पश्चिमी विक्षोभ का डबल असर: मध्य प्रदेश और राजस्थान में बारिश-ओले से बदला मौसम, तैयार फसलों पर खतरा, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

पश्चिमी विक्षोभ का डबल असर: मध्य प्रदेश और राजस्थान में बारिश-ओले से बदला मौसम, तैयार फसलों पर खतरा, किसानों को सतर्क रहने की सलाह
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Kisaan Helpline

Agriculture
Feb 19, 2026

पश्चिमी विक्षोभ का डबल असर: मध्य प्रदेश और राजस्थान में बारिश-ओले से बदला मौसम, तैयार फसलों पर खतरा, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

 

फरवरी के अंतिम चरण में एक बार फिर मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जहां मध्य प्रदेश में यह फरवरी महीने में तीसरी बार मौसम का बड़ा बदलाव माना जा रहा है, वहीं राजस्थान में भी पश्चिमी विक्षोभ के असर से कई जिलों में बारिश और ओलों की घटनाएं सामने आई हैं। इस असामान्य मौसम ने खासकर उन किसानों को प्रभावित किया है, जिनकी रबी फसल कटाई के लिए लगभग तैयार थी।

 

मध्य प्रदेश में तेज हवा, बारिश और ओलों से बदला मौसम

 

राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह तेज हवाओं और बारिश के साथ दिन की शुरुआत हुई। देर रात से ही बादलों की आवाजाही बढ़ गई थी, जिसके बाद कई इलाकों में झमाझम बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में भी गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई।

 

इससे पहले प्रदेश के रतलाम, मंदसौर, नीमच, श्योपुर, मुरैना और गुना सहित कई जिलों में ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आईं। कई किसानों ने बताया कि खेतों में खड़ी गेहूं, चना और सरसों की फसल पर ओलों का असर पड़ा है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

 

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश के ऊपर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण, ट्रफ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से यह मौसम परिवर्तन हुआ है। इसके कारण बादलों की गतिविधि बढ़ी और कई जिलों में वर्षा और ओलावृष्टि दर्ज की गई।

 

राजस्थान में भी बारिश और ओलावृष्टि से किसान परेशान

 

राजस्थान में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। जयपुर, नागौर, श्रीगंगानगर, पाली, हनुमानगढ़ और चूरू सहित कई जिलों में बारिश हुई, जबकि कुछ स्थानों पर ओले भी गिरे। जयपुर में दोपहर के समय अचानक बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी हुई।

 

नागौर और आसपास के क्षेत्रों में ओलावृष्टि के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। इन क्षेत्रों में गेहूं, सरसों और चना की फसल कटाई के करीब थी, लेकिन अचानक हुए मौसम परिवर्तन से नुकसान का खतरा पैदा हो गया है।

 

बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुछ दिनों पहले बढ़ रही गर्मी पर ब्रेक लगा है। हालांकि इससे आम लोगों को राहत मिली है, लेकिन किसानों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

 

किसानों की फसलों को कितना नुकसान हो सकता है?

 

इस समय दोनों राज्यों में रबी सीजन की मुख्य फसलें जैसे गेहूं, चना, मसूर और सरसों पकने की स्थिति में हैं। ऐसे में ओलावृष्टि और तेज बारिश से निम्न नुकसान हो सकते हैं:

·       गेहूं: दाने झड़ सकते हैं और गुणवत्ता खराब हो सकती है

·       चना: फलियों को नुकसान और उत्पादन में कमी

·       सरसों: दाने गिरने और तेल की मात्रा प्रभावित होने की संभावना

·       सब्जियां और बागवानी फसलें: पत्तियों और फल को नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस समय लगातार बारिश होती है तो उत्पादन में 10 से 30 प्रतिशत तक की कमी संभव है।

 

क्यों हो रहा है बार-बार मौसम में बदलाव?

 

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय उत्तर भारत के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके साथ ही चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन जैसी मौसम प्रणालियां भी सक्रिय हैं। यही कारण है कि फरवरी जैसे महीने में भी बार-बार बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिल रही है।

 

पश्चिमी विक्षोभ एक ऐसी प्रणाली है जो भूमध्य सागर क्षेत्र से नमी लेकर भारत के उत्तर और मध्य भागों में बारिश और बादल लाती है। इसका असर खासकर सर्दियों और वसंत के शुरुआती समय में अधिक होता है।

 

आगे कैसा रहेगा मौसम?

 

मौसम विभाग के अनुसार 20 फरवरी तक मध्य प्रदेश के कुछ जिलों और राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में हल्की बारिश और बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। हालांकि 21 फरवरी के बाद मौसम साफ होने के संकेत मिल रहे हैं और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।

 

दिन के समय तापमान बढ़ रहा है और कई शहरों में पारा 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है, जबकि रात और सुबह के समय अभी भी हल्की ठंड बनी हुई है।

 

किसान क्या सावधानियाँ अपनाएँ?

 

ऐसे बदलते मौसम में किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए:

 

1. पकी हुई फसल की तुरंत कटाई करें

 

यदि गेहूं, चना या सरसों की फसल तैयार है तो मौसम साफ होते ही कटाई कर लें, ताकि नुकसान से बचा जा सके।

 

2. कटाई के बाद फसल को खुले में रखें

 

कटाई के बाद फसल को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थान या तिरपाल से ढककर रखें।

 

3. खेत में जल निकासी की व्यवस्था करें

 

यदि खेत में पानी भर गया है तो तुरंत जल निकासी करें, इससे फसल को सड़ने से बचाया जा सकता है।

 

4. सब्जी और बागवानी फसलों को सहारा दें

 

तेज हवा से पौधे गिर सकते हैं, इसलिए उन्हें सहारा देकर सुरक्षित करें।

 

5. फसल बीमा योजना का लाभ लें

 

जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पंजीकरण कराया है, वे नुकसान होने पर तुरंत संबंधित विभाग में सूचना दें।

 

किसानों के लिए क्या है राहत की बात?

 

हालांकि ओलावृष्टि और बारिश से नुकसान की आशंका है, लेकिन यह बारिश उन क्षेत्रों के लिए लाभदायक भी हो सकती है जहां मिट्टी में नमी की कमी थी। इससे आने वाली गर्मी की फसलों के लिए मिट्टी में नमी बनी रहेगी।

 

मध्य प्रदेश और राजस्थान में फरवरी के महीने में बार-बार हो रहा मौसम परिवर्तन किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रही बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसलों को नुकसान का खतरा बना हुआ है। ऐसे में किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखते हुए समय पर कटाई और सुरक्षा उपाय अपनाने की जरूरत है। यदि सावधानी बरती जाए तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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