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मध्यप्रदेश के युवा इंजीनियर ने बनाया ऐसा खास ड्रोन, दवा का छिड़काव के साथ-साथ कर सकते है बीज की बुवाई
मध्यप्रदेश के युवा इंजीनियर ने बनाया ऐसा खास ड्रोन, दवा का छिड़काव के साथ-साथ कर सकते है बीज की बुवाई

New Technology: कृषि को लाभदायक बनाने के लिए देश के कृषि वैज्ञानिक लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं, जिसमें उन्नत बीजों, उर्वरकों और कीटनाशकों से कृषि उपकरण भी बनाए जा रहे हैं। इन सब में तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि लागत कम हो और साथ ही उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके। दूसरी ओर, कृषि के पारंपरिक तरीकों में भी काफी बदलाव आया है।

जबलपुर के युवा इंजीनियर भी वर्षों से कृषि के नए-नए तरीके विकसित करने में लगे हुए हैं। इस बार इस युवा इंजीनियर ने बुवाई के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर सबको चौंका दिया है। इंजीनियर अभिनव ठाकुर ने अपनी तकनीक से न केवल संस्कारधानी बल्कि उत्तर प्रदेश में भी शहर का नाम रोशन किया है। आइए आपको भी बताते हैं क्या है आधुनिक बुवाई का नया तरीका...



ड्रोन में एक टैंक फिट किया जाता है, जिसमें धान या गेहूं के बीज भरे जाते हैं और फिर बीजों को खेत में उड़ाकर क्यारियों में छिड़का जाता है। एक बार उड़ान भरने के बाद यह ड्रोन 6 हेक्टेयर का कवरेज देता है।

Agriculture Drone: अभिनव द्वारा बनाए गए ड्रोन का उपयोग कीटनाशकों के छिड़काव के साथ-साथ कृषि की बुवाई के लिए किया जा सकता है।

कृषि को लाभदायक बनाने के लिए देश के कृषि वैज्ञानिक लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्नत बीजों, उर्वरकों और कीटनाशकों से कृषि उपकरण भी बनाए जा रहे हैं। इन सब में तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे लागत कम हो सके साथ ही उत्पादन क्षमता भी बढ़ाई जा सके। दूसरी ओर, कृषि के पारंपरिक तरीकों में भी काफी बदलाव आया है। जबलपुर के युवा इंजीनियर भी विगत कई वर्षों से कृषि के नए-नए तरीके विकसित करने में लगे हुए हैं। इस बार इस युवा इंजीनियर ने बुवाई के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर सबको चौंका दिया है.

ट्रैक्टर और सीड ड्रिल की मदद से खेतों में बुवाई का तरीका बदला है और आने वाले समय में ड्रोन की मदद से खेतों में बीज बोए जाएंगे। जबलपुर के माधोताल इलाके के रहने वाले अभिनव ने एक ऐसा ड्रोन बनाया है जो 30 किलो तक वजन उठाने की क्षमता रखता है।


कृषि का भविष्य है यह ड्रोन
ड्रोन में एक टैंक फिट किया जाता है, जिसमें धान या गेहूं के बीज भरे जाते हैं और फिर बीजों को खेत में उड़ाकर क्यारियों में छिड़का जाता है। अभिनव ने बीएचयू के वैज्ञानिकों के अनुरोध पर मिर्जापुर के खेतों में इसका प्रदर्शन किया। अभिनव ने बताया कि यूपी के ज्यादातर जिलों में धान की कटाई के बाद ठंड का मौसम आता है, जिससे खेत नहीं सूखते और ट्रैक्टर सीड ड्रिल से गेहूं की बुवाई करना मुश्किल हो जाता है।

इस वजह से गेहूं के बीज का छिड़काव किया जाता है, जिसमें कई तरह की दिक्कतें भी आती हैं। इस समस्या की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने ड्रोन को मॉडिफाई किया, जिसमें टैंक के तल पर सीडड्रिल जैसे छेद वाली कीप लगाई गई और इसके जरिए बीज नीचे गिर गया। इस डेमो के दौरान सैकड़ों किसान और कृषि वैज्ञानिक भी मैदान में मौजूद थे, जिन्होंने इसे कृषि का भविष्य बताया।

एक ही बार में 6 हेक्टेयर का कवरेज देता है यह ड्रोन
इसके लिए किसान को ड्रोन चलाने की जानकारी होना जरूरी है। मोबाइल या टैबलेट में खेत का नक्शा गूगल मैप की मदद से फीड किया जाता है, जिसके बाद एक बार शुरू होने के बाद यह अपने आप खेत के क्षेत्रफल के अनुसार बीज या बैटरी खत्म होने तक और बीज या बैटरी खत्म होने के बाद बोता है। समाप्त होकर यह स्वतः ही अपने स्थान पर वापस आ जाता है और रुक जाता है।


अभिनव ने इस ड्रोन को देश के किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए बनाया है। इसकी डिजाइन और क्षमता को किसानों की जरूरत के मुताबिक और 4-5 साल की मेहनत के बाद विकसित किया गया है। यह देश का सबसे बड़ा कृषि ड्रोन है, जो एक बार में तीस लीटर दवा का छिड़काव कर सकता है। एक बार उड़ान भरने के बाद, ड्रोन 6 हेक्टेयर का कवरेज देता है। यह कहा जा सकता है कि ड्रोन तकनीक कम समय और कम लागत में आधुनिक कृषि में क्रांति ला रही है।