आलू किसानों के लिए अलर्ट! मानसून में तेजी से फैल रहा है पिछेता रोग, जानें बचाव के आसान उपाय

आलू किसानों के लिए अलर्ट! मानसून में तेजी से फैल रहा है पिछेता रोग, जानें बचाव के आसान उपाय
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Kisaan Helpline

Agriculture
Jul 20, 2026

मानसून के मौसम में आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने चेतावनी दी है कि मौजूदा मौसम में पिछेता रोग (लेट ब्लाइट) तेजी से फैल सकता है। अगर समय पर इसकी पहचान और रोकथाम नहीं की गई, तो कुछ ही दिनों में पूरी फसल खराब होने का खतरा रहता है।

आखिर क्या है पिछेता रोग?

पिछेता रोग आलू की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है। यह एक फफूंद के कारण फैलता है, जो ठंडे और नम मौसम में बहुत तेजी से बढ़ता है। मानसून के दौरान लगातार नमी, हल्की बारिश और बादलों वाला मौसम इस बीमारी के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।

एक बार रोग फैलने के बाद यह तेजी से पूरे खेत में पहुंच जाता है और हरे-भरे पौधे कुछ ही दिनों में काले पड़ने लगते हैं।

ऐसे पहचानें बीमारी की शुरुआती निशानी

किसान भाई रोज सुबह या शाम अपने खेत का निरीक्षण जरूर करें। यदि पौधों की निचली पत्तियों के किनारों पर हल्के पानी जैसे धब्बे दिखाई दें और धीरे-धीरे उनका रंग गहरा होकर काला या भूरा होने लगे, तो यह पिछेता रोग का संकेत हो सकता है।

यदि समय पर रोकथाम नहीं की गई, तो यह संक्रमण जमीन के अंदर मौजूद आलू तक पहुंच जाता है। इसके बाद आलू अंदर से लाल-भूरे रंग के होने लगते हैं, सड़ जाते हैं और उनमें दुर्गंध आने लगती है।

फसल को कैसे बचाएं?

केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान की सलाह है कि किसान रोग की शुरुआत से पहले ही बचाव के उपाय अपनाएं।

● मैनकोजेब या क्लोरोथालोनिल युक्त फफूंदनाशी का छिड़काव करें।
● प्रति हेक्टेयर लगभग 1,000 लीटर पानी में 2 से 2.5 किलोग्राम दवा मिलाकर पूरे खेत में समान रूप से छिड़काव करें।
● जरूरत पड़ने पर हर 10 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करें।
● खेत में पानी का जमाव न होने दें और नियमित निगरानी करते रहें।

समय पर सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछेता रोग का इलाज बाद में करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन समय रहते पहचान और सही दवा का छिड़काव करने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।

किसान भाइयों के लिए सलाह

मानसून के दौरान आलू के खेत की नियमित निगरानी करें। पत्तियों में हल्का भी बदलाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर उठाया गया एक छोटा कदम आपकी पूरी मेहनत और फसल को सुरक्षित रख सकता है।

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