Milk Production in Summer: अक्सर पशुपालकों का मानना होता है कि गर्मियों के मौसम में गाय और भैंस का दूध उत्पादन कम हो जाता है। तेज गर्मी, लू और पानी-चारे की कमी के कारण पशु तनाव में आ जाते हैं, जिससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती है। लेकिन डेयरी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पशुपालन वैज्ञानिक और सही प्रबंधन के साथ किया जाए, तो गर्मियों में भी दूध उत्पादन को बनाए रखा जा सकता है और मुनाफा बढ़ाया जा सकता है।
भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और डेयरी सेक्टर लाखों किसानों की आय का मुख्य स्रोत बना हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि किसान आधुनिक तकनीक, संतुलित आहार और सही देखभाल के जरिए अपने पशुओं की सेहत का ध्यान रखें, ताकि हर मौसम में अच्छा उत्पादन मिल सके।
आज कई किसान पारंपरिक चारे के साथ-साथ संतुलित और बिना यूरिया वाले कम्पाउन्डेड कैटल फीड का उपयोग भी कर रहे हैं, जिससे पशुओं को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और दूध उत्पादन स्थिर बना रहता है।
गर्मियों के मौसम में तापमान बढ़ने से पशुओं के शरीर पर सीधा असर पड़ता है। जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो जाता है, तो पशु “हीट स्ट्रेस” का शिकार हो जाते हैं। इससे कई समस्याएं पैदा होती हैं:
पशु कम चारा खाते हैं
पानी की जरूरत बढ़ जाती है
शरीर की ऊर्जा तापमान नियंत्रित करने में खर्च होती है
दूध बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है
पशु कमजोर और बीमार होने लगते हैं
इन कारणों से दूध उत्पादन में 10 से 30 प्रतिशत तक कमी देखी जा सकती है। लेकिन सही प्रबंधन, संतुलित आहार और पौष्टिक कैटल फीड के उपयोग से इस नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
गर्मी में पशुओं के रहने की जगह सबसे महत्वपूर्ण होती है।
पशुशाला में अच्छी हवा आने-जाने की व्यवस्था होनी चाहिए
छत पर घास, टीन या थर्मल शीट लगाकर गर्मी कम करें
दिन में 2-3 बार पानी का छिड़काव करें
इससे पशुओं का शरीर ठंडा रहेगा और वे सामान्य रूप से दूध देंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पशु आरामदायक वातावरण में रहें और उन्हें संतुलित पोषण वाला कम्पाउन्डेड कैटल फीड दिया जाए, तो उनका शरीर मजबूत रहता है और वे हीट स्ट्रेस का बेहतर तरीके से सामना कर पाते हैं।
गर्मी में पशुओं को ज्यादा पानी की जरूरत होती है।
एक गाय को रोजाना 45-60 लीटर पानी चाहिए
भैंस को 60-80 लीटर तक पानी की जरूरत होती है
पानी साफ और ठंडा होना चाहिए
दिन में कई बार पानी बदलें
पानी की कमी से दूध उत्पादन तुरंत कम हो जाता है।
इसके साथ-साथ यदि पशु को पौष्टिक और संतुलित पशु आहार दिया जाए, जिसमें ऊर्जा, प्रोटीन और मिनरल पर्याप्त मात्रा में हों, तो पशु का मेटाबोलिज्म बेहतर रहता है और दूध उत्पादन प्रभावित नहीं होता।
गर्मी में पशु कम चारा खाते हैं, इसलिए उन्हें पौष्टिक आहार देना जरूरी है।
हरा चारा जैसे नेपियर घास, बरसीम या ज्वार दें
सूखा चारा और दाना संतुलित मात्रा में दें
मिनरल मिक्सचर और नमक जरूर दें
सुबह और शाम ठंडे समय पर चारा खिलाएं
आजकल कई डेयरी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पारंपरिक चारे के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाला कम्पाउन्डेड कैटल फीड, जिसमें यूरिया न हो और सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद हों, उसका उपयोग करने से दूध उत्पादन और पशु स्वास्थ्य दोनों बेहतर रहते हैं।
ऐसे संतुलित पशु आहार पशु की पाचन क्षमता को बेहतर बनाते हैं, शरीर को आवश्यक ऊर्जा देते हैं और दूध उत्पादन को बनाए रखने में मदद करते हैं।
भैंस और गाय को ठंडा रखने के लिए नहलाना बहुत फायदेमंद होता है।
दिन में 1-2 बार पानी से नहलाएं
भैंस को तालाब या पानी में बैठने दें
इससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है
नहलाने से पशु आराम महसूस करते हैं और दूध उत्पादन बढ़ता है
यदि नहलाने के साथ-साथ पशु को पौष्टिक और संतुलित पशु आहार दिया जाए, तो पशु का शरीर मजबूत रहता है और दूध उत्पादन में गिरावट नहीं आती।
सीधी धूप पशुओं के लिए नुकसानदायक होती है।
पशुओं को छायादार जगह पर रखें
पेड़ के नीचे या शेड में बांधें
दोपहर के समय बाहर न छोड़ें
इससे हीट स्ट्रेस कम होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पशुओं को छाया, पानी और संतुलित कम्पाउन्डेड फीड का सही संयोजन दिया जाए, तो गर्मियों में भी दूध उत्पादन सामान्य या बेहतर बना रह सकता है।
गर्मी में बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है।
पशुओं की नियमित जांच कराएं
समय पर टीकाकरण करें
किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
स्वस्थ पशु ही अच्छा दूध उत्पादन देते हैं।
इसके अलावा, पशु को नियमित रूप से पौष्टिक और बिना यूरिया वाला संतुलित पशु आहार देने से उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वह बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।
डेयरी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसान वैज्ञानिक तरीके अपनाएं और पशुओं को संतुलित आहार, साफ पानी और सही देखभाल दें, तो प्रति पशु दूध उत्पादन में 20-30 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।
आज कई सफल डेयरी किसान हरे चारे के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले कम्पाउन्डेड कैटल फीड का उपयोग करके बेहतर परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। इससे पशु की सेहत बेहतर रहती है, दूध की मात्रा बढ़ती है और किसानों की आय में सुधार होता है।
इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी और डेयरी व्यवसाय ज्यादा लाभदायक बनेगा।
भारत पिछले कई वर्षों से दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर बना हुआ है। यह सफलता किसानों की मेहनत और डेयरी सेक्टर के विकास का परिणाम है।
लेकिन अभी भी प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि किसान पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों के साथ संतुलित पशु आहार का उपयोग करें।
पशुओं को ठंडा और साफ वातावरण दें
संतुलित और पौष्टिक आहार दें
साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखें
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
पशुओं को तनाव से बचाएं
उच्च गुणवत्ता वाला संतुलित कम्पाउन्डेड कैटल फीड उपयोग करें
इन उपायों को अपनाकर किसान गर्मियों में भी दूध उत्पादन बनाए रख सकते हैं और डेयरी से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
गर्मी का मौसम डेयरी किसानों के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन सही प्रबंधन, संतुलित पोषण और वैज्ञानिक तरीकों से इस चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। यदि पशुओं की सही देखभाल की जाए, तो दूध उत्पादन में कमी नहीं होगी, बल्कि बढ़ोतरी भी हो सकती है।
डेयरी व्यवसाय आज किसानों के लिए स्थायी और भरोसेमंद आय का स्रोत बन चुका है। इसलिए जरूरी है कि किसान आधुनिक तकनीकों, संतुलित पशु आहार और विशेषज्ञों की सलाह को अपनाएं, ताकि हर मौसम में बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा मिल सके।
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