अगर आप सब्जी की खेती करते हैं और कम लागत में अच्छी पैदावार चाहते हैं, तो बुवाई से पहले खेत में ढैंचा (Dhaincha) या सनई (Sunhemp) की बुवाई करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यह हरी खाद (Green Manure) का आसान और प्राकृतिक तरीका है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक खाद पर खर्च कम होता है और फसल की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलता है।
सब्जी लगाने से पहले क्यों बोएं ढैंचा या सनई?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सब्जियों की बुवाई से लगभग 40 से 45 दिन पहले खेत में ढैंचा या सनई की बुवाई करनी चाहिए। जब ये पौधे 40-50 दिन के हो जाएं और लगभग घुटनों तक बढ़ जाएं, तब इन्हें खेत में ही पलटकर मिट्टी में मिला देना चाहिए।
कुछ दिनों बाद ये पौधे पूरी तरह सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं और प्राकृतिक खाद का काम करते हैं।
मिट्टी की उर्वरता में होता है सुधार
ढैंचा और सनई जैसी दलहनी फसलें हवा से नाइट्रोजन लेकर उसे मिट्टी में उपलब्ध कराती हैं। इससे मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्व बढ़ते हैं।
इसके अलावा हरी खाद के कारण—
● मिट्टी भुरभुरी और मुलायम बनती है।
● जैविक कार्बन (Organic Carbon) बढ़ता है।
● लाभदायक सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि होती है।
● मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है।
जड़ों का बेहतर विकास होता है
जब मिट्टी नरम और भुरभुरी होती है, तब सब्जियों की जड़ें आसानी से फैलती हैं। इससे पौधे मजबूत बनते हैं और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग कर पाते हैं।
हरी खाद से तैयार मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता भी बढ़ जाती है, जिससे गर्मी के मौसम में भी फसल को नमी मिलती रहती है।
रासायनिक खाद पर खर्च हो सकता है कम
अगर खेत में पहले से पर्याप्त हरी खाद मिलाई गई हो, तो रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता पहले की तुलना में कम हो सकती है।
इससे किसानों को खाद पर होने वाले खर्च में राहत मिलती है और मिट्टी की सेहत भी लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है। हालांकि, उर्वरकों का उपयोग हमेशा मिट्टी परीक्षण (Soil Test) की रिपोर्ट और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
बेहतर गुणवत्ता की सब्जियां मिलती हैं
स्वस्थ मिट्टी में उगाई गई फसलें अधिक मजबूत होती हैं और उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है। अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियों की बाजार में मांग अधिक रहती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
हरी खाद अपनाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
● सब्जी की बुवाई से 40-45 दिन पहले ढैंचा या सनई की बुवाई करें।
● पौधे 40-50 दिन के होने पर उन्हें मिट्टी में पलट दें।
● इसके बाद 15-20 दिन का समय दें ताकि हरी खाद अच्छी तरह सड़ जाए।
● फिर मुख्य सब्जी की फसल की बुवाई करें।
● अधिक लाभ के लिए मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें।
यदि आप सब्जी की खेती में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करना और बेहतर गुणवत्ता की फसल प्राप्त करना चाहते हैं, तो ढैंचा या सनई जैसी हरी खाद का उपयोग एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। यह तरीका मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ-साथ लंबे समय तक टिकाऊ खेती में भी मदद करता है। सही समय पर हरी खाद का उपयोग और संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
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