Social Share:
आम की खेती से अधिक उपज लेने के लिए जून माह में किये जाने वाले महत्वपूर्ण कृषि कार्य
आम की खेती से अधिक उपज लेने के लिए जून माह में किये जाने वाले महत्वपूर्ण कृषि कार्य

आम के पौधे की देखरेख उसके समुचित फलन एवं पूर्ण उत्पादन के लिए आवश्यक है। पौधों को लगाने के बाद पौधों के पूर्ण रूप से स्थापित होने तक सिंचाई करें। प्रारंभिक दो-तीन वर्षों तक लू से बचाने के लिए सिंचाई करें। जमीन से 80 सें.मी. की ऊंचाई तक की शाखाओं को निकाल दें, जिससे मुख्य तने का समुचित विकास हो सकें।

आम में ग्राफ्टिंग का कार्य इस माह शुरू करें। ग्राफ्टिंग के स्थान के नीचे से कोई शाखा नहीं निकलनी चाहिए। ऊपर की 3-4 शाखाओं को बढ़ने दें। बड़े छत्रक वाले घने वृक्षों में न फलने वाली बीच की शाखाओं को काट दें। फलों को तोड़ने के बाद मंजर के साथ-साथ 2-3 सें.मी. टहनियों को काट दें, ताकि स्वस्थ्य शाखायें निकलें। अगले मौसम में अच्छा फलन होगा।

आम की मक्खी के नियंत्रण के लिए मिथाइलयूजीनाल ट्रैप का प्रयोग प्लाई/ लकड़ी के टुकड़े को अल्कोहल, मिथाइल मैलाथियान (6:4:1) के घोल में 48 घंटे डुबोने के पश्चात पेड़ पर लटका दें तथा ट्रैप को दो माह बाद बदल दें। इसके साथ ही मिलीबग की रोकथाम के लिए 2 प्रतिशत मिथाइल की पैराथिऑन का उपयोग करना चाहिए।

आम के पौधों को 10X10 मीटर की दूरी पर लगाएं। किंतु सघन बागवानी में इसे 2.5 से 4 मीटर की दूरी पर लगायें। पौधा लगाने के पूर्व खेत में रेखांकन कर पौधों का स्थान सुनिश्चित कर लें। पौधे लगाने के लिए 1X1X1 मीटर आकार का गड्ढा खोदें। वर्षा प्रारंभ होने के पूर्व, जून में 20-30 कि.ग्रा. सड़ी गोबर की खाद, 2 कि.ग्रा. नीम की खली, 1 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 100 ग्राम मिथाइल पैरामिथियॉन की डस्ट (10 (प्रतिशत) या 20 ग्राम थीमेट 10-जी को खेत की ऊपरी सतह की मृदा के साथ मिला कर गड्ढों को अच्छी, तरह भर दें। दो-तीन बार बारिश होने के बाद जब मिट्टी दब जाए तब पूर्व चिन्हित स्थान पर खुरपी की सहायता से पौधे की पिंडी के आकार की जगह बनाकर पौधा लगायें। पौधा लगाने के बाद आस-पास की मिट्टी को अच्छी तरह दबाकर एक थाला बना दें एवं हल्की सिंचाई करें।

बागवानी फसलों का उत्पादन एवं प्रबंधन यदि कटाई-छंटाई की प्रक्रिया एवं मृदा तथा पत्तों की जांच पूर्ण न हुई हो, तो उसे अवश्य पूरा कर लें। मध्य व देर से पकने वाली प्रजातियों की तुड़ाई करें। खेत की जुताई करें तथा पौधों के क्षत्रक के नीचे छोटे ट्रैक्टर या पावर टिलर से पत्तियों एवं मल्चिंग (पलवार) के अवशेषों को मृदा में अच्छी तरह से मिला दें।