नीम धतूरे और गोबर से घर पर बनाएं अमृत घोल जानिए अमृत घोल बनाने की पूरी विधि

नीम धतूरे और गोबर से घर पर बनाएं अमृत घोल जानिए अमृत घोल बनाने की पूरी विधि
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Kisaan Helpline

Agriculture
Jul 31, 2026

खेती की बढ़ती लागत के बीच अब कई किसान ऐसे देसी उपाय अपना रहे हैं, जिनसे कम खर्च में फसल की अच्छी देखभाल की जा सके। इन्हीं उपायों में एक है अमृत घोल। इसे नीम की पत्तियां, धतूरे की पत्तियां, गोबर की खाद और पानी की मदद से घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है।

कई किसानों का अनुभव है कि इस घोल के उपयोग से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है, मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और कुछ हद तक कीटों का प्रभाव भी कम हो सकता है। यही कारण है कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसान इस देसी घोल को तेजी से अपना रहे हैं।

ऐसे तैयार करें अमृत घोल

अमृत घोल बनाने के लिए:

● सबसे पहले नीम और धतूरे की ताजी पत्तियां इकट्ठा करें और उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
● अब एक साफ मटका लें।
● उसमें गोबर की खाद डालें और जरूरत के अनुसार पानी मिलाएं।
● इसके बाद कटी हुई नीम और धतूरे की पत्तियां इसमें डालकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला दें।
● मटके को ढककर 7 से 10 दिनों तक छांव वाली जगह पर रखें।
● इस दौरान हर दिन लकड़ी की सहायता से घोल को एक बार जरूर चलाएं।
● तय समय के बाद आपका अमृत घोल उपयोग के लिए तैयार हो जाएगा।

फसल में कैसे करें उपयोग?

घोल तैयार होने के बाद इसमें थोड़ा और पानी मिलाकर पतला कर लें।

● इसके बाद इसे फसल की जड़ों में डाला जा सकता है।
● किसान चाहें तो इसका हल्का छिड़काव भी कर सकते हैं।
● हालांकि, शुरुआत में इसका उपयोग कम मात्रा में करना बेहतर माना जाता है।
● बाद में जरूरत और परिणाम के अनुसार मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

अमृत घोल से क्या हो सकते हैं फायदे?

कई किसानों के अनुसार इस देसी घोल के उपयोग से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और फसल लंबे समय तक हरी-भरी बनी रहती है।

यह मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मददगार माना जाता है। कुछ किसानों का अनुभव है कि इसके उपयोग से फसल पर लगने वाले कुछ कीटों का असर भी कम हो सकता है। जब मिट्टी स्वस्थ रहती है, तो पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और फसल का विकास भी बेहतर होता है।

इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां

● अमृत घोल बनाते समय हमेशा साफ मटका और साफ पानी का ही उपयोग करें।
● घोल को सीधे धूप में रखने के बजाय छांव वाली जगह पर रखें।
● यदि घोल से बहुत तेज बदबू आने लगे या वह खराब दिखाई दे, तो उसका उपयोग न करें।
● हर फसल की जरूरत अलग होती है। इसलिए पहली बार इसका उपयोग सीमित मात्रा में करें और परिणाम देखने के बाद ही आगे इसकी मात्रा बढ़ाएं।

किसानों के लिए सलाह

यदि आप खेती की लागत कम करना चाहते हैं और प्राकृतिक तरीकों को अपनाने की सोच रहे हैं, तो अमृत घोल एक उपयोगी विकल्प हो सकता है। सही तरीके से तैयार और संतुलित मात्रा में उपयोग करने पर यह पौधों की शुरुआती बढ़वार और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है।

किसी भी देसी या जैविक घोल का बड़े पैमाने पर उपयोग करने से पहले अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना भी लाभदायक रहेगा।

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