भारत में गाय के गोबर को पहले केवल खेतों में खाद या उपले बनाने तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब यही गोबर किसानों और युवाओं के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनता जा रहा है। बदलते समय के साथ लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहे हैं और केमिकल वाले उत्पादों की जगह प्राकृतिक और ईको-फ्रेंडली चीजों को अपनाने लगे हैं। यही वजह है कि गाय के गोबर से बने प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।
आज देश के कई किसान और छोटे उद्यमी गोबर से बने उत्पाद बेचकर हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस बिजनेस को शुरू करने के लिए बहुत बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती। गांव में रहने वाला कोई भी व्यक्ति कम लागत में इसकी शुरुआत कर सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में ऑर्गेनिक खेती, वेस्ट मैनेजमेंट और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदली है। शहरों में रहने वाले लोग अब ऐसे प्रोडक्ट्स खरीदना पसंद कर रहे हैं जो प्राकृतिक हों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
इसी वजह से गोबर से बनी खाद, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले, दीये और मूर्तियों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी इन उत्पादों की अच्छी बिक्री हो रही है।
आज के समय में जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। केमिकल खाद के ज्यादा इस्तेमाल से जमीन की उर्वरक क्षमता कम होती जा रही है। ऐसे में वर्मी कंपोस्ट यानी जैविक खाद किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है।
गाय के गोबर और केंचुओं की मदद से तैयार की गई वर्मी कंपोस्ट मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करती है। इसकी मांग बड़े किसानों से लेकर घरों में गार्डनिंग करने वाले लोगों तक में काफी ज्यादा है।
अगर किसान छोटे स्तर पर भी वर्मी कंपोस्ट यूनिट शुरू करें तो वे हर महीने अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। पैकिंग और ब्रांडिंग के जरिए इसे ऑनलाइन भी बेचा जा सकता है।
आजकल मार्केट में गोबर से बने बायोडिग्रेडेबल गमलों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। ये गमले पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं और इन्हें सीधे मिट्टी में दबाया जा सकता है।
इन गमलों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये बाद में खाद का काम भी करते हैं। नर्सरी, गार्डनिंग स्टोर और शहरों में पौधे लगाने वाले लोग इन्हें काफी पसंद कर रहे हैं।
गाय के गोबर से बायोगैस बनाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब इसे बड़े बिजनेस मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। गोबर से निकलने वाली गैस का इस्तेमाल खाना बनाने, बिजली उत्पादन और सीएनजी के विकल्प के रूप में भी किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बायोगैस सेक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। सरकार भी इस दिशा में कई योजनाओं के जरिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।
आज के समय में लोग केमिकल वाली अगरबत्तियों से दूरी बना रहे हैं और प्राकृतिक उत्पादों को अपनाने लगे हैं। ऐसे में गाय के गोबर से बनी धूपबत्ती और अगरबत्ती की मांग तेजी से बढ़ रही है।
इन उत्पादों में कई बार जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक खुशबू का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ये स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर मानी जाती हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इनकी अच्छी बिक्री देखने को मिल रही है।
त्योहारों के समय गोबर से बने दीये, शुभ-लाभ चिह्न और गणपति मूर्तियों की मांग काफी बढ़ जाती है। लोग अब ऐसी मूर्तियां पसंद कर रहे हैं जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
गोबर से बनी मूर्तियां पानी में आसानी से घुल जाती हैं और प्रदूषण भी नहीं फैलातीं। यही वजह है कि हर साल इनकी बिक्री बढ़ रही है।
इस बिजनेस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे गांव में रहकर भी आसानी से शुरू किया जा सकता है। अगर किसी के पास गाय या डेयरी है तो उसके लिए यह कम लागत वाला शानदार बिजनेस साबित हो सकता है। महिलाएं और युवा भी घर से इस काम की शुरुआत कर सकते हैं। सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की मदद से अपने प्रोडक्ट्स को शहरों तक पहुंचाया जा सकता है।
केंद्र और राज्य सरकारें ऑर्गेनिक खेती और गोबर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। कई जगहों पर प्रशिक्षण और सब्सिडी की सुविधा भी दी जा रही है।
अगर किसान सही योजना और मार्केटिंग के साथ इस क्षेत्र में कदम रखते हैं तो आने वाले समय में यह बिजनेस उनकी आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकता है।
आज के समय में जहां लोग नौकरी की तलाश में परेशान हैं, वहीं गाय के गोबर से जुड़े बिजनेस नए अवसर पैदा कर रहे हैं। कम लागत, आसान शुरुआत और बढ़ती डिमांड इसे एक शानदार बिजनेस आइडिया बनाती है।
अगर सही तरीके से काम किया जाए तो गाय का गोबर केवल खेत की खाद नहीं बल्कि “ग्रीन गोल्ड” साबित हो सकता है, जो गांवों की अर्थव्यवस्था बदलने की ताकत रखता है।
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