धान किसानों के लिए खुशखबरी! खेत में अजोला डालकर बचाएं खाद का खर्च, बढ़ाएं मिट्टी की ताकत

धान किसानों के लिए खुशखबरी! खेत में अजोला डालकर बचाएं खाद का खर्च, बढ़ाएं मिट्टी की ताकत
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Kisaan Helpline

Agriculture
Jun 09, 2026

धान की खेती में घटाएं लागत, बढ़ाएं मुनाफा

देशभर में धान की खेती करने वाले किसान लगातार बढ़ती खाद और उर्वरकों की कीमतों से परेशान हैं। ऐसे समय में कृषि विशेषज्ञ किसानों को एक प्राकृतिक और कम खर्च वाले विकल्प की सलाह दे रहे हैं, जिसका नाम है अजोला। यह छोटा सा जल पौधा न केवल रासायनिक खादों पर होने वाले खर्च को कम करता है, बल्कि खेत की मिट्टी को भी लंबे समय तक उपजाऊ बनाए रखने में मदद करता है।

आखिर क्या है अजोला?

अजोला एक हरे रंग का छोटा पौधा होता है जो पानी की सतह पर तेजी से फैलता है। इसकी खास बात यह है कि इसमें मौजूद सूक्ष्म जीव हवा से नाइट्रोजन लेकर उसे पौधों के लिए उपयोगी पोषक तत्व में बदल देते हैं। यही कारण है कि इसे प्राकृतिक जैविक खाद के रूप में जाना जाता है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अजोला का नियमित उपयोग करने वाले किसानों को रासायनिक खादों पर कम खर्च करना पड़ता है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

धान के खेत में कब और कैसे डालें?

विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई के लगभग 15 से 20 दिन बाद खेत में अजोला छोड़ा जाता है। खेत में पर्याप्त पानी होने पर यह तेजी से फैलकर पूरी सतह को ढक लेता है। कुछ ही दिनों में अजोला खेत में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने लगता है। समय के साथ यह सड़कर मिट्टी में मिल जाता है और फसल को प्राकृतिक रूप से पोषण देता है।

यूरिया की जरूरत हो सकती है कम

धान की फसल को अच्छी बढ़वार के लिए अधिक मात्रा में नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। सामान्य तौर पर किसान इसकी पूर्ति यूरिया के माध्यम से करते हैं।

लेकिन अजोला खेत में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इसके उपयोग से यूरिया और अन्य नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों की आवश्यकता में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। इससे किसानों की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ने की संभावना रहती है।

मिट्टी की सेहत भी होगी मजबूत

लगातार रासायनिक खादों के उपयोग से कई बार मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने लगती है। वहीं अजोला मिट्टी में जैविक कार्बन और आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाता है।

इससे मिट्टी नरम और उपजाऊ बनी रहती है। लंबे समय तक खेती करने पर भी जमीन की उत्पादन क्षमता बेहतर बनी रहती है।

खरपतवार से भी मिलेगा छुटकारा

धान की खेती में खरपतवार एक बड़ी समस्या होती है। अजोला खेत की पानी वाली सतह को पूरी तरह ढक लेता है, जिससे सूर्य की रोशनी नीचे तक नहीं पहुंच पाती।

रोशनी की कमी के कारण खरपतवार की वृद्धि कम हो जाती है। इससे किसानों को निराई-गुड़ाई पर कम खर्च करना पड़ता है और मजदूरी की लागत भी घटती है।


पशुपालकों के लिए भी फायदेमंद

अजोला केवल खेती के लिए ही नहीं, बल्कि पशुपालन के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है। इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जो पशुओं के लिए पौष्टिक आहार का काम करता है।

कई किसान अजोला का उत्पादन करके अपने गाय-भैंसों को चारे के रूप में खिलाते हैं, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन में भी लाभ देखने को मिलता है।

किसानों के लिए सलाह

यदि आप इस खरीफ सीजन में धान की खेती कर रहे हैं, तो अजोला का उपयोग आपके लिए लाभदायक साबित हो सकता है। इससे खाद का खर्च कम होगा, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और खेत में खरपतवार की समस्या भी कम होगी। साथ ही पशुपालन करने वाले किसानों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।

कम लागत और बेहतर उत्पादन की दिशा में अजोला धान किसानों के लिए एक प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनकर उभर रहा है।

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