धान की पत्तियां पीली पड़ रही हैं? यूरिया डालने से पहले जान लें असली वजह

धान की पत्तियां पीली पड़ रही हैं? यूरिया डालने से पहले जान लें असली वजह
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Kisaan Helpline

Agriculture
Aug 19, 2026

धान की पत्तियां पीली होने पर सबसे पहले देखें कि पीलापन पुरानी पत्तियों में है या नई में और खेत में पानी जमा है या नहीं। नाइट्रोजन या जिंक की कमी, अधिक पानी और कुछ रोग इसके कारण हो सकते हैं। बिना कारण जाने यूरिया या दवा डालने के बजाय खेत की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

धान की हरी फसल में अचानक पत्तियां पीली या सफेद दिखाई देने लगें तो किसान अक्सर इसे खाद की कमी मान लेते हैं। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। खेत में ज्यादा पानी, नाइट्रोजन या जिंक की कमी और कुछ रोग भी पत्तियों का रंग बदल सकते हैं। इसलिए बिना कारण जाने खाद या दवा डालने के बजाय पहले समस्या को पहचानना जरूरी है।

 

धान की पत्तियां पीली हों तो सबसे पहले क्या देखें?

 

पत्तियों में पीलापन दिखते ही पूरे खेत का निरीक्षण करें। सबसे पहले देखें कि पुरानी और नीचे की पत्तियां पीली हैं या नई पत्तियों में समस्या है।

 

इसके साथ यह भी देखें कि पीलापन पूरे खेत में है या केवल कुछ हिस्सों में। पत्तियों पर धब्बे, धारियां, कीट या पौधों की कमजोर बढ़वार जैसे लक्षण भी ध्यान से देखें।

 

अगर जरूरत लगे तो कुछ प्रभावित पौधों को जड़ सहित निकालकर देखें। स्वस्थ जड़ें सामान्य तौर पर सफेद या हल्के रंग की होती हैं। अगर जड़ें काली, भूरी, सड़ी हुई या बदबूदार हैं, तो खेत में पानी भरने या जड़ों से जुड़ी समस्या हो सकती है।

 

पुरानी पत्तियां पीली हों तो नाइट्रोजन की कमी हो सकती है

 

अगर धान की नीचे वाली पुरानी पत्तियां पहले पीली पड़ रही हैं, पौधों की बढ़वार धीमी है और कल्ले भी कम निकल रहे हैं, तो नाइट्रोजन की कमी एक वजह हो सकती है।

 

लेकिन केवल पीलापन देखकर तुरंत यूरिया डालना सही नहीं है। मिट्टी की जांच, पत्तियों के रंग और स्थानीय कृषि सलाह के आधार पर ही नाइट्रोजन की जरूरत तय करें।

 

बिना जरूरत ज्यादा यूरिया डालने से फसल को फायदा मिलने के बजाय कीट और रोग का खतरा बढ़ सकता है। पौधे कमजोर भी हो सकते हैं और गिरने की समस्या बढ़ सकती है।

 

जिंक की कमी में दिखते हैं पीले-भूरे धब्बे

 

धान में जिंक की कमी को आमतौर पर खैरा रोग कहा जाता है। इसमें पौधों की बढ़वार रुक सकती है और कल्ले कम निकल सकते हैं।

 

पत्तियों पर पीलेपन के साथ भूरे या जंग जैसे धब्बे दिखाई दे सकते हैं। अगर ऐसे लक्षण खेत में नजर रहे हैं तो जिंक की कमी की जांच कराना बेहतर है।

 

कमी की पुष्टि होने पर कृषि सलाह के अनुसार जिंक सल्फेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी सही मात्रा खेत की स्थिति और स्थानीय सिफारिश के अनुसार तय करें।

 

खेत में ज्यादा पानी भी बन सकता है वजह

 

धान को पानी की जरूरत होती है, लेकिन खेत में लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा पानी जमा रहना भी नुकसान कर सकता है।

 

लगातार पानी भरा रहने से जड़ों तक हवा कम पहुंचती है। इससे पौधे मिट्टी से पानी और पोषक तत्व ठीक से नहीं ले पाते। इसका असर पत्तियों के रंग और पौधों की बढ़वार पर दिखाई दे सकता है।

 

अगर खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा है तो जल निकासी की व्यवस्था करें। जहां बार-बार पानी रुकता है, वहां खेत की निकासी व्यवस्था को भी सुधारना जरूरी है।

 

पीलापन देखकर टुंग्रो रोग को भी करें नजरअंदाज

 

धान की पत्तियों के पीले पड़ने की एक वजह टुंग्रो रोग भी हो सकती है। इस रोग में पौधे पीले से नारंगी-पीले दिखाई दे सकते हैं। उनकी ऊंचाई कम रह सकती है और कल्ले भी कम निकलते हैं।

 

अगर खेत में कई पौधे एक साथ छोटे रह रहे हैं और उनका रंग लगातार बदल रहा है, तो इसे केवल खाद की कमी मानें। ऐसे लक्षण दिखने पर कृषि विशेषज्ञ से फसल की जांच करवाना बेहतर है।

 

किसान ये गलती बिल्कुल करें

 

पत्तियां पीली होते ही यूरिया या कोई दवा डाल देना सही तरीका नहीं है।

 

पहले यह पता करें कि समस्या पानी, पोषक तत्वों, कीट या रोग में से किस वजह से है। गलत खाद या दवा पर खर्च करने से समस्या दूर होने के बजाय लागत बढ़ सकती है।

 

खेत की जांच करते समय इन बातों पर ध्यान दें

·        पीलापन पुरानी पत्तियों में है या नई में।

·        समस्या पूरे खेत में है या कुछ जगहों पर।

·        पत्तियों पर धब्बे या धारियां हैं या नहीं।

·        पौधों की बढ़वार कैसी है।

·        कल्ले सामान्य संख्या में निकल रहे हैं या नहीं।

·        खेत में पानी जरूरत से ज्यादा जमा है या नहीं।

·        जड़ों का रंग और स्थिति कैसी है।

·        कीट या रोग के दूसरे लक्षण दिखाई दे रहे हैं या नहीं।

 

किसान के लिए सीधी सलाह

 

धान की पत्तियां पीली पड़ें तो पहले कारण पहचानें, फिर उपचार करें। अगर पानी ज्यादा है तो जल निकासी करें। पोषक तत्वों की कमी का संदेह हो तो मिट्टी की जांच कराएं। रोग या कीट के लक्षण दिखाई दें तो कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।

 

हर पीली पत्ती के लिए यूरिया या दवा जरूरी नहीं होती। सही पहचान से किसान अनावश्यक खर्च बचा सकता है और फसल को समय पर सही देखभाल दे सकता है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

 

धान की पत्तियां पीली क्यों पड़ती हैं?

 

धान की पत्तियां नाइट्रोजन या जिंक की कमी, लंबे समय तक पानी जमा रहने और कुछ रोगों के कारण पीली पड़ सकती हैं।

 

पुरानी पत्तियां पीली हों तो क्या करें?

 

नाइट्रोजन की कमी की संभावना देखें, लेकिन बिना जांच के तुरंत यूरिया डालें। मिट्टी और फसल की स्थिति देखकर ही निर्णय लें।

 

धान में खैरा रोग क्या है?

 

खैरा रोग धान में जिंक की कमी से जुड़ी समस्या है। इसमें पौधों की बढ़वार रुक सकती है और पत्तियों पर पीले तथा भूरे-जंग जैसे धब्बे दिखाई दे सकते हैं।

 

क्या पीली पत्तियां देखकर तुरंत यूरिया डालना चाहिए?

 

नहीं। पहले पीलापन किस वजह से है, इसकी पहचान करें। जरूरत होने पर ही उचित मात्रा में नाइट्रोजन दें।

 

धान के खेत में ज्यादा पानी भर जाए तो क्या करें?

 

अगर पानी जरूरत से ज्यादा जमा है तो जल निकासी की व्यवस्था करें। लगातार पानी भरे रहने से जड़ों की स्थिति खराब हो सकती है।

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