Kisaan Helpline
सोयाबीन की पत्तियां पीली होने पर सबसे पहले यह जांचें कि खेत में पानी जमा है या नहीं और पीलापन पुरानी पत्तियों में है या नई पत्तियों में। पानी जमा होने पर जल निकासी करें। पोषक तत्वों की कमी का संदेह होने पर मिट्टी की जांच कराएं और रोग या कीट के लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
Soybean FarmingTips: बारिश के बाद सोयाबीन की पत्तियां पीली पड़ना किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। लेकिन हर बार पत्तियों का पीला होना बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार खेत में पानी भरने, पोषक तत्वों की कमी या मिट्टी की स्थिति बिगड़ने से भी ऐसा होता है। इसलिए पीलापन देखते ही दवा का छिड़काव करने के बजाय पहले कारण समझना जरूरी है।
सोयाबीन की पत्तियां पीली क्यों पड़ती हैं?
पत्तियों के पीले होने की कई वजह हो सकती हैं। सबसे पहले किसान यह देखें कि पीलापन पूरे खेत में है या केवल कुछ हिस्सों में। इसके बाद पुरानी और नई पत्तियों को ध्यान से देखें।
अगर नीचे की पुरानी पत्तियां पहले पीली हो रही हैं, तो नाइट्रोजन की कमी एक वजह हो सकती है। वहीं अगर नई पत्तियां ज्यादा पीली दिखाई दे रही हैं, तो आयरन या सल्फर की कमी की संभावना हो सकती है। हालांकि, केवल पत्तियों का रंग देखकर खाद डालना सही नहीं है। खेत में नमी, पानी की स्थिति और पौधे की बढ़वार को भी देखना जरूरी है।
खेत में पानी जमा है तो पहले उसे निकालें
बारिश के मौसम में सोयाबीन के खेत में पानी रुक जाना पत्तियों के पीले होने की आम वजह हो सकती है।
जब मिट्टी में लंबे समय तक पानी भरा रहता है, तो जड़ों तक पर्याप्त हवा नहीं पहुंच पाती। इससे जड़ें पौधे को पानी और पोषक तत्व ठीक से नहीं दे पातीं। नतीजे में पत्तियां पीली पड़ सकती हैं और पौधे की बढ़वार भी प्रभावित हो सकती है।
अगर खेत के उन्हीं हिस्सों में पीलापन ज्यादा है जहां पानी जमा हुआ था, तो सबसे पहले जल निकासी की व्यवस्था करें। जहां हर बारिश में पानी रुकता है, वहां खेत की निकासी व्यवस्था को सुधारना भी जरूरी है।
लगातार एक ही फसल लेने से भी पड़ सकता है असर
अगर किसान कई वर्षों से एक ही खेत में बार-बार सोयाबीन और गेहूं जैसी फसलें ले रहे हैं, तो मिट्टी में कुछ पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है। खासकर तब, जब रासायनिक खाद का इस्तेमाल ज्यादा और जैविक खाद का इस्तेमाल कम हो।
ऐसी स्थिति में अंदाज से खाद डालने के बजाय मिट्टी की जांच कराना बेहतर है। इससे पता चलेगा कि मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है और उसी के अनुसार खाद या पोषण प्रबंधन किया जा सकता है।
पुरानी पत्तियां पीली हों तो नाइट्रोजन की कमी देखें
अगर सोयाबीन की नीचे वाली पुरानी पत्तियां पहले पीली पड़ रही हैं, तो नाइट्रोजन की कमी की संभावना हो सकती है।
कृषि सलाह के अनुसार, नाइट्रोजन की कमी की पुष्टि होने पर 2 प्रतिशत यूरिया घोल का पत्तियों पर छिड़काव किया जा सकता है। लेकिन यह फैसला खेत की स्थिति और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर लेना बेहतर है। बिना जरूरत ज्यादा यूरिया डालने से फायदा नहीं होगा। इसलिए खाद की मात्रा और छिड़काव का समय सही रखना जरूरी है।
नई पत्तियां पीली हैं तो आयरन की कमी भी जांचें
अगर पौधे की नई पत्तियां पीली हैं, लेकिन उनकी नसें हरी दिखाई दे रही हैं, तो आयरन की कमी की संभावना हो सकती है। ऐसी स्थिति में फेरस सल्फेट का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसकी मात्रा और उपयोग का तरीका खेत की स्थिति के अनुसार तय करना चाहिए। इसलिए संभव हो तो पहले मिट्टी की जांच कराएं और कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
कहीं पीलापन बीमारी की वजह से तो नहीं?
सोयाबीन की पत्तियों में पीले और हरे रंग के अलग-अलग धब्बे दिखाई दे रहे हैं, पत्तियां मुड़ रही हैं और पौधे की बढ़वार कमजोर हो रही है, तो येलो मोजेक रोग की संभावना भी देखनी चाहिए। इस रोग के फैलाव में सफेद मक्खी की भूमिका हो सकती है।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर केवल खाद डालने से समस्या दूर नहीं होगी। पहले बीमारी की सही पहचान कराना जरूरी है, ताकि उसके अनुसार उचित प्रबंधन किया जा सके।
बारिश के बाद किसान ऐसे करें खेत की जांच
बारिश रुकने के बाद खेत में कुछ समय निकालकर पौधों को ध्यान से देखें।
इन बातों पर खास ध्यान दें:
·
पीलापन पूरे खेत में है या कुछ जगहों पर।
·
पुरानी पत्तियां पीली हैं या नई।
·
खेत में पानी जमा है या नहीं।
·
पौधों की बढ़वार सामान्य है या कमजोर।
·
पत्तियों पर पीले-हरे धब्बे तो नहीं हैं।
·
पत्तियां मुड़ रही हैं या नहीं।
·
सफेद मक्खी जैसे कीट दिखाई दे रहे हैं या नहीं।
अगर केवल पानी जमा होने वाले हिस्सों में पीलापन है, तो समस्या का कारण पोषण की बजाय अधिक नमी भी हो सकता है।
बिना वजह दवा या खाद डालने से बचें
पत्तियां पीली दिखते ही तुरंत कोई भी दवा या खाद डाल देना सही तरीका नहीं है। पहले यह पता करें कि समस्या पानी की वजह से है, पोषक तत्वों की कमी से है या किसी रोग या कीट के कारण। सही कारण पता होने के बाद ही उचित उपाय करें। इससे अनावश्यक खर्च भी बचेगा और फसल को जरूरत के मुताबिक देखभाल मिल सकेगी। किसी रोग या कीट का संदेह होने पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग से सलाह लेकर ही उपचार करें।
किसान के लिए जरूरी बात
सोयाबीन की पत्तियां पीली पड़ने का मतलब हर बार बीमारी नहीं होता। पहले कारण पहचानें, फिर उपचार करें।
बारिश के बाद खेत में पानी न रुकने दें, फसल की नियमित निगरानी करें और पोषक तत्वों की कमी का संदेह होने पर मिट्टी की जांच कराएं।
समय पर सही कारण पता चल जाए तो किसान अनावश्यक दवा और खाद के खर्च से बचते हुए फसल को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सोयाबीन की पत्तियां पीली होने का सबसे आम कारण क्या है?
बारिश के बाद खेत में पानी जमा होना, पोषक तत्वों की कमी और कुछ रोग या कीट पत्तियों के पीले होने की वजह बन सकते हैं।
पुरानी सोयाबीन की पत्तियां पीली हों तो क्या संकेत मिलता है?
नीचे की पुरानी पत्तियां पहले पीली होने पर नाइट्रोजन की कमी की संभावना देखी जा सकती है। पुष्टि के लिए मिट्टी की जांच और कृषि सलाह बेहतर है।
नई पत्तियां पीली और नसें हरी हों तो क्या करें?
ऐसे लक्षण आयरन की कमी से जुड़े हो सकते हैं। मिट्टी की स्थिति जांचकर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित पोषण दें।
बारिश के बाद सोयाबीन में पानी जमा हो जाए तो क्या करें?
सबसे पहले अतिरिक्त पानी खेत से बाहर निकालें और जहां बार-बार पानी रुकता है वहां जल निकासी की व्यवस्था सुधारें।
क्या हर पीली पत्ती के लिए दवा का छिड़काव करना चाहिए?
नहीं। पहले कारण की पहचान करें। केवल पीलापन देखकर दवा डालने से अनावश्यक खर्च हो सकता है।
Smart farming and agriculture app for farmers is an innovative platform that connects farmers and rural communities across the country.
© All Copyright 2024 by Kisaan Helpline