पूसा बासमती 1882: कम पानी में भी होगी बंपर पैदावार, सूखे से परेशान किसानों के लिए बनी नई उम्मीद

पूसा बासमती 1882: कम पानी में भी होगी बंपर पैदावार, सूखे से परेशान किसानों के लिए बनी नई उम्मीद
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Kisaan Helpline

Agriculture
Jun 30, 2026

देश के कई राज्यों में मानसून की धीमी रफ्तार और लगातार घटते भूजल स्तर ने धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर बासमती धान उत्पादक क्षेत्रों में पानी की कमी खेती के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे समय में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा द्वारा विकसित पूसा बासमती 1882 किसानों के लिए राहत की खबर लेकर आई है। यह नई बासमती धान की किस्म कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने में सक्षम है और सूखे की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पूसा बासमती 1882 भारत की पहली सूखा सहनशील (Drought Tolerant) बासमती धान की किस्म है। इसे इस तरह विकसित किया गया है कि पानी की कमी होने पर भी फसल की बढ़वार और उत्पादन पर कम असर पड़े। बदलते मौसम और जल संकट को देखते हुए यह किस्म किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प मानी जा रही है।

इन राज्यों के किसान कर सकते हैं खेती

इस किस्म की खेती मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बासमती उत्पादक क्षेत्रों के लिए अनुशंसित की गई है। इन राज्यों में जहां सिंचाई के लिए पानी की कमी रहती है, वहां यह किस्म अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है।

135 दिनों में तैयार, मिलेगी बेहतर उपज

पूसा बासमती 1882 खरीफ सीजन की किस्म है, जो लगभग 135 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।

● औसत उपज: 46.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
● अनुकूल परिस्थितियों में उत्पादन: 59.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक

कम समय में तैयार होने के कारण किसान अगली फसल की बुवाई भी समय पर कर सकते हैं।

सूखे में भी मजबूत रहती है फसल

इस किस्म में QDTY 1.1 नामक विशेष जीन शामिल किया गया है, जो पानी की कमी के दौरान पौधे को मजबूती देता है। यह जीन खासतौर पर उस समय सक्रिय होता है, जब धान में बालियां बनने लगती हैं और पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इससे सूखे की स्थिति में भी फसल का उत्पादन बनाए रखने में मदद मिलती है।

रिसर्च में मिले बेहतर परिणाम

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए परीक्षणों में पूसा बासमती 1882 ने पुराने पूसा बासमती-1 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

● सूखे की स्थिति में लगभग दो गुना अधिक उत्पादन दर्ज किया गया।
● सामान्य सिंचाई वाली परिस्थितियों में करीब 10 प्रतिशत अधिक पैदावार प्राप्त हुई।

किसानों के लिए क्यों है खास?

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और पानी की बढ़ती समस्या को देखते हुए पूसा बासमती 1882 किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। यह किस्म कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ किसानों की लागत कम करने और मुनाफा बढ़ाने में मदद कर सकती है। खरीफ सीजन में बासमती धान की खेती करने वाले किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर इस उन्नत किस्म को अपना सकते हैं।

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