Kisaan Helpline
मध्य प्रदेश में मावठे की बारिश का अलर्ट: फसलों पर असर और किसानों के लिए जरूरी सलाह
मध्य प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से प्रदेश के कई जिलों में 27 और 28 जनवरी को मावठे की बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, इस बदलाव से तापमान में और गिरावट आएगी, जिससे ठंड का असर तेज हो सकता है।
इस मौसम परिवर्तन का सीधा प्रभाव रबी सीजन की प्रमुख फसलों जैसे चना, गेहूं, मसूर, सरसों, मटर और सब्जी फसलों पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को पहले से सतर्क रहना और उचित उपाय अपनाना बेहद जरूरी हो गया है।
प्रदेश के कई जिलों में बारिश और कोहरे का खतरा
मौसम विभाग ने भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा और जबलपुर संभाग के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ जैसे जिलों में घने कोहरे की भी संभावना है।
कोहरे और नमी बढ़ने से फसलों में फफूंदजनित रोग, कीट प्रकोप और जड़ सड़न जैसी समस्याएं तेजी से फैल सकती हैं।
मावठे की बारिश से फसलों को होने वाला संभावित नुकसान
1. चना और मसूर
·
अधिक नमी से उकठा रोग, जड़ गलन और फली सड़न का खतरा बढ़ जाता है।
·
फली छेदक कीट का प्रकोप बढ़ सकता है।
2. गेहूं
·
लगातार नमी रहने पर पीला रतुआ, झुलसा रोग और पत्तियों में फंगल संक्रमण हो सकता है।
·
खेतों में जलभराव से पौधों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं।
3. सरसों
·
अधिक नमी से सफेद रतुआ और माहू (चेपा) का प्रकोप बढ़ सकता है।
·
फूल और फलियों के झड़ने की संभावना रहती है।
4. सब्जी फसलें
·
टमाटर, मटर, फूलगोभी, आलू जैसी फसलों में ब्लाइट, सड़न और कीट संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
·
खेतों में पानी भरने से पौधे खराब हो सकते हैं।
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां और सलाह
·
जल निकासी की व्यवस्था करें
·
बारिश से पहले खेतों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था करें, ताकि जलभराव न हो और जड़ों को नुकसान न पहुंचे।
फसल पर नियमित निगरानी रखें
कोहरा और नमी के बाद रोग व कीटों की नियमित जांच करें। शुरुआती लक्षण दिखते ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।
रोग नियंत्रण के उपाय
·
चना, मसूर और सब्जियों में फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
·
गेहूं में पीला रतुआ दिखने पर तुरंत प्रमाणित फफूंदनाशक का प्रयोग करें।
कीट नियंत्रण
चना व सब्जियों में फली छेदक व माहू के लिए अनुशंसित कीटनाशक का सही मात्रा में छिड़काव करें।
सिंचाई रोकें
बारिश की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त सिंचाई से बचें, इससे फसल को नुकसान हो सकता है।
ठंड बढ़ने से पाले का खतरा भी
मावठे की बारिश के बाद प्रदेश में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है, जिससे पाले का खतरा बढ़ सकता है। इससे आलू, मटर, सब्जी और चना जैसी फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
पाले से बचाव के उपाय:
·
शाम के समय हल्की सिंचाई करें
·
खेतों के चारों ओर धुआं करें
·
फसल पर सल्फर का हल्का छिड़काव लाभकारी रहता है
मध्य प्रदेश में आने वाली मावठे की बारिश किसानों के लिए लाभकारी भी हो सकती है, लेकिन लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है। यदि किसान समय रहते सतर्क होकर उचित कृषि उपाय अपनाएं, तो फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और उत्पादन में गिरावट रोकी जा सकती है।
किसानों से अपील है कि वे मौसम अपडेट पर नजर रखें, कृषि विभाग की सलाह मानें और समय पर फसल सुरक्षा उपाय अपनाएं।
Smart farming and agriculture app for farmers is an innovative platform that connects farmers and rural communities across the country.
© All Copyright 2024 by Kisaan Helpline