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Rice ( चावल )

धान का परिचय (Introduction of Paddy)

धान या चावल (Paddy) भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। जो कुल फसले क्षेत्र का एक चौथाई क्षेत्र कवर करता है। धान या चावल (Paddy)लगभग आधी भारतीय आबादी का भोजन है। बल्कि यह दुनिया की मानविय आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए विशेष रूप से एशिया में मुख्य रूप से खाया जाता है। गन्ना और मक्का के बाद यह तीसरा सबसे अधिक विश्वव्यापी उत्पादन के साथ कृषि खाद्य फसल है। धान (Paddy) सबसे पुरानी ज्ञात फसलों में से एक है यह करीब 5000 साल पहले चीन में सबसे बड़े रूप में उगाई गई। भारत में धान (Paddy) की 3000 ई.सा. में खोज हुई थी। यह खोज किसी वैज्ञानिक ने नही बल्कि किसानों और मूल लोगों ने की थी।

धान की खेती करने वाले देश (Paddy cultivating countries)

धान की खेती करने वाले देश व प्रदेश- धान गर्मतर जलवायु वाले प्रदेशों में सफलतापूर्वक उगाया जाता है। विश्व का अधिकांश धान दक्षिण पूर्वी एशिया मे उत्पन्न होता है। चीन, जापान, भारत, इन्डोचाइना, कोरिया, थाइलैण्ड, पाकिस्तान तथा श्रीलंका धान पैदा करने वाले प्रमुख देश हैं। इटली, मिश्र, तथा स्पेन में भी धान की खेती विस्तृत क्षेत्र में होती है। भारत में धान की खेती लगभग सभी राज्यों में की जाती है किन्तु प्रमुख उत्पादक प्रदेशों में आन्ध्र प्रदेश, असम, बिहार, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश है।

धान की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु (Climate Suitable for Paddy Cultivation)

किसी भी खेती के लिए जलवायु का उसकी पैदावार में मुख्य योगदान होता है, और जब बात धान की हो तो इस खेती के लिए समशीतोष्ण जलवायु का होना आवश्यक है। इसके पौधों को अपने जीवन कल में औसतन 20 डिग्री सेंटीग्रेट से 37 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान की आवश्यकता होती है। इस औसत तापमान के अंदर धान की किस्म की गुणवता के आधार पर किसान अच्छी पैदावार ले सकते है। ।

धान के लिए भूमि की तैयारी (Land Preparation for paddy) 

धान के पौधों के एक समान विकास के लिए खेत की अच्छी तैयारी आवश्यक होती है। जब पौधों को एक समान पोषण और पानी मिलता है, तो उनका विकास भी एक समान होता है। पिछली फसल के काटने के तुरंत बाद चयनित भूमि की उचित प्रकार से जुताई अवश्यक है। जिसे चयनित भूमि में उचित हवा और आवश्यक पोषण बना रहें। यदि भूमि पर पहले कोई फसल नही थी तो भूमि की खरपतवार की सफाई करे और फिर उसकी जुताई करे। सभी खरपतवार, खासतौर पर धान को प्रभावित करने वाले खरपतवार को तो जड़ से नष्ट कर दे। खरपतवार के अवशेषों को जलाने की बजाय अच्छी तरह से मिट्टी में मिला दे ताकि भूमि का कार्बनिक पोषण बना रहें। खेत को 4 से 5 बार कल्टीवेटर और पट्टे से जोते ताकि खेत समतल और हवा युक्त हो जाए। और उसके बाद ही फसल को लगाने का काम करें।

धान के लिए खाद (उर्वरक) मात्रा और उपयोग (Fertilizer quantity and usage for paddy)  

धान की अच्छी पैदावार के लिए भूमि में पोषक तत्वों का होना आवश्यक है। भूमि के पोषक तत्वों की पूर्ति उर्वरक (खाद) द्वारा होती है। इसके लिए आप को चाहिए की आप अपने खेत की मिट्टी की जाँच कराए इसे आप को उचित उर्वरक मात्रा भूमि को देने का पता चलता है। फसल चक्र सिधान्तो के अनुसार आप को धान की फसल के लिए इस प्रकार कर सकते है आखरी जुताई के समय 100 से 150 क्विंटल गोबर की गली खाद मिलाए, उर्वरक में 120 से 130 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम सुपरफास्फेट और 60 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग कर सकते है। या फिर आप नाइट्रोजन की आधी मात्रा का प्रयोग किसान सिंचाई के समय करना चाहते है तो कर सकते है।

धान की किस्में व बीज की मात्रा उपचार (The Quantity and Treatment of Paddy Varieties and Seeds)

हम किसान भाइयों के लिए सामान्य धान किस्मों और संकर धान किस्मों का वर्णन करेगे जिनकी खेत की तैयारी लगभग एक समान होती है संकर किस्मों को उर्वरक की आवश्यकता थोड़ी ज्यादा होती है तो आप उनमे सामान्य धान के अपेक्षा 5 से 10 किलोग्राम तक बढ़ा सकते है। पानी की मात्र फसल की आवश्यकता अनुसार रखे ताकि फसल को नुकसान ना हो। किसानों को धान की फसल के लिए अपने क्षेत्र विशेष के लिए उन्नत किस्मों का प्रयोग करना चाहिए।

संकर धान की किस्में (Varieties of Hybrid Paddy) 

वैज्ञानिक द्वारा बेहतर उपज के लिए अनुमोदित की गई संकर किस्मे इस प्रकार है।

क्रमांक    संकर किस्म उपज क्षमता     प्रति हेक्टेयर पकने की अवधि दिन विशेषता

1 के. आर. एच.- 2 7 टन           130 से 135 दाना लम्बा और पतला

2 पी. एच. वी.- 71 7 से 8 टन      130          दाना लम्बा और पतला

3 सह्याद्री          6 से 7 टन   125 से 130   दाना लम्बा और पतला

4 प्रो एग्रो- 6201 7 टन            125 से 130    दाना लम्बा और पतला

5 एराइज-6444 6 से 7 टन    135 से 140    दाना लम्बा और पतला

6 सुरुचि- 5401 6 टन            130 से 135       मध्यम आकर

इसके अलावा भी धान की संकर किस्मे है अंकुर- 7434, पीएसी- 837 व 807, पी- 63, केपीएच- 371, जेआरच- 4 व 5, पूषा आरएच- 10 और एचयुआर- 917 डीपीटी- 5204 आदि संकर किस्मों का चयन कर के किसान अच्छी पैदावार ले सकते है। 

धान की सामान्य किस्में (Common Varieties for Paddy)

धान की सामान्य या परंपरागत किस्में इस प्रकार है। जिनकी गुणवता और पैदावार का आंकलन किसान अपनी भूमि की गुणवता या पिछली औसत के आधार पर कर सकते है।

1. अगेती किस्में- 110 से 115 दिन फसल की अवधि वाली, इनमें मुख्य रूप से पूसा- 2 व 21, पूसा- 33 व 834, पीएनआर- 381 व 162, नरेन्द्र धान (चावल)- 86 व 97, गोविन्द और सांकेत- 4 आदि प्रमुख है। इनका नर्सरी समय 15 मई से 15 जून होता है और इनकी औसत पैदावार 4.5 से 6 टन प्रति हैक्टेयर रहती है।

2. मध्यम अवधि की किस्में- 120 से 125 दिन फसल अवधि वाली किस्में, इनमें प्रमुख रूप से पूसा- 169, 205 व 44, सरजू- 52, पंतधान (चावल)- 10 व 12 और आईआर- 64 आदि प्रमुख है। इनका नर्सरी समय 15 मई से 20 जून तक होता है और इनकी औसत पैदावार 5.5 से 6.5 टन प्रति हैक्टेयर तक रहती है।

3. लम्बी अवधि वाली किस्में- 130 दिन से उपर वाली किस्में इनमें प्रमुख रूप से पीआर- 106, मालवीय- 36 और नरेन्द्र- 359 आदि प्रमुख है| इनका नर्सरी समय 20 मई से 20 जून तक होता है और इनकी औसतन पैदावार 6 से 7 टन प्रति हैक्टेयर होती है।

4. बासमती किस्मे- इनमें मुख्य रूप से पूसा बासमती- 1, पूसा सुगंध- 2, 3, 4 व 5, कस्तुरी- 385, बासमती- 370 व बासमती तरावडी आदि प्रमुख है। इसका नर्सरी समय 15 मई से 15 जून तक होता है।

धान बीज की मात्रा और उपचार (Quantity and Treatment of Paddy Seed) 

धान के बीज की मात्रा अलग अलग विधि के अनुसार इस प्रकार है।

क्रमांक    बुआई विधि किलोग्राम / प्रति हैक्टेयर

1   छिडकाव विधि     100 से 120

2   कतारों में बीज बोना 90 से 100

3   लेहा विधि               70 से 80

4   रोपाई विधि               40 से 50

5   वियासी              125 से 150

1. संकर किस्म बीज मात्रा- धान की संकर किस्मों के लिए बीज की मात्रा ज्यादातर 20 से 25 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर रहती है संकर किस्म बीज मात्रा के लिए आप सम्बंधित कम्पनी से पूछताछ करे तो ज्यादा बेहतर रहेगा।

2. बीज उपचार- बुआई से पहले बीज को उपचारित करना चाहिए हालाँकि संकर बीज उचारित होते है। लेकिन सामान्य बीज का उपचार आवश्यक है। उसके लिए फफूंद और जीवाणुओं से बचाव के लिए बीजों को 2 ग्राम थायरम, 2 ग्राम बाविस्टीन प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। वैक्टीरियल रोगों के लिए 25 किलोग्राम बीज को 4 ग्राम स्ट्रेपटोसाइक्लीन द्वारा बीज को उपचारित करके बुआई करें।

3. पौधशाला में पौध तैयार करना- जितने क्षेत्र में धान (Paddy) की रोपाई करनी है उसके 1/25 भाग की पौधशाला तैयार करनी चाहिए। उसमें प्रमाणित बीज को इस तरह बोए की 3 से 4 सप्ताह में उसकी पौध तैयार हो जाए। अगर पौध में कोई रोग हो तो उसे सम्बंधित दवा का उपयोग करे। अब आप की पौध 20 से 25 दिन में रोपाई योग्य हो जाएगी तो पौधे की लाइन से लाइन की दुरी 30 सेंटीमीटर रखे और लाइन में पौधे से पौधे की दुरी 10 सेंटीमीटर रखें।

जल व खरपतवार प्रबंधन (Water and Weed Management)

1. जल प्रबंधन- धान (Paddy) की फसल को अन्य फसलों की अपेक्षा सबसे ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। धान की फसल को कुछ विशेष अवस्थाओं में पानी की जरूरत रहती है रोपाई के बाद एक सप्ताह तक, पौधे के फुटाव के समय, बाली निकलते समय और दाना भरते समय खेत में पानी रहना आवश्यक होना चाहिए।

2. खरपतवार प्रबंधन- धान में खरपतवार हटाने के लिए खुरपी या पैडीवीडर का प्रयोग करते है या फिर रसायन विधि से नियन्त्रण के लिए रोपाई के 3 से 4 दिन के अंदर 700 से 800 लिटर पानी में 3.5 लिटर पेंडीमेथलिन 30 ई. सी. का प्रयोग प्रति हेक्टेयर करें।

रोग व किट प्रबंधन (Disease and Insect Management)

1. रोग प्रबंधन- धान (Paddy) की फसल को लगने वाले प्रमुख रोग सफेद दाग, विषाणु झुलसा रोग, शिथ झुलसा, भूरा धब्बा, जीवाणु धारी, झोका और खैरा इत्यादि है। इसके लिए बीज को बोने से पहले अच्छे से उपचारित करें। यदि फिर भी रोग फसल को अपनी चपेट में लेता है तो रोग से सम्बंधित दवा का उपयोग करे इसके लिए आप अपने कृषि अधिकारी से सम्पर्क कर सकते है।

2. किट प्रबंधन- धान को लगने वाले प्रमुख किट दिमक, पत्ती लपेटक किट, गन्धी बग और तना बेधक इत्यादि इसके लिए 1.5 लिटर प्रति हेक्टेयर नीम से बनी कीटनाशक का प्रयोग करे और बाद में क्यूनालफास 25 ई.सी. 1.25 लिटर या क्लोरोपाइरीफास 20 ई. सी. 1.5 लिटर प्रति हेक्टेयर में छिडकाव करना चाहिए।

धान फसल कटाई व पैदावार (Paddy Harvesting and Production)

1. फसल कटाई- जब खेत में 50 प्रतिशत बालियाँ पकने पर खेत का पानी निकाल देना चाहिए और 80 से 85 प्रतिशत फसल पकने पर उसको काट लेना चाहिए ताकि दानों का झडाव ना हो। फसल को काटते ही उसको निकाल ले।

2. पैदावार- पैदावार वैसे तो फसल और किस्म पर आधारित है लेकिन संकर की पैदावार 6.5 से 7 टन, सामान्य सिंचित क्षेत्र की पैदावार 50 से 55 क्विंटल और असिंचित क्षेत्र की पैदावार 45 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए उपरोक्त सभी विधि या तकनीकी अपनाने के बाद।

Rice ( चावल ) Crop Types

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