जब नौतपा की तेज गर्मी से लोग घरों में छिपने लगते हैं, उसी समय किसान भाइयों के पास अपनी मिट्टी को सोना बनाने का सबसे बड़ा मौका होता है। खेत की सही समय पर की गई गहरी जुताई आने वाले खरीफ सीजन में मक्का और सोयाबीन की पैदावार को कई गुना तक बढ़ा सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि नौतपा के दौरान पड़ने वाली तेज धूप खेत के लिए किसी प्राकृतिक दवा से कम नहीं होती। इस समय अगर किसान खेत की गहरी जुताई कर लें, तो मिट्टी की ताकत बढ़ती है, कीट कम होते हैं और बारिश का पानी भी जमीन में ज्यादा समय तक टिकता है।
यही वजह है कि अब कई किसान नौतपा की गर्मी को नुकसान नहीं, बल्कि खेती सुधारने का मौका मान रहे हैं।
आखिर नौतपा में गहरी जुताई क्यों मानी जाती है जरूरी?
नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें बेहद तेज होती हैं। जब इस समय खेत की मिट्टी को पलट दिया जाता है, तो जमीन के अंदर छिपे कीड़े, उनके अंडे और कई हानिकारक फंगस तेज धूप में नष्ट होने लगते हैं।
इसके अलावा खेत में बचे पुराने फसल अवशेष और जिद्दी खरपतवार भी सूखकर खत्म हो जाते हैं। इससे खेत साफ और अगली फसल के लिए तैयार हो जाता है।
किसानों के लिए यह तरीका बिना ज्यादा खर्च के खेत की प्राकृतिक सफाई जैसा काम करता है।
मक्का और सोयाबीन को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?
मक्का और सोयाबीन दोनों ऐसी फसलें हैं जिनकी जड़ें मिट्टी में गहराई तक जाती हैं। अगर मिट्टी सख्त हो तो जड़ों का विकास रुक जाता है और उत्पादन कम हो सकता है।
लेकिन नौतपा में गहरी जुताई करने से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है।
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जड़ों को फैलने के लिए ज्यादा जगह मिलती है
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मिट्टी में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है
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बारिश का पानी ज्यादा समय तक जमा रहता है
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पौधों को लंबे समय तक नमी मिलती है
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पोषक तत्व बेहतर तरीके से सक्रिय होते हैं
इसी वजह से मक्का और सोयाबीन की बढ़वार मजबूत होती है और पैदावार बढ़ने की संभावना भी ज्यादा रहती है।
गहरी जुताई करने का सही तरीका क्या है?
कृषि जानकारों के मुताबिक नौतपा के समय खेत की जुताई मिट्टी पलटने वाले हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए।
किसान
इन बातों
का रखें
खास ध्यान
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खेत की 10 से
12 इंच तक गहरी जुताई करें
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मिट्टी को अच्छी तरह ऊपर-नीचे पलटें
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जुताई के बाद खेत को कुछ दिन धूप में खुला छोड़ दें
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खरपतवार और पुराने अवशेष पूरी तरह सूखने दें
इस प्रक्रिया से खेत प्राकृतिक तरीके से साफ और मजबूत बनता है।
बारिश के मौसम में मिलेगा बड़ा फायदा
नौतपा में की गई गहरी जुताई का असर मानसून आने के बाद सबसे ज्यादा दिखाई देता है। भुरभुरी मिट्टी बारिश का पानी तेजी से सोख लेती है और खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
इससे किसानों को बार-बार सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है और फसल सूखे के असर से भी काफी हद तक बची रहती है।
रासायनिक खाद पर भी घट सकता है खर्च
कई कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि गहरी जुताई मिट्टी के अंदर मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्वों को सक्रिय करने में मदद करती है। इससे पौधों को जरूरी पोषण बेहतर तरीके से मिलता है और किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो सकती है। यानी यह तरीका उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत घटाने में भी मददगार साबित हो सकता है।
किसान इन गलतियों से बचें
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गीली मिट्टी में गहरी जुताई न करें
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बहुत ज्यादा बार जुताई करने से बचें
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खेत में जलभराव न होने दें
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जुताई के बाद तुरंत सिंचाई न करें
नौतपा की भीषण गर्मी किसानों के लिए परेशानी जरूर लाती है, लेकिन यही समय खेत को मजबूत बनाने का सबसे सुनहरा मौका भी होता है। अगर किसान इस दौरान मक्का और सोयाबीन के खेतों की सही तरीके से गहरी जुताई करें, तो मिट्टी की ताकत बढ़ सकती है और खरीफ सीजन में शानदार उत्पादन मिल सकता है।
आज की थोड़ी मेहनत आने वाले समय में किसानों को बेहतर पैदावार और ज्यादा कमाई दिला सकती है।
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