फरवरी का महीना किसानों के लिए सब्जियों की अगेती खेती शुरू करने का सबसे सही समय माना जाता है। इस समय मौसम न ज्यादा ठंडा होता है और न ही ज्यादा गर्म, जिससे सब्जियों का अंकुरण और विकास तेजी से होता है। अगर किसान भाई फरवरी खत्म होने से पहले भिंडी, खीरा और करेला जैसी अगेती सब्जियों की बुवाई कर लेते हैं, तो मार्च और अप्रैल में उन्हें बाजार में अच्छे दाम मिल सकते हैं। इन सब्जियों की मांग गर्मियों की शुरुआत में तेजी से बढ़ती है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर अगेती खेती करने से किसान कम समय में अधिक उत्पादन लेकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं इन तीनों फसलों की खेती की पूरी जानकारी।
अच्छा उत्पादन पाने के लिए सबसे पहले खेत की सही तैयारी करना बहुत जरूरी है। किसान भाई खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए और उसमें मौजूद हानिकारक कीट और रोग खत्म हो सकें। जुताई के बाद खेत को कुछ दिन धूप में खुला छोड़ देना चाहिए।
इसके अलावा, खेत की उर्वरता बढ़ाने के लिए प्रति एकड़ लगभग 8 से 10 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाना चाहिए। इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। इसके बाद रोटावेटर चलाकर मिट्टी को अच्छी तरह तैयार कर लें, ताकि बीज आसानी से अंकुरित हो सकें।
भिंडी एक ऐसी सब्जी है जिसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है, खासकर गर्मियों की शुरुआत में इसके दाम अच्छे मिलते हैं। फरवरी के अंत तक इसकी बुवाई करने से जल्दी उत्पादन मिलता है।
भिंडी की बुवाई कैसे करें
भिंडी के बीजों को बुवाई से पहले 12 से 15 घंटे पानी में भिगोकर रखें, इससे अंकुरण तेजी से होता है। इसके बाद बीजों को फंगल रोगों से बचाने के लिए जैविक या सुरक्षित फफूंदनाशक से उपचारित करें।
भिंडी की बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी लगभग 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें। इससे पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और उत्पादन अच्छा होता है।
समय-समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से भिंडी की फसल तेजी से बढ़ती है और किसान को जल्दी उत्पादन मिलता है।
खीरा एक तेजी से बढ़ने वाली फसल है और इसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है। फरवरी में इसकी बुवाई करने से मार्च और अप्रैल में उत्पादन शुरू हो जाता है।
खीरे की खेती का तरीका
खीरे की बुवाई मेड़ों या उठे हुए बेड पर करना सबसे अच्छा रहता है। बीज को लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं। एक स्थान पर 2 से 3 बीज डालें और अंकुरण के बाद स्वस्थ पौधा छोड़कर बाकी पौधों को निकाल दें।
खीरे की फसल में नमी बनाए रखना जरूरी होता है, इसलिए नियमित सिंचाई करें। यदि संभव हो तो मल्चिंग या ड्रिप सिंचाई का उपयोग करें, इससे पानी की बचत होती है और उत्पादन भी बढ़ता है।
करेला एक ऐसी सब्जी है जिसकी मांग गर्मियों में काफी बढ़ जाती है। यह स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है, इसलिए बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है।
करेले की बुवाई और देखभाल
करेले के बीजों को बोने से पहले हल्का सा खुरचकर 10 से 12 घंटे पानी में भिगो दें, इससे अंकुरण जल्दी होता है।
करेले की खेती में मचान विधि का उपयोग करना बहुत फायदेमंद होता है। इससे पौधे अच्छी तरह फैलते हैं और फल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
फसल में समय-समय पर सिंचाई और जैविक खाद का उपयोग करें। साथ ही कीट और रोगों से बचाव के लिए जैविक उपाय अपनाएं।
अगेती खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब बाजार में सब्जियों की आवक कम होती है, उस समय किसानों को अपनी फसल के अच्छे दाम मिलते हैं। मार्च और अप्रैल में तापमान बढ़ने के साथ इन सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ जाती है।
अगर किसान सही समय पर बुवाई करें और उचित देखभाल करें, तो प्रति एकड़ अच्छा उत्पादन लेकर हजारों रुपये का अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं।
विशेषज्ञों की किसानों को सलाह
कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि फरवरी खत्म होने से पहले इन सब्जियों की बुवाई जरूर करें। साथ ही अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें और खेत की सही तैयारी करें।
समय पर सिंचाई, संतुलित खाद और कीट नियंत्रण करने से फसल अच्छी होती है और उत्पादन बढ़ता है।
फरवरी का आखिरी समय किसानों के लिए अगेती सब्जियों की खेती शुरू करने का सुनहरा अवसर है। अगर किसान भाई भिंडी, खीरा और करेला की खेती अभी शुरू करते हैं, तो आने वाले महीनों में उन्हें अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल सकता है। सही तकनीक और समय पर खेती करके किसान अपनी आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी कर सकते हैं।
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