अब कम पानी में भी होगी धान की बंपर खेती! किसान अपनाएं ये नई तकनीक, खर्च भी होगा कम

अब कम पानी में भी होगी धान की बंपर खेती! किसान अपनाएं ये नई तकनीक, खर्च भी होगा कम
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Kisaan Helpline

Agriculture
May 20, 2026

हर साल धान की खेती शुरू होते ही किसानों की सबसे बड़ी चिंता होती है — पानी। कई राज्यों में भूजल तेजी से नीचे जा रहा है और बारिश भी पहले जैसी भरोसेमंद नहीं रही। ऐसे में किसानों को डर रहता है कि कम पानी में धान की अच्छी पैदावार कैसे होगी?


लेकिन अब खेती के तरीके बदल रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान पारंपरिक रोपाई की बजाय नई तकनीकों को अपनाएं, सही किस्म चुनें और सिंचाई का सही प्रबंधन करें, तो कम पानी में भी धान की शानदार फसल ली जा सकती है।


धान की सीधी बुवाई बन रही किसानों की पहली पसंद

हरियाणा समेत कई राज्यों में अब किसान धान की सीधी बुवाई (DSR तकनीक) तेजी से अपना रहे हैं। इस तकनीक में नर्सरी तैयार करने और खेत में रोपाई करने की जरूरत कम पड़ती है।


विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरीके से लगभग 30 प्रतिशत तक पानी की बचत हो सकती है। साथ ही मजदूरी, ट्रैक्टर, डीजल और खेत तैयार करने का खर्च भी काफी घट जाता है।


सीधी बुवाई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि खेत में लगातार पानी भरकर रखने की जरूरत नहीं होती। इससे मिट्टी की सेहत बेहतर रहती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है।


हर समय पानी भरना जरूरी नहीं

अक्सर किसान मानते हैं कि धान की फसल में हमेशा पानी भरा रहना चाहिए। लेकिन कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि धान को केवल पर्याप्त नमी की जरूरत होती है।


अगर खेत में हल्की नमी बनी रहे, तो पौधों की जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं। इससे पौधों में ज्यादा कल्ले निकलते हैं और उत्पादन बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।


साथ ही ज्यादा पानी से होने वाली बीमारियां और कीटों का खतरा भी कम हो जाता है।


कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली धान की किस्में

धान की खेती में सही वैरायटी का चुनाव बेहद जरूरी माना जाता है। आज बाजार में कई ऐसी किस्में उपलब्ध हैं जो कम सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं।


कृषि विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई कुछ लोकप्रिय किस्में:


  • 1509

  • पीबी 1692

  • वीएनआर 2111

  • अभिनव

  • आरएस 100

  • सिजेंटा 9001


ये किस्में जल्दी तैयार हो जाती हैं और कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के लिए जानी जाती हैं। वहीं जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या रहती है, वहां किसान सुधा, वैदेही, जलमग्न और जलहरी जैसी किस्मों को चुन सकते हैं।


मिट्टी की जांच से होगा बड़ा फायदा

धान की बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराना बेहद जरूरी है। इससे यह पता चलता है कि खेत में कौन-से पोषक तत्वों की कमी है। इसके आधार पर किसान सही मात्रा में खाद और उर्वरक डाल सकते हैं। इससे फालतू खर्च बचता है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।


गहरी जुताई से कम होंगे कीट और खरपतवार

खेती विशेषज्ञों का कहना है कि धान लगाने से पहले खेत की गहरी जुताई जरूर करनी चाहिए। इससे मिट्टी में छिपे कीट और उनके अंडे धूप में आकर नष्ट हो जाते हैं।


इसका फायदा यह होता है कि फसल में कीट और खरपतवार का खतरा कम हो जाता है और किसान को दवाइयों पर कम खर्च करना पड़ता है।


खेत में नमी बनाए रखना ज्यादा फायदेमंद

धान की फसल में जरूरत से ज्यादा पानी भरने से कई बार पौधों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। इसलिए खेत में केवल हल्की नमी बनाए रखना बेहतर माना जाता है।


इसके अलावा समय-समय पर निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी है। इससे पौधों को सही पोषण मिलता है और फसल तेजी से बढ़ती है।


किसानों के लिए जरूरी सलाह

  • धान की सीधी बुवाई तकनीक अपनाने की कोशिश करें

  • कम पानी वाली वैरायटी का चयन करें

  • खेत में लगातार पानी भरकर न रखें

  • मिट्टी परीक्षण जरूर करवाएं

  • समय पर खरपतवार नियंत्रण करें

  • सिंचाई का सही प्रबंधन अपनाएं



बदलते मौसम और घटते भूजल स्तर के बीच अब धान की खेती में नई सोच अपनाने का समय आ गया है। सही तकनीक, बेहतर किस्म और संतुलित सिंचाई से किसान कम पानी में भी अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं। इससे लागत घटेगी, पानी बचेगा और खेती ज्यादा मुनाफे वाली बनेगी।

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