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बारिश का मौसम सब्जियों की खेती के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन लगातार नमी और जलभराव के कारण बेल वाली सब्जियों में सड़न और बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में कृषि विशेषज्ञ किसानों को मचान विधि अपनाने की सलाह दे रहे हैं। यह तकनीक न केवल फसल को सुरक्षित रखती है, बल्कि कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन दिलाने में मदद करती है।
अगर आप लौकी, तोरई, करेला, खीरा या परवल जैसी बेल वाली सब्जियों की खेती करते हैं, तो यह तरीका आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
क्या है मचान विधि?
मचान विधि में बेल वाली फसलों को जमीन पर फैलाने के बजाय बांस, लकड़ी, तार या मजबूत जाल के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है। इससे पौधे जमीन से ऊपर रहते हैं और फल मिट्टी के सीधे संपर्क में नहीं आते।
इस वजह से बारिश का पानी फलों पर नहीं ठहरता और सड़न की संभावना काफी कम हो जाती है। साथ ही फल साफ, स्वस्थ और बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले मिलते हैं।
कम जमीन में भी ज्यादा खेती
छोटे और सीमित खेत वाले किसानों के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी है। क्योंकि बेलें ऊपर की ओर बढ़ती हैं, इसलिए नीचे की जमीन खाली रहती है।
किसान चाहें तो उसी जगह पर धनिया, पालक या दूसरी पत्तेदार सब्जियां उगाकर एक ही खेत से अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते हैं।
बीमारी और कीटों का खतरा भी कम
मचान पर चढ़ी फसलों को भरपूर धूप और हवा मिलती है। इससे पौधों में नमी कम रुकती है और फफूंद व कीटों का प्रकोप भी घट जाता है।
नतीजा यह होता है कि दवाओं का खर्च कम होता है और फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
ऐसे तैयार करें मचान
● खेत में 6 से 8 फीट लंबे बांस या मजबूत खंभे लगाएं।
● इनके ऊपर मजबूत तार, रस्सी या प्लास्टिक का जाल बांधें।
● जब बेल बढ़ने लगे तो उसे धीरे-धीरे जाल पर चढ़ा दें।
● समय-समय पर बेलों की दिशा ठीक करते रहें ताकि पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती रहे।
बढ़ेगी पैदावार, मिलेगा बेहतर दाम
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मचान विधि अपनाने से फल साफ-सुथरे और अच्छी गुणवत्ता के होते हैं। इससे बाजार में बेहतर कीमत मिलती है और उत्पादन भी बढ़ता है।
किसान भाइयों के लिए सलाह
यदि आप इस मानसून बेल वाली सब्जियों की खेती कर रहे हैं, तो मचान विधि जरूर अपनाएं। थोड़ी-सी मेहनत आपकी फसल को सुरक्षित रखने के साथ उत्पादन और कमाई दोनों बढ़ा सकती है।
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