मानसून में एक छोटी गलती... और खत्म हो सकती है आपकी केंचुआ खाद यूनिट! जानिए कैसे बचाएं लाखों की मेहनत

मानसून में एक छोटी गलती... और खत्म हो सकती है आपकी केंचुआ खाद यूनिट! जानिए कैसे बचाएं लाखों की मेहनत
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Kisaan Helpline

Agriculture
Jul 09, 2026

बारिश में लापरवाही पड़ सकती है भारी, वर्मीकंपोस्ट बनाने वाले किसान अभी हो जाएं सतर्क

नई दिल्ली। मानसून का मौसम खेती के लिए जितना फायदेमंद माना जाता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण समय वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) तैयार करने वाले किसानों के लिए भी होता है। बारिश के दौरान की गई एक छोटी सी गलती आपकी पूरी वर्मीकंपोस्ट यूनिट को नुकसान पहुंचा सकती है। पानी भरने, अधिक नमी, खराब वेंटिलेशन और गलत तरीके से गोबर डालने जैसी समस्याएं केंचुओं की मौत का कारण बन सकती हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान वर्मीकंपोस्ट यूनिट की नियमित निगरानी और सही प्रबंधन बेहद जरूरी है। यदि समय रहते सावधानी बरती जाए, तो बारिश के मौसम में भी केंचुआ खाद का उत्पादन बिना किसी रुकावट के जारी रखा जा सकता है।

सबसे बड़ा खतरा है जलभराव

बरसात में वर्मीकंपोस्ट बेड में पानी जमा होना सबसे बड़ी समस्या बन जाता है। लगातार पानी भरने से बेड के अंदर ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे केंचुए जीवित नहीं रह पाते। यदि आपकी यूनिट खुले स्थान पर है, तो बेड को मजबूत तिरपाल या प्लास्टिक शीट से ढकें और यह सुनिश्चित करें कि आसपास उचित जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था हो, ताकि बारिश का पानी तुरंत बाहर निकल सके।

नमी रहे नियंत्रित, तभी रहेगा उत्पादन बेहतर

केंचुओं के स्वस्थ विकास के लिए बेड में लगभग 60 से 70 प्रतिशत नमी उपयुक्त मानी जाती है। इससे अधिक नमी होने पर केंचुए बेड छोड़कर बाहर निकलने लगते हैं या फिर उनकी मृत्यु हो सकती है। इसलिए मानसून के दौरान समय-समय पर नमी की जांच करना और अतिरिक्त पानी निकालना बेहद जरूरी है।

एयरटाइट पैकिंग करने की गलती न करें

बारिश से बचाने के लिए कई किसान पूरे बेड को प्लास्टिक से पूरी तरह बंद कर देते हैं। यह तरीका नुकसानदायक साबित हो सकता है। केंचुओं को जीवित रहने के लिए पर्याप्त हवा की जरूरत होती है। इसलिए तिरपाल या शेड इस प्रकार लगाएं कि बारिश का पानी अंदर न जाए, लेकिन हवा का आवागमन लगातार बना रहे।

गोबर की गुणवत्ता पर भी रखें विशेष ध्यान

मानसून में ताजा, अत्यधिक गीला या पूरी तरह सड़ा हुआ गोबर सीधे बेड में डालना सही नहीं माना जाता। इससे बेड का तापमान तेजी से बढ़ सकता है और उमस के कारण केंचुओं पर प्रतिकूल असर पड़ता है। हमेशा अच्छी तरह तैयार और संतुलित जैविक सामग्री का ही उपयोग करें, ताकि केंचुओं के लिए अनुकूल वातावरण बना रहे।

किसानों के लिए उपयोगी सुझाव

● वर्मीकंपोस्ट बेड को हमेशा तिरपाल या शेड से सुरक्षित रखें।
● बेड के आसपास मजबूत ड्रेनेज सिस्टम बनाएं।
● नमी 60–70 प्रतिशत के बीच बनाए रखें।
● बेड को पूरी तरह बंद न करें, पर्याप्त वेंटिलेशन रखें।
● केवल अच्छी गुणवत्ता वाला गोबर और जैविक पदार्थ ही उपयोग करें।
● बारिश के मौसम में नियमित रूप से बेड की निगरानी करें।

यदि आप वर्मीकंपोस्ट का व्यवसाय कर रहे हैं या अपने खेत के लिए केंचुआ खाद तैयार करते हैं, तो मानसून के दौरान थोड़ी अतिरिक्त सावधानी आपकी मेहनत, लागत और उत्पादन—तीनों को सुरक्षित रख सकती है। सही प्रबंधन अपनाकर आप न केवल नुकसान से बच सकते हैं, बल्कि पूरे बारिश के मौसम में उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार कर बेहतर आय भी प्राप्त कर सकते हैं।

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