मार्च में खाली खेत से कमाएं ₹50,000: 70 दिन में तैयार होगी गर्मी की मूंग, जानें पूरी तकनीक

मार्च में खाली खेत से कमाएं ₹50,000: 70 दिन में तैयार होगी गर्मी की मूंग, जानें पूरी तकनीक
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Kisaan Helpline

Crops
Feb 21, 2026

मध्य प्रदेश में रबी सीजन की फसलें अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। कई क्षेत्रों में गेहूं और चना की कटाई शुरू हो गई है, जबकि बाकी खेत भी होली तक खाली हो जाएंगे। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि खरीफ सीजन शुरू होने तक खाली पड़े खेतों का उपयोग कैसे करें। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च से मई के बीच का यह समय किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतरीन अवसर बन सकता है, और इस दौरान गर्मी की मूंग की खेती सबसे लाभकारी विकल्पों में से एक है।

 

गर्मी की मूंग एक ऐसी दलहनी फसल है, जो कम समय में तैयार होने के साथ-साथ किसानों को अच्छा उत्पादन और बाजार में बेहतर कीमत भी देती है। खास बात यह है कि यह फसल केवल किसानों की आय बढ़ाती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता सुधारने में भी मदद करती है।

 

खाली खेत को बनाएं कमाई का जरिया

 

मध्य प्रदेश के निमाड़, मालवा, बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्र में हर साल मार्च के पहले और दूसरे सप्ताह तक खेत खाली हो जाते हैं। इसके बाद खरीफ सीजन की बुआई जून में शुरू होती है, यानी लगभग 80 से 90 दिनों का समय खेत खाली रहता है। इस दौरान अगर किसान गर्मी की मूंग की खेती करते हैं, तो वे प्रति एकड़ हजारों रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।

 

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, मूंग की खेती उन किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिनके पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। यह फसल गर्मी के मौसम में अच्छी तरह बढ़ती है और कम समय में तैयार हो जाती है।

 

कम अवधि में तैयार, ज्यादा मुनाफा

 

गर्मी की मूंग की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम अवधि है। यह फसल लगभग 60 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है। इसका मतलब है कि किसान मई के अंत तक इसकी कटाई कर सकते हैं और खरीफ सीजन की तैयारी समय पर कर सकते हैं।

 

यदि किसान सही किस्म और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करें, तो प्रति एकड़ 5 से 8 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान बाजार भाव के अनुसार मूंग की कीमत 6000 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल तक रहती है, जिससे किसान प्रति एकड़ 30,000 से 50,000 रुपये तक की आय आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

 

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मददगार

 

मूंग एक दलहनी फसल है, जिसकी जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु पाए जाते हैं। ये जीवाणु मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे अगली फसल को अधिक पोषण मिलता है। इससे किसानों को अगली फसल में कम उर्वरक का उपयोग करना पड़ता है और लागत भी कम होती है।

 

इस तरह मूंग की खेती किसानों के लिए दोहरा लाभ देती हैएक तरफ आय बढ़ती है और दूसरी तरफ मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है।

 

बुआई का सही समय और उपयुक्त मिट्टी

 

गर्मी की मूंग की बुआई के लिए मार्च का पहला और दूसरा सप्ताह सबसे उपयुक्त माना जाता है। समय पर बुआई करने से फसल का विकास बेहतर होता है और उत्पादन अधिक मिलता है।

 

मूंग की खेती के लिए मध्यम से भारी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का pH स्तर 6.5 से 7 के बीच होना चाहिए। बुआई से पहले खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाना जरूरी है, ताकि बीज का अंकुरण अच्छा हो सके।

 

उन्नत किस्मों का चयन जरूरी

 

अच्छे उत्पादन के लिए उन्नत और प्रमाणित किस्मों का चयन करना बहुत जरूरी है। गर्मी के मौसम के लिए कुछ प्रमुख किस्में इस प्रकार हैं:

·       IPM 205-07 (विराट)

·       IPM 410-3 (शिखा)

·       MH 421

·       PDM 139 (सम्राट)

·       पंत मूंग-4

·       पूसा विशाल

·       SML 832

 

ये किस्में कम अवधि में तैयार होती हैं और पीला मोजेक रोग के प्रति अपेक्षाकृत सहनशील होती हैं।

 

बीज दर और बुआई की विधि

 

गर्मी की मूंग के लिए प्रति एकड़ 7 से 8 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। बुआई करते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। बीज को 4 से 5 सेंटीमीटर की गहराई पर बोना चाहिए।

 

बुआई से पहले बीज का उपचार करना बहुत जरूरी है। इससे फसल को प्रारंभिक अवस्था में रोगों और कीटों से बचाया जा सकता है और अंकुरण बेहतर होता है।

 

उर्वरक प्रबंधन

 

मूंग की फसल को अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह स्वयं नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती है। फिर भी बेहतर उत्पादन के लिए बुआई के समय फॉस्फोरस और जिंक का उपयोग लाभदायक होता है।

 

प्रति एकड़ निम्न उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है:

·       SSP (सिंगल सुपर फॉस्फेट) – 100 किलोग्राम

·       जिंक सल्फेट – 4 से 6 किलोग्राम

·       गोबर की खाद – 8 से 10 टन प्रति हेक्टेयर

·       टाटा स्टील धुर्वी गोल्ड - 25-50 किलोग्राम / एकड़

 

सिंचाई का सही प्रबंधन जरूरी

 

गर्मी के मौसम में मूंग की फसल को 4 से 5 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। हल्की मिट्टी में 8 से 10 दिन के अंतराल पर और भारी मिट्टी में 12 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए।

 

विशेष रूप से निम्न अवस्थाओं में सिंचाई जरूरी होती है:

·       अंकुरण के समय

·       फूल आने के समय

·       फलियां बनने के समय

अधिक सिंचाई से बचना चाहिए, क्योंकि इससे रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है।

 

खरपतवार और कीट नियंत्रण

 

फसल की अच्छी बढ़वार के लिए खेत को खरपतवार से मुक्त रखना जरूरी है। बुआई के 15 से 20 दिन बाद निराई-गुड़ाई करनी चाहिए।

 

पीला मोजेक वायरस, माहू और थ्रिप्स जैसे कीट मूंग की फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे बचाव के लिए प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें और आवश्यकता पड़ने पर उचित कीटनाशकों का उपयोग करें।

 

कटाई और उत्पादन

 

मूंग की फसल बुआई के लगभग 60 से 75 दिनों बाद तैयार हो जाती है। जब फलियां पीली होकर सूखने लगें, तब कटाई करनी चाहिए। सही समय पर कटाई करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर मिलते हैं।

 

औसतन प्रति एकड़ 5 से 7 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जबकि उन्नत तकनीक अपनाने पर उत्पादन 8 क्विंटल तक भी पहुंच सकता है।

 

किसानों के लिए अतिरिक्त आय का सुनहरा मौका

 

गर्मी की मूंग की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प साबित हो रही है। इससे केवल अतिरिक्त आय प्राप्त होती है, बल्कि खेत का पूरा उपयोग होता है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।

 

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक विधियों से मूंग की खेती करें और सही समय पर बुआई करें, तो वे कम समय में अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।

 

मार्च में खाली खेत को खाली छोड़ने के बजाय मूंग की खेती करना किसानों के लिए एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। यह फसल कम लागत, कम समय और अधिक लाभ का बेहतरीन विकल्प है। साथ ही यह मिट्टी की गुणवत्ता सुधारकर भविष्य की फसलों के लिए भी लाभकारी साबित होती है।

 

इसलिए जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे इस सीजन में गर्मी की मूंग की खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं और खेती को और अधिक लाभदायक बना सकते हैं।

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