देश में डीजल की कीमत बढ़ते ही सबसे ज्यादा चिंता किसानों और आम लोगों के बीच दिखाई देने लगी है। खेत से लेकर रसोई तक लगभग हर चीज पर इसका असर पड़ता है। खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, पंप, हार्वेस्टर और माल ढुलाई के वाहन ज्यादातर डीजल से चलते हैं। ऐसे में डीजल के दाम बढ़ने का मतलब है खेती का खर्च बढ़ना और बाजार में खाने-पीने की चीजों का महंगा होना।
विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की कीमत में हुई हालिया बढ़ोतरी आने वाले दिनों में किसानों की लागत बढ़ा सकती है, जिसका असर सीधे आम आदमी की थाली पर देखने को मिलेगा।
आज की आधुनिक खेती मशीनों पर काफी हद तक निर्भर हो चुकी है। खेत की जुताई से लेकर सिंचाई और कटाई तक लगभग हर काम में डीजल की जरूरत पड़ती है।
जब डीजल महंगा होता है तो:
ट्रैक्टर चलाने का खर्च बढ़ जाता है
सिंचाई के लिए डीजल पंप महंगे पड़ते हैं
कटाई और थ्रेसिंग की लागत बढ़ जाती है
खेत तैयार करने में ज्यादा पैसा लगता है
ऐसे में प्रति एकड़ खेती की कुल लागत पहले से ज्यादा हो जाती है। छोटे और मध्यम किसान सबसे ज्यादा दबाव महसूस करते हैं क्योंकि उनके लिए बढ़ा हुआ खर्च संभालना आसान नहीं होता।
खेती महंगी होने का असर धीरे-धीरे बाजार में दिखाई देता है। जब किसान की लागत बढ़ती है तो फसल की कीमत भी बढ़ने लगती है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में:
गेहूं और चावल महंगे हो सकते हैं
दालों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है
खाने के तेल पर भी असर दिख सकता है
क्योंकि खेती में इस्तेमाल होने वाले खाद, दवाइयां और कृषि उत्पादों की ढुलाई भी डीजल पर निर्भर करती है।
हरी सब्जियां, फल और दूध जैसी चीजें रोजाना खेतों और डेयरियों से शहरों की मंडियों तक पहुंचाई जाती हैं। इसके लिए ट्रक और छोटे कमर्शियल वाहन इस्तेमाल किए जाते हैं।
जब डीजल महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्ट का किराया भी बढ़ जाता है। इसका असर सबसे पहले जल्दी खराब होने वाली चीजों पर दिखाई देता है।
टमाटर
प्याज
हरी सब्जियां
दूध और डेयरी उत्पाद
फल और ताजी फसलें
क्योंकि इन चीजों को जल्दी बाजार तक पहुंचाना जरूरी होता है, इसलिए बढ़ा हुआ ट्रांसपोर्ट खर्च सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच जाता है।
कई बार बाजार में फसल की कीमत उतनी तेजी से नहीं बढ़ती जितनी तेजी से लागत बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों का मुनाफा कम होने लगता है।
डीजल महंगा होने से किसान को:
ज्यादा निवेश करना पड़ता है
सिंचाई महंगी पड़ती है
मशीन किराया बढ़ जाता है
मंडी तक माल पहुंचाने में खर्च बढ़ता है
इस वजह से खेती का लाभ कम हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को अब लागत कम करने वाली तकनीकों पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
किसान ये तरीके अपना सकते हैं:
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाएं
सोलर पंप का उपयोग बढ़ाएं
जैविक खाद और स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल करें
मशीनों का साझा उपयोग करें
ईंधन बचाने वाली खेती तकनीक अपनाएं
इन तरीकों से कुछ हद तक बढ़ती लागत को कम किया जा सकता है।
अगर डीजल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। गांव से शहर तक खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं और आम लोगों का मासिक बजट भी प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि खेती और ट्रांसपोर्ट दोनों डीजल पर निर्भर हैं, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का असर पूरे कृषि बाजार पर दिखाई देना तय है।
खेती में अनावश्यक खर्च कम करें
सिंचाई का सही प्रबंधन करें
समूह में मशीनों का उपयोग करें
बाजार भाव पर नजर बनाए रखें
लागत और मुनाफे का रिकॉर्ड रखें
डीजल की बढ़ती कीमतें केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इसका असर खेत, मंडी और रसोई तक पहुंचता है। आने वाले समय में किसानों और आम लोगों दोनों को इसका असर महसूस हो सकता है। ऐसे में जरूरत है समझदारी से खेती करने की और ऐसी तकनीकों को अपनाने की जो लागत कम करने में मदद करें।
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