खरीफ 2026 में किसानों को बड़ी राहत: सस्ती मिलेगी डीएपी, पोटाश और अन्य खाद

खरीफ 2026 में किसानों को बड़ी राहत: सस्ती मिलेगी डीएपी, पोटाश और अन्य खाद
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Kisaan Helpline

Agriculture
Apr 09, 2026

महंगी खाद से राहत देने के लिए सरकार का बड़ा फैसला

खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। खेती में खाद का खर्च सबसे अधिक होता है और हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों के कच्चे माल जैसे फॉस्फेट, पोटाश और सल्फर की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy - NBS) को मंजूरी दी है, जिससे किसानों को आवश्यक उर्वरक किफायती दरों पर उपलब्ध हो सकेंगे।


सब्सिडी बजट में 4300 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी

सरकार ने खरीफ 2026 के लिए खाद सब्सिडी का बजट बढ़ाकर लगभग 41,533.81 करोड़ रुपये कर दिया है। यह पिछले वर्ष खरीफ 2025 के बजट 37,216 करोड़ रुपये से करीब 4,317 करोड़ रुपये अधिक है। इस बढ़े हुए बजट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों को महंगी खाद न खरीदनी पड़े। सरकार अतिरिक्त लागत को स्वयं वहन करेगी, जिससे किसानों को उर्वरक पहले की तरह किफायती दरों पर मिलते रहेंगे।


NBS स्कीम क्या है और इसका लाभ

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) एक ऐसी प्रणाली है जिसमें उर्वरकों में मौजूद मुख्य पोषक तत्वों—नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K) और सल्फर (S)—के आधार पर सब्सिडी तय की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और फसल उत्पादन में सुधार हो।


इस योजना के तहत सरकार सब्सिडी सीधे खाद कंपनियों को देती है, जिससे वे किसानों को निर्धारित और नियंत्रित कीमत पर उर्वरक उपलब्ध करा सकें।


28 प्रकार की P&K खादों पर सब्सिडी

सरकार ने इस बार कुल 28 ग्रेड की फॉस्फेटिक और पोटाशिक (P&K) खादों पर सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। इनमें डीएपी (DAP), म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP), एनपीके (NPK), एनपीकेएस (NPKS) और सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक शामिल हैं। ये सभी उर्वरक फसलों की वृद्धि, जड़ विकास और उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


नई सब्सिडी दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी हैं और 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगी, जिससे पूरे खरीफ सीजन में किसानों को इसका लाभ मिलेगा।


अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव से सुरक्षा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों के कच्चे माल की कीमतों में लगातार बदलाव होता रहता है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इस प्रकार की वैश्विक महंगाई का बोझ किसानों पर न पड़े। यदि कीमतों में वृद्धि होती है तो सरकार सब्सिडी के माध्यम से संतुलन बनाए रखेगी, जिससे किसानों को स्थिर और किफायती दरों पर खाद मिलती रहेगी।


कालाबाजारी पर नियंत्रण और उपलब्धता सुनिश्चित

सरकार की इस नीति से खाद की कालाबाजारी और अनियमित कीमतों पर भी नियंत्रण रहेगा। खाद कंपनियों को सीधे सब्सिडी मिलने से सप्लाई सिस्टम मजबूत होता है और बाजार में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध रहती है। सरकार इस बात पर भी ध्यान दे रही है कि किसी भी राज्य में खाद की कमी न हो और किसानों को बुवाई के समय आसानी से खाद मिल सके।


खरीफ फसलों के लिए होगा विशेष लाभ

इस निर्णय का सबसे अधिक लाभ खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, सोयाबीन और दालों की खेती करने वाले किसानों को मिलेगा। समय पर और उचित दर पर खाद उपलब्ध होने से फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी।


खेती की लागत कम, किसानों की आय में बढ़ोतरी

सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध होने से किसानों की खेती की लागत में कमी आएगी। इससे उनकी शुद्ध आय में वृद्धि होगी और खेती अधिक लाभकारी बनेगी। यह कदम किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और कृषि क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



खरीफ सीजन 2026 के लिए सरकार द्वारा बढ़ाई गई खाद सब्सिडी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है। इससे न केवल उर्वरकों की कीमतें नियंत्रित रहेंगी, बल्कि उनकी उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। यदि किसान संतुलित तरीके से उर्वरकों का उपयोग करें, तो वे इस योजना का पूरा लाभ उठाकर अपनी पैदावार और आय दोनों बढ़ा सकते हैं।

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