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मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के कई इलाकों में इन दिनों संतरे की फसल में एक जैसी समस्या देखने को मिल रही है। किसान बता रहे हैं कि पौधों की पत्तियां पीली पड़ रही हैं, झड़ने लगी हैं और साथ ही फल भी समय से पहले पीले होकर गिर रहे हैं। यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इसका सीधा असर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर पड़ता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से संतरे के पौधों की जड़ों से जुड़ी हुई है। बीते 15–20 दिनों के मौसम पर नजर डालें तो दिन में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहा है, जबकि रात में ठंड बढ़ गई है। इस तरह के असंतुलित मौसम में पौधों की जड़ें मिट्टी से पोषक तत्व सही तरीके से नहीं ले पातीं।
इसी के साथ, यह मौसम फायटोपथोरा और अन्य फफूंद (फंगस) के पनपने के लिए भी अनुकूल हो जाता है। नतीजतन, पौधों पर दोहरा दबाव बनता है—एक ओर फल पकने की प्रक्रिया और दूसरी ओर जड़ तंत्र की कमजोरी।
जब जड़ें कमजोर हो जाती हैं, तो पौधे को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। इसका असर सबसे पहले पत्तियों के पीला होने, फिर झड़ने और अंत में फलों के गिरने के रूप में दिखाई देता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या आगे चलकर पूरे बगीचे की उत्पादकता को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस स्थिति में मिट्टी और जड़ों की सेहत सुधारना सबसे जरूरी है। इसके लिए किसान निम्न उपाय अपनाएं:
पौधे के चारों ओर जमीन में नीलाथोता और चुना का उचित मात्रा में प्रयोग करें।
साथ ही न्यूट्रीमैक्स और नाइट्रो N-21 को पौधे के तने से लगभग 2 से 3 फीट की दूरी पर मिट्टी में मिलाएं।
जल निकास पर भी ध्यान दें, ताकि खेत में पानी जमा न हो।
यह समस्या अधिकतर जड़ों की कमजोरी, पोषण की कमी और अचानक बदलते मौसम के कारण होती है।
हाँ, फायटोपथोरा और अन्य फंगस रोग इस मौसम में जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे फल गिरने लगते हैं।
नहीं, केवल खाद देना काफी नहीं है। जड़ों की सेहत, मिट्टी की स्थिति और जल निकास पर भी ध्यान देना जरूरी है।
जब पत्तियां पीली पड़ने लगें और फल गिरना शुरू हो, उसी समय उपचार करना सबसे प्रभावी रहता है।
हाँ, अगर शुरुआती अवस्था में सही उपाय किए जाएं तो काफी हद तक नुकसान रोका जा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे इस तरह की महत्वपूर्ण जानकारी को आपस में साझा करें, ताकि अधिक से अधिक किसान समय रहते सही कदम उठा सकें और संतरे की फसल को होने वाले नुकसान से बचा सकें।
संतरे में फल गिरने की समस्या केवल ऊपर से दिखाई देने वाला लक्षण है, असली कारण जड़ों की कमजोरी और मौसम का असंतुलन है। सही समय पर उचित प्रबंधन और पोषण देकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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