खरीफ 2026 के लिए टॉप सोयाबीन वैरायटी, रोग कम और उत्पादन ज्यादा

खरीफ 2026 के लिए टॉप सोयाबीन वैरायटी, रोग कम और उत्पादन ज्यादा
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Kisaan Helpline

Crops
May 25, 2026

2026 में किसानों की पहली पसंद बन रही हैं ये नई सोयाबीन किस्में, कम समय में देंगी शानदार उत्पादन

 

देशभर में खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और किसान अब ऐसी सोयाबीन किस्मों की तलाश में हैं जो कम समय में अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ रोगों का सामना भी कर सकें। पिछले कुछ वर्षों में बदलते मौसम, अनियमित बारिश और फसलों में बढ़ते रोगों ने किसानों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक किसानों को नई और उन्नत सोयाबीन वैरायटी अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि सही किस्म का चयन ही सोयाबीन खेती में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। यदि किसान अपनी जमीन, मौसम और सिंचाई सुविधा के अनुसार सही वैरायटी का चुनाव करते हैं, तो उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं।

 

वैरायटी चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान?

सोयाबीन की खेती में केवल बीज खरीद लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि कौन-सी किस्म आपके क्षेत्र के लिए बेहतर रहेगी।

 

रोग प्रतिरोधक क्षमता जरूरी

बीते वर्षों में फ्रॉग आई, चारकोल रोट, मोजैक वायरस, एरियल ब्लाइट और लीफ स्पॉट जैसी बीमारियों ने किसानों को काफी नुकसान पहुंचाया। इसलिए ऐसी किस्मों का चयन करना चाहिए जिनमें रोगों के प्रति सहनशीलता अधिक हो।

 

जल्दी पकने वाली किस्में देंगी फायदा

ऐसी वैरायटी बेहतर मानी जाती हैं जो 90 से 110 दिनों में तैयार हो जाएं। जल्दी पकने वाली फसल से मौसम जोखिम कम होता है और समय पर कटाई भी आसान रहती है।

 

उत्पादन क्षमता पर दें ध्यान

विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी किस्म वही मानी जाती है जो कम से कम 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन देने की क्षमता रखती हो।

 

एक से ज्यादा किस्में लगाना फायदेमंद

कई किसान अब एक ही खेत में दो या तीन अलग-अलग वैरायटी लगाना शुरू कर चुके हैं। इससे किसी एक किस्म में रोग या मौसम का असर होने पर पूरा नुकसान नहीं होता।

 

2026 की प्रमुख उन्नत सोयाबीन किस्में

 

JS 23-03: कम समय में शानदार उत्पादन देने वाली किस्म

 

JS 23-03 किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह किस्म जल्दी पकने वाली होने के साथ-साथ मजबूत पौध संरचना के लिए जानी जाती है।

·       पकने की अवधि लगभग 90 से 95 दिन

·       प्रति पौधा अधिक फलियां बनने की क्षमता

·       फली में सामान्यतः 3 दाने

·       कटाई में आसानी

·       कई रोगों के प्रति बेहतर सहनशीलता

 

विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म उन किसानों के लिए बेहतर मानी जा रही है जो जल्दी फसल निकालकर दूसरी फसल लेना चाहते हैं।

 

KDS 726 (फुले संगम): ज्यादा पैदावार वाली मजबूत किस्म

 

KDS 726 महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसका पौधा मजबूत और फैलाव वाला होता है।

·       पकने का समय लगभग 110 दिन

·       अच्छी शाखाएं और अधिक फलियां

·       रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत

·       सूखे की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन

 

कई किसान इसे व्यावसायिक खेती के लिए उपयुक्त मान रहे हैं क्योंकि इसकी उत्पादन क्षमता काफी अच्छी देखी गई है।

 

JS 95-60: लंबे समय से भरोसेमंद किस्म

 

JS 95-60 मध्यप्रदेश और राजस्थान के किसानों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय रही है।

·       लगभग 95 दिन में तैयार

·       स्थिर उत्पादन क्षमता

·       मध्यम रोग प्रतिरोधक क्षमता

·       कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी उपयुक्त

 

हालांकि कृषि वैज्ञानिक अब किसानों को इसके साथ नई किस्में भी लगाने की सलाह दे रहे हैं ताकि रोगों का खतरा कम रहे।

 

RVSM 1135: कम जोखिम वाली उन्नत वैरायटी

 

RVSM 1135 तेजी से किसानों की पसंद बनती जा रही है।

·       पकने की अवधि लगभग 100 से 105 दिन

·       मजबूत पौधा और अच्छी ऊंचाई

·       ज्यादा फलियां और बेहतर दाना भराव

·       रोगों के प्रति सहनशील

 

यह किस्म विशेष रूप से मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान के कई इलाकों में अच्छा प्रदर्शन कर रही है।

 

NRC 150: नई तकनीक से विकसित उन्नत किस्म

 

NRC 150 को नई पीढ़ी की उन्नत किस्म माना जा रहा है।

·       सफेद फूलों वाली आकर्षक किस्म

·       बेहतर दाना गुणवत्ता

·       रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी

·       उत्पादन स्थिर रहने की संभावना

 

कई कृषि विशेषज्ञ इसे भविष्य की उन्नत सोयाबीन वैरायटी मान रहे हैं।

 

JS 21-72: वर्षा आधारित खेती के लिए बेहतर विकल्प

 

JS 21-72 उन किसानों के लिए बेहतर मानी जाती है जो बारिश पर आधारित खेती करते हैं।

·       90 से 95 दिन में तैयार

·       मौसम जोखिम कम

·       पौधे मजबूत और संतुलित

·       कम पानी में भी अच्छा प्रदर्शन

 

NRC 268: मोजैक वायरस के प्रति सहनशील नई किस्म

 

NRC 268 को आधुनिक अनुसंधान के आधार पर विकसित किया गया है।

·       100 से 105 दिन में पकने वाली किस्म

·       मोजैक वायरस के प्रति सहनशील

·       अच्छी उत्पादन क्षमता

·       संतुलित पौध वृद्धि

 

कई किसानों ने इस किस्म से बेहतर परिणाम मिलने की जानकारी दी है।

 

JS 20-34: कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

 

JS 20-34 ऐसे क्षेत्रों के लिए उपयोगी मानी जाती है जहां मानसून जल्दी समाप्त हो जाता है।

·       कम नमी में भी अच्छा विकास

·       जल्दी पकने वाली किस्म

·       कटाई में आसान

·       उत्पादन स्थिर रखने की क्षमता

·       सोयाबीन की बेहतर खेती के लिए जरूरी सुझाव

·       प्रमाणित बीज का उपयोग करें

 

हमेशा विश्वसनीय स्रोत से प्रमाणित बीज खरीदें। इससे अंकुरण और उत्पादन बेहतर रहता है।

 

बीजोपचार जरूर करें

बुवाई से पहले बीजों को राइजोबियम और पीएसबी कल्चर से उपचारित करना लाभदायक माना जाता है। इससे जड़ों का विकास अच्छा होता है और पौधों को पोषण बेहतर मिलता है।

 

सही समय पर बुवाई करें

 

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून आने के बाद 15 जून से 10 जुलाई के बीच बुवाई करना सबसे उपयुक्त रहता है।

 

खेत में जल निकासी जरूरी

सोयाबीन की फसल में जलभराव सबसे बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए खेत में पानी निकासी की व्यवस्था जरूर रखें।

 

किसानों के लिए क्या है सबसे बेहतर रणनीति?

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में किसानों को पुरानी किस्मों पर पूरी तरह निर्भर रहने की बजाय नई और उन्नत वैरायटी अपनानी चाहिए। साथ ही एक से अधिक किस्में लगाने से जोखिम कम किया जा सकता है।

अगर किसान सही वैरायटी चयन, समय पर बुवाई, संतुलित पोषण और रोग प्रबंधन पर ध्यान दें, तो इस बार सोयाबीन की खेती से शानदार उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।

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