आजकल महंगे फलों और केमिकल से पकाए गए पपीते से हर कोई परेशान है। ऐसे में अगर आप किसान हैं या घर पर बागवानी का शौक रखते हैं, तो पपीता उगाना आपके लिए कम लागत में ज्यादा फायदा देने वाला विकल्प हो सकता है। अच्छी बात यह है कि पपीता लगाने के लिए बड़ी जमीन की जरूरत नहीं होती। इसे खेत, बाड़ी, छत में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।
पपीता सिर्फ स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है, इसमें विटामिन A, C और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यही कारण है कि इसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है।
पपीता गर्म मौसम में अच्छी तरह बढ़ने वाला पौधा है। अगर तापमान बहुत कम हो जाए या पाला पड़ जाए, तो पौधा कमजोर हो सकता है और उसकी बढ़वार रुक जाती है। पपीते के लिए 20 से 35 डिग्री तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। इसलिए इसे ऐसे समय लगाना चाहिए जब मौसम साफ हो और रोज अच्छी धूप मिलती रहे। फरवरी से अप्रैल या जून से जुलाई का समय पपीता लगाने के लिए सही रहता है। सही मौसम में लगाया गया पौधा जल्दी बढ़ता है, मजबूत बनता है और समय पर अच्छे फल देता है।
अगर आप देसी और सस्ता तरीका चाहते हैं, तो पके हुए पपीते से बीज निकालकर पौधा तैयार कर सकते हैं;
तरीका:
पूरी तरह पका हुआ स्वस्थ पपीता लें
उसके बीज निकालकर साफ पानी से धो लें
एक दिन छांव में सुखा लें
बीजों को नर्सरी ट्रे या छोटे गमले में 1–1.5 इंच गहराई पर बो दें
हल्का पानी दें और 10–15 दिन में अंकुर निकल आएंगे
करीब 25–30 दिन बाद मजबूत पौधों को खेत या बड़े गमले में ट्रांसप्लांट कर सकते हैं
पपीते को ढीली, उपजाऊ और पानी निकासी वाली मिट्टी पसंद है
गमले में लगाने का मिश्रण:
50% सामान्य मिट्टी
30% सड़ी हुई गोबर की खाद
20% रेत या कोकोपीट
कम से कम 15–20 इंच गहरा गमला जरूर लें, ध्यान रखें कि नीचे ड्रेनेज होल हो ताकि पानी जमा न हो
खेत में लगाने से पहले 1–2 किलो गोबर की खाद गड्ढे में मिलाएं, इससे जड़ें तेजी से विकसित होती हैं;
पपीते के पौधे को रोजाना 6–8 घंटे धूप चाहिए, कम धूप में पौधा कमजोर रहेगा और फल कम लगेंगे;
पानी देने का नियम:
गर्मियों में रोज हल्का पानी
सर्दियों में 3–4 दिन में एक बार
बरसात में जल निकासी का खास ध्यान
ज्यादा पानी जड़ सड़न का कारण बन सकता है
अच्छी देखभाल के साथ पपीते का पौधा 6 से 8 महीने में फल देना शुरू कर देता है; कुछ उन्नत किस्में 5–6 महीने में भी फल देने लगती हैं;
एक स्वस्थ पौधा सालभर में 25–40 किलो तक उत्पादन दे सकता है यही कारण है कि कई किसान अब पपीते की खेती को अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में अपना रहे हैं
पपीते में कभी-कभी रस चूसने वाले कीट या फफूंदी रोग लग सकते हैं;
घरेलू बचाव:
5 लीटर पानी में 50 ml नीम तेल मिलाकर छिड़काव
छाछ का घोल हल्का स्प्रे करें
पौधे के आसपास सफाई रखें
रासायनिक दवा का कम से कम उपयोग करें जैविक तरीका अपनाने से फल की गुणवत्ता बेहतर रहती है;
कम समय में उत्पादन
बाजार में सालभर मांग
कम देखभाल में अच्छा परिणाम
घर और बाजार दोनों के लिए उपयोगी
अगर आप किसान हैं तो इसे मुख्य फसल के साथ सहफसल के रूप में भी लगा सकते हैं होम गार्डनर्स के लिए यह “स्वस्थ परिवार” की गारंटी है
आज सोशल मीडिया पर “Grow Your Own Food” ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है लोग बाजार के बजाय अपने घर में फल और सब्जियां उगाने को प्राथमिकता दे रहे हैं पपीता उन फलों में से एक है जिसे उगाना आसान, खर्च कम और फायदा ज्यादा है;
निष्कर्ष
अगर आपके पास थोड़ी सी जगह और थोड़ी सी मेहनत है, तो आप भी घर पर पपीता उगाकर ताजा, मीठा और केमिकल-फ्री फल पा सकते हैं; किसान भाइयों के लिए यह अतिरिक्त आय का जरिया है, और होम गार्डनर्स के लिए स्वास्थ्य का खजाना।
अब इंतजार किस बात का? इस सीजन अपने आंगन में पपीता जरूर लगाएं और सेहत के साथ कमाई भी बढ़ाएं ।
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