बढ़ते तापमान के बीच किसानों के लिए नई कृषि सलाह: गेहूं, प्याज-टमाटर की फसल संभालें, मूंग-उड़द और भिंडी की करें समय पर बुवाई

बढ़ते तापमान के बीच किसानों के लिए नई कृषि सलाह: गेहूं, प्याज-टमाटर की फसल संभालें, मूंग-उड़द और भिंडी की करें समय पर बुवाई
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Kisaan Helpline

Agriculture
Mar 05, 2026

देश के कई हिस्सों में फरवरी के अंतिम सप्ताह से ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। मौसम के इस बदलाव को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अपनी फसलों की देखभाल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्मी के बढ़ते प्रभाव के कारण खेतों में खड़ी फसलों और सब्जियों की सिंचाई, कीट-रोग नियंत्रण और नई फसलों की बुवाई सही समय पर करना बेहद जरूरी है। यदि किसान मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन अपनाते हैं तो वे उत्पादन में गिरावट से बच सकते हैं।

 

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान बढ़ने के कारण खेत की नमी तेजी से कम होने लगती है। इसलिए किसानों को जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए ताकि फसल को पर्याप्त नमी मिलती रहे। सिंचाई करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि तेज हवा चल रही हो, क्योंकि तेज हवा में पानी देने से पौधों के झुकने या गिरने की संभावना बढ़ जाती है। शांत मौसम में सिंचाई करने से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है और फसल को बेहतर लाभ मिलता है।

 

मार्च में मूंग और उड़द की बुवाई का सही समय

 

मार्च का महीना गर्मी की दलहनी फसलों की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस समय किसान मूंग और उड़द की खेती की तैयारी शुरू कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर उत्पादन के लिए हमेशा प्रमाणित और उन्नत बीजों का ही उपयोग करना चाहिए। मूंग की खेती के लिए पूसा विशाल, पूसा बैसाखी, पीडीएम-11 और एसएमएल-32 जैसी किस्में अच्छी मानी जाती हैं। ये किस्में कम समय में पकने के साथ अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती हैं।

 

इसी तरह उड़द की खेती के लिए पंत उड़द-19, पंत उड़द-30, पंत उड़द-35 और पीडीयू-1 किस्मों को किसानों के लिए उपयुक्त बताया गया है। बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना बहुत जरूरी होता है। किसान बीजों को राइजोबियम कल्चर और फॉस्फोरस घुलनशील बैक्टीरिया से उपचारित करें, जिससे पौधों की जड़ों में गांठें बनती हैं और नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है। इससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है।

 

अगेती भिंडी और गर्मी की सब्जियों की बुवाई करें

 

गर्मी के मौसम की सब्जियों की बुवाई के लिए भी यह समय अनुकूल माना जा रहा है। किसान अगेती भिंडी की खेती के लिए -4, परबनी क्रांति और अर्का अनामिका जैसी किस्मों का चयन कर सकते हैं। इन किस्मों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।

 

भिंडी की बुवाई करते समय खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। आमतौर पर प्रति एकड़ 10 से 15 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। इसके अलावा वर्तमान मौसम फ्रेंच बीन और गर्मी की मूली की सीधी बुवाई के लिए भी अनुकूल माना जा रहा है। जिन किसानों ने टमाटर, मिर्च या कद्दू वर्गीय सब्जियों की नर्सरी तैयार कर ली है, वे इन पौधों की रोपाई खेत में कर सकते हैं।

 

गेहूं की फसल में रतुआ रोग पर रखें नजर

 

इस समय कई क्षेत्रों में गेहूं की फसल बढ़वार की अवस्था में है। ऐसे में किसानों को रतुआ रोग की निगरानी लगातार करते रहने की सलाह दी गई है। रतुआ रोग के तीन प्रकार होते हैंपीला, भूरा और काला रतुआ। यदि समय रहते इसकी पहचान नहीं की गई तो यह रोग फसल को काफी नुकसान पहुंचा सकता है।

 

पीला रतुआ आमतौर पर ठंडे मौसम में अधिक सक्रिय रहता है और 10 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके फैलाव के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं भूरा रतुआ मध्यम तापमान और नमी वाले वातावरण में तेजी से फैलता है। काला रतुआ अपेक्षाकृत अधिक तापमान में विकसित होता है। यदि खेत में इन रोगों के लक्षण दिखाई दें तो किसान प्रोपिकोनेजोल आधारित दवा का छिड़काव पानी में मिलाकर कर सकते हैं, जिससे रोग को फैलने से रोका जा सकता है।

 

सरसों और सब्जियों में चेपा कीट से सावधान

 

सरसों और कई सब्जियों में इस समय चेपा कीट का खतरा भी बढ़ जाता है। यह कीट पौधों का रस चूसकर फसल को कमजोर कर देता है और उत्पादन पर असर डालता है। इसलिए किसानों को नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करते रहना चाहिए।

 

यदि खेत में चेपा कीट दिखाई दे तो किसान इमिडाक्लोप्रिड दवा का छिड़काव पानी में मिलाकर कर सकते हैं। ध्यान रखें कि दवा का छिड़काव करने के बाद कम से कम एक सप्ताह तक फसल की तुड़ाई करें, ताकि दवा का असर पूरी तरह समाप्त हो सके और फसल सुरक्षित रहे।

 

प्याज में थ्रिप्स और टमाटर में फल छेदक कीट का प्रबंधन

 

प्याज की फसल में थ्रिप्स नामक कीट भी नुकसान पहुंचाता है। यह कीट पत्तियों का रस चूसता है जिससे पत्तियां सूखने लगती हैं और पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है। इस स्थिति में किसान कीटनाशक दवा को पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं। दवा के साथ चिपकने वाले पदार्थ का उपयोग करने से उसका प्रभाव अधिक समय तक बना रहता है।

 

टमाटर की फसल में फल छेदक कीट भी गंभीर समस्या बन सकता है। इसके नियंत्रण के लिए खेत में पक्षी बैठने के लिए लकड़ी या बांस के डंडे लगाने चाहिए ताकि पक्षी कीटों को खा सकें। इसके अलावा खराब और कीटग्रस्त फलों को इकट्ठा कर मिट्टी में दबा देना चाहिए। किसान फेरोमोन ट्रैप का भी उपयोग कर सकते हैं, जिससे कीटों की संख्या कम करने में मदद मिलती है।

 

बैंगन और गेंदा फसल में रोग-कीट नियंत्रण जरूरी

 

बैंगन की फसल में तना और फल छेदक कीट का प्रकोप अक्सर देखा जाता है। यदि पौधों के किसी भाग में कीट का हमला दिखाई दे तो प्रभावित हिस्सों को तुरंत हटाकर नष्ट कर देना चाहिए। अधिक प्रकोप की स्थिति में उपयुक्त कीटनाशक दवा का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है।

 

गेंदा की खेती करने वाले किसानों को भी फूल सड़न रोग की निगरानी करते रहना चाहिए। यदि पौधों में इस रोग के लक्षण दिखाई दें तो उचित फफूंदनाशक दवा का छिड़काव किया जा सकता है। इससे रोग को फैलने से रोका जा सकता है और फूलों की गुणवत्ता भी बनी रहती है।

 

मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन से मिलेगा फायदा

 

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के अनुसार खेती की रणनीति अपनाना ही सफल खेती की कुंजी है। समय पर सिंचाई, उन्नत किस्मों का चयन, बीज उपचार और कीट-रोग की निगरानी करने से किसान अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

 

आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेतों की नियमित निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी लेते रहें। सही समय पर उठाए गए छोटे-छोटे कदम किसानों को बड़ी हानि से बचा सकते हैं और खेती को अधिक लाभदायक बना सकते हैं।

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