फसलों में कीटों से हैं परेशान? क्या लहसुन-मिर्च का देसी घोल बन सकता है किसानों का सस्ता और असरदार हथियार!

फसलों में कीटों से हैं परेशान? क्या लहसुन-मिर्च का देसी घोल बन सकता है किसानों का सस्ता और असरदार हथियार!
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Kisaan Helpline

Agriculture
Jun 18, 2026

फसलों में कीटों का प्रकोप किसानों के लिए हर साल बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। कीड़ों से बचाव के लिए जहां आज किसान महंगे रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, वहीं पुराने समय में किसान प्राकृतिक और घरेलू उपायों से भी फसलों की सुरक्षा करते थे। इन्हीं पारंपरिक उपायों में से एक लहसुन और मिर्च का जैविक घोल है, जिसे आज भी कई किसान कीट नियंत्रण के लिए उपयोगी मानते हैं।

आखिर क्यों चर्चा में है लहसुन-मिर्च का घोल?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लहसुन और मिर्च में मौजूद प्राकृतिक तत्व कई हानिकारक कीटों को फसल से दूर रखने में मदद कर सकते हैं। लहसुन में पाए जाने वाले सल्फर यौगिक और मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन की तेज गंध कीटों को आकर्षित नहीं होने देती। यही वजह है कि यह घोल पारंपरिक खेती में एक प्राकृतिक कीट प्रबंधन उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

कैसे तैयार किया जाता है यह देसी घोल?

किसान लहसुन, हरी या लाल मिर्च, नीम की पत्तियां और गोमूत्र को पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सड़ने के लिए छोड़ देते हैं। इसके बाद तैयार मिश्रण को छानकर पानी में मिलाया जाता है और फसलों पर छिड़काव किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घोल की तेज गंध और प्राकृतिक गुण कई प्रकार के कीटों को फसल से दूर रखने में मदद कर सकते हैं।

किन कीटों पर दिख सकता है असर?

जानकारों के मुताबिक इस जैविक घोल का उपयोग विशेष रूप से माहू (एफिड), सफेद मक्खी, थ्रिप्स और पत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों के नियंत्रण में किया जाता है। हालांकि इसका प्रभाव फसल, मौसम और कीटों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

किसानों को क्या हो सकता है फायदा?

रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में यह उपाय कम लागत वाला और पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। साथ ही इससे मिट्टी की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव कम पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीटों का दबाव अधिक हो तो 10 से 12 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि लहसुन-मिर्च का घोल पारंपरिक और जैविक खेती में उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन अधिक कीट प्रकोप की स्थिति में किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह जरूर लेनी चाहिए। किसी भी नए घोल का उपयोग बड़े क्षेत्र में करने से पहले छोटे हिस्से में परीक्षण करना बेहतर रहता है।

खेती की बढ़ती लागत के बीच लहसुन-मिर्च का यह पारंपरिक उपाय किसानों के लिए कम खर्च में फसल सुरक्षा का एक प्रभावी विकल्प बन सकता है। हालांकि बेहतर परिणामों के लिए किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही इसका उपयोग करना चाहिए।

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