बढ़ने पर तेजी से फैलती है।
बीमारी की पहचान कैसे करें?
रोपाई के लगभग 15 से 30 दिन बाद इसके शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगते हैं। अगर आपके खेत में कुछ पौधे बाकी पौधों की तुलना में छोटे रह गए हैं, तो उन्हें ध्यान से देखें।
बीमार पौधों में आमतौर पर ये लक्षण दिखाई देते हैं-
● पौधे सामान्य से काफी छोटे रह जाते हैं।
● पौधे झाड़ी जैसे दिखाई देते हैं।
● पत्तियां गहरे हरे रंग की, कड़ी और मुड़ी हुई हो जाती हैं।
● बाद में पत्तियों और तनों पर भूरे या काले रंग की धारियां दिखाई देने लगती हैं।
● जड़ें कमजोर या गुच्छेदार दिखाई देती हैं।
● बालियां नहीं निकलतीं या बहुत छोटी और खाली रहती हैं।
यदि खेत में अलग-अलग जगह ऐसे पौधे दिखाई दें, तो इसे पोषक तत्वों की कमी समझकर नजरअंदाज न करें।
यह बीमारी कैसे फैलती है?
इस वायरस को फैलाने का मुख्य कारण सफेद पीठ वाला फुदका (व्हाइट बैक्ड प्लांटहॉपर) है। जब यह कीट संक्रमित पौधे का रस चूसता है, तो वायरस उसके शरीर में पहुंच जाता है। इसके बाद वही कीट स्वस्थ पौधों पर बैठकर उन्हें भी संक्रमित कर देता है। तेज हवा के साथ यह कीट एक खेत से दूसरे खेत तक आसानी से पहुंच जाता है। इसलिए आसपास के कई खेत भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
किन परिस्थितियों में बढ़ता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार नीचे दी गई परिस्थितियां इस बीमारी को तेजी से बढ़ाती हैं—
● खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहना।
● जरूरत से ज्यादा यूरिया का उपयोग।
● खेत में लगातार अधिक नमी बने रहना।
● खेत की मेड़ों और आसपास खरपतवार का अधिक होना।
फसल को कैसे बचाएं?
यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं, तो इस बीमारी का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को ये उपाय अपनाने की सलाह देते हैं—
● खेत में नियमित रूप से सफेद पीठ वाले फुदके की निगरानी करें।
● यदि एक पौधे पर 2 से 3 फुदके दिखाई दें, तो तुरंत नियंत्रण के उपाय करें।
● कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ट्रिफ्लूमेजोपिरिम 10% SC या डिनोटेफ्यूरॉन 20% SG जैसे अनुशंसित कीटनाशकों का सही मात्रा में छिड़काव करें।
● आवश्यकता के अनुसार ही यूरिया का उपयोग करें और नीम कोटेड यूरिया को प्राथमिकता दें।
● खेत में लगातार पानी जमा न रहने दें। बीच-बीच में पानी निकालकर खेत को हल्का सूखने दें।
● संक्रमित और छोटे पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट कर दें ताकि बीमारी आगे न फैले।
● खेत और मेड़ों को खरपतवार मुक्त रखें।
● हमेशा प्रमाणित और स्वस्थ बीज का ही चयन करें।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
धान की बोनापन बीमारी शुरुआती दिनों में साधारण पोषक तत्वों की कमी जैसी दिखाई देती है। इसलिए बिना जांच के खाद या दवा का इस्तेमाल करने के बजाय पहले पौधों की अच्छी तरह जांच करें। यदि खेत में असामान्य रूप से छोटे पौधे दिखाई दें, तो तुरंत अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें। समय पर सही पहचान और उचित प्रबंधन से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
FAQs
धान में बोनापन बीमारी किस कारण होती है?
यह बीमारी साउदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस के कारण होती है।
यह वायरस कैसे फैलता है?
यह वायरस सफेद पीठ वाले फुदके (व्हाइट बैक्ड प्लांटहॉपर) के माध्यम से एक पौधे से दूसरे पौधे तक फैलता है।
बोनापन बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
पौधे छोटे रह जाना, पत्तियों का कड़ा और गहरा हरा होना, जड़ों का कमजोर होना और बालियां न निकलना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
धान की फसल को इस बीमारी से कैसे बचाएं?
कीटों की नियमित निगरानी करें, खेत में पानी जमा न होने दें, अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग करें, संक्रमित पौधों को हटाएं और खरपतवार नियंत्रण करें।
क्या यह बीमारी बीज से फैलती है?
नहीं। यह बीमारी सीधे बीज या मिट्टी से नहीं फैलती, बल्कि संक्रमित फुदके के माध्यम से फैलती है।
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