Sanjay Kumar Singh
12-12-2025फसलों पर कीट-रोग नियंत्रण के लिए रासायनिक कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग आज एक गंभीर चुनौती बन चुका है। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होता है, बल्कि उपज की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में किसानों के बीच प्राकृतिक, सुरक्षित और कम लागत वाले विकल्पों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
इन्हीं विकल्पों में बेसन–छाछ से तैयार देसी ऑर्गेनिक पेस्ट कंट्रोल एक अत्यंत प्रभावी, सुरक्षित और सरल उपाय के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। किसान इसे बिना किसी विशेष उपकरण के घर पर ही आसानी से तैयार कर सकते हैं।
हाल के दिनों में यह देखा गया कि उत्तर प्रदेश के अनेक प्रगतिशील किसानों ने बेसन–छाछ का उपयोग कर देसी जैविक कीटनाशक तैयार करना शुरू किया है। इसका परिणाम इतना प्रभावशाली रहा कि यही हर्बल स्प्रे अब मेट्रो शहरों में होम गार्डेनिंग और टेरेस गार्डेनिंग के लिए प्रीमियम दरों पर बेचा जाने लगा है। यह न केवल इसकी प्रभावशीलता का प्रमाण है, बल्कि जैविक खेती के प्रति बढ़ती जागरूकता और उपभोक्ताओं के प्राकृतिक उत्पादों की ओर झुकाव को भी दर्शाता है।
बेसन और छाछ दोनों ही प्राकृतिक पदार्थ हैं, जिनकी विशेषताएँ कीट नियंत्रण में उपयोगी होती हैं।
बेसन (चना दाल का आटा) पौधे की पत्तियों पर चिपचिपी परत बनाता है, जिससे छोटे कीट जैसे एफिड, सफेद मक्खी, थ्रिप्स आदि नियंत्रित होते हैं।
छाछ में मौजूद लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया फफूंदनाशी (fungistatic) गुण रखते हैं, जो रोगजनक फफूंद के विकास को रोकते हैं।
इन दोनों को मिलाने पर बनता है एक शक्तिशाली देसी ऑर्गेनिक स्प्रे।
इस देसी स्प्रे को बनाने के लिए निम्न सामग्री पर्याप्त है – बेसन – 250 ग्राम; छाछ – 1 लीटर (थोड़ी खट्टी हो तो और अच्छा); पानी – 8–10 लीटर; नीम की पत्ती/नीम का काढ़ा – 250–500 मिली (वैकल्पिक, पर प्रभाव बढ़ाता है); गाय का गोमूत्र – 250–500 मिली (वैकल्पिक) एवं छानने के लिए साफ कपड़ा
(क) मिश्रण तैयार करना
एक बाल्टी में 1 लीटर छाछ डालें। उसमें 250 ग्राम बेसन धीरे-धीरे घोलते हुए मिलाएँ, ताकि गांठें न बनें। मिश्रण को 30 मिनट तक भिगोने दें। इससे बेसन पूरी तरह फूल जाता है और घोल एक समान बन जाता है।
(ख) घोल तैयार करना
अब इस घोल में 8–10 लीटर साफ पानी मिलाएँ। यदि संभव हो तो नीम का काढ़ा या गोमूत्र मिलाएँ। पूरे मिश्रण को 10–15 मिनट अच्छी तरह चलाते रहें। अंत में पतले कपड़े से छानकर स्प्रे पंप में भरें।
बेसन की चिपचिपाहट पत्तियों पर एक पतली परत बना देती है। यह परत मुलायम शरीर वाले कीटों की सांस लेने वाली नलिकाओं (spiracles) को बाधित कर देती है। एफिड, जसिड, सफेद मक्खी, थ्रिप्स जैसी कीटों की संख्या तेजी से कम हो जाती है।
छाछ में मौजूद लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया रोगजनक फफूंद के विकास को रोकते हैं।पाउडरी मिल्ड्यू, डाउनी मिल्ड्यू, लीफ स्पॉट जैसे रोगों में अच्छा प्रभाव दिखता है।
छाछ में मौजूद पोषक तत्त्व पत्तियों के कणों को सक्रिय करते हैं। पौधों की चमक बढ़ती है और पत्तियाँ अधिक हरी दिखती हैं।
सुबह या शाम के समय स्प्रे करें। तेज धूप, बारिश या हवा में स्प्रे न करें। 7–10 दिनों के अंतर पर नियमित छिड़काव करें। कीट अधिक होने पर 5 दिन के अंतर पर दोहराएँ। पत्तियों के ऊपरी और निचले दोनों हिस्सों पर समान रूप से छिड़काव आवश्यक है।
यह स्प्रे लगभग सभी उद्यानिक और कृषि फसलों में उपयोगी है यथा
सब्जियाँ: मिर्च, टमाटर, बैंगन, लौकी, कद्दू, भिंडी
फल: पपीता, आम, अमरूद, केला
फूल: गुलाब, गेंदे, डहेलिया
खेत फसलें: मूंग, उड़द, मटर
मिश्रण हमेशा ताज़ा तैयार करें, 24 घंटे से ज़्यादा न रखें। भारी वर्षा या तेज धूप में स्प्रे का असर कम हो सकता है। अत्यधिक खट्टी छाछ का उपयोग कम मात्रा में करें। दवा के साथ किसी रासायनिक कीटनाशक को न मिलाएँ।
पूरी तरह ऑर्गेनिक और सुरक्षित
अत्यंत कम लागत
मिट्टी, पर्यावरण और मनुष्य के लिए हानिरहित
पौधों को पोषण भी मिलता है
शुरुआती पड़ी संक्रमण में अत्यंत प्रभावी
अंत में....
बेसन–छाछ से तैयार देसी ऑर्गेनिक पेस्ट कंट्रोल एक भरोसेमंद, सुरक्षित और किफायती तरीका है, जिसे हर किसान अपने घर पर आसानी से बना सकता है। यह न केवल कीट-रोगों को नियंत्रित करता है, बल्कि पौधों को और अधिक स्वस्थ और हरा-भरा भी बनाता है। रासायनिक दवाओं के विकल्प के रूप में यह स्प्रे जैविक खेती को तेजी से बढ़ावा दे रहा है और किसानों के लिए एक उत्कृष्ट समाधान साबित हो रहा है।
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