Krati Agrawal
29-01-2026मूली की खेती में एक छोटी सी गलती और पूरी पैदावार खतरे में
मूली बाहर से अच्छी, अंदर से खोखली क्यों हो जाती है?
जानिए कैसे मूली 30 दिन में बन सकती है कमाई का भरोसेमंद जरिया
मूली की खेती किसान इसलिए करता है क्योंकि यह कम समय में तैयार होकर पैसा देती है। बुवाई के कुछ ही दिनों बाद खेत हरा दिखाई देने लगता है और उम्मीद बढ़ जाती है कि इस बार फसल अच्छी होगी।
लेकिन कई बार मूली तो बढ़िया दिखती है, पर काटने पर अंदर से खोखली निकलती है। ऐसी मूली न घर में पसंद आती है, न मंडी में सही दाम दिला पाती है।
असल में मूली की खेती मेहनत से ज्यादा समझदारी मांगती है। थोड़ी सी लापरवाही पूरी पैदावार पर भारी पड़ सकती है।
मूली उन सब्जियों में शामिल है, जो बहुत कम समय में तैयार हो जाती हैं। यही वजह है कि छोटे और मध्यम किसान इसे तेजी से अपनाते हैं।
मूली की खेती के मुख्य फायदे:
फसल अवधि केवल 25–30 दिन
कम लागत और कम जोखिम
बाजार में साल भर मांग
पत्तियाँ भी बिक जाती हैं
अगर खेती सही तरीके से की जाए, तो मूली एक महीने में ही अच्छी आमदनी दे सकती है।
अक्सर किसान बड़ी गलती नहीं करता, लेकिन छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देता है।
सबसे आम गलतियाँ ये होती हैं:
पुराने बीज का इस्तेमाल
जरूरत से ज्यादा यूरिया डाल देना
सिंचाई में अनियमितता
समय पर गुड़ाई न करना
इन गलतियों का असर सीधा मूली के आकार, वजन और गुणवत्ता पर पड़ता है।
यह समस्या लगभग हर मूली उगाने वाले किसान ने कभी न कभी देखी है। मूली बाहर से मोटी और चमकदार होती है, लेकिन काटने पर अंदर खाली निकलती है।
खोखली मूली बनने के मुख्य कारण:
ज्यादा नाइट्रोजन (यूरिया) का प्रयोग
कभी ज्यादा, कभी कम पानी देना
ज्यादा गर्मी में खेती
देर से कटाई करना
इन कारणों से मूली का अंदरूनी विकास ठीक से नहीं हो पाता।
अगर मूली से अच्छा उत्पादन और अच्छा दाम चाहिए, तो खेती का तरीका सही होना जरूरी है।
ध्यान रखने योग्य बातें:
मिट्टी भुरभुरी और जल निकास वाली हो
गोबर की सड़ी खाद का उपयोग करें
खाद संतुलित मात्रा में दें
5–7 दिन के अंतर से हल्की सिंचाई करें
साथ ही खेत में खरपतवार न बढ़ने दें और समय-समय पर गुड़ाई करते रहें।
मूली की सबसे बड़ी ताकत है इसका जल्दी तैयार होना।
बुवाई के लगभग एक महीने के भीतर ही फसल बिकने लायक हो जाती है। अगर मूली सही आकार की और अंदर से भरी हुई हो, तो बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।
30 दिन में कमाई के लिए जरूरी बातें:
समय पर बुवाई और कटाई
सही देखभाल
बाजार की मांग के अनुसार बिक्री
इस कमाई से किसान अगली फसल का खर्च भी निकाल सकता है।
अगर किसान मूली को सीधे बाजार या ग्राहक तक पहुँचाता है, तो उसे बेहतर दाम मिलते हैं।
सीधी बिक्री के विकल्प:
गांव की हाट
नजदीकी मंडी
सब्जी दुकानदार
घर-घर सप्लाई
बिचौलियों से बचने पर मेहनत का पूरा फायदा किसान को मिलता है।
मूली की खेती में ज्यादा खर्च या बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती।
जरूरत होती है सही बीज, संतुलित खाद, समय पर पानी और सही समय पर कटाई की।
अगर किसान इन बातों का ध्यान रखे, तो मूली 30 दिन में कमाई देने वाली फसल बन सकती है।
लेकिन अगर लापरवाही हुई, तो वही मूली नुकसान का कारण भी बन सकती है।
इसलिए मूली की खेती करें, लेकिन सोच-समझकर।
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